परिवहन विभाग आरटीओ ने फेरीं जिम्मेदारियों से आँखें!

 

बसों से गायब किराया सूची, घूम रहे काले कांच के वाहन

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। संवेदनशील हो चुके सिवनी जिले में काले शीशे वाले, मूल वाहन को काटकर बनाये गये वाहन, तेज आवाज वाले साइलेंसर युक्त वाहन, बिना नंबर के वाहन बेखौफ दौड़ रहे हैं और कोतवाली पुलिस, यातायात पुलिस, परिवहन विभाग नीरो के मानिंद चैन की बंसी बजाता नज़र आ रहा है।

सिवनी में जो कुछ हो रहा है उसे देखकर लगता है मानो सरकार के नियम कायदों से इन जिम्ममेदार विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को ज्यादा लेना – देना नहीं रह गया है। सरकारी नियमों की दुहाई देने वाले सरकारी नुमाईंदों की नज़रें इस तरह के वाहनों पर इनायत क्यों नहीं होतीं, यह शोध का ही विषय माना जा रहा है।

किराये पर विवाद : सरकारी सड़क परिवहन निगम जबसे बंद हुआ है उसके बाद से बस में यात्रियों और परिचालकों के बीच आये दिन विवाद होना आम बात हो गयी है। इसका कारण बस संचालकों के द्वारा मनमाना किराया वसूलना ही प्रमुख माना जा रहा है। यात्री बसों में किराया सूची नदारद ही है जिसके चलते, यात्री और परिचालक आपस में उलझते ही नज़र आते हैं।

देखा जाये तो यात्री बस में किराया सूची अंकित होने से यात्रियों को यह भी पता चल सकेगा कि जिस बस में वे सवार हैं वह बस किस-किस स्थान पर रूकेगी। अभी सुपर फास्ट के नाम पर चलने वाले वाहनों को भी पैसेंजर वाहनों के मानिंद जहाँ मन आया वहाँ रोक दिया जा रहा है।

काले कांच : इसी तरह माननीय न्यायालय के निर्देशों के बाद भी शहर में घूमने वाले चार पहिया वाहनों से काले कांच हटवाने की मुहिम भी टांय – टांय फिस्स हो चुकी है। तत्कालीन नगर निरीक्षक हरिओम शर्मा के द्वारा अपने वाहन के कांच से फिल्म हटा ली गयी थी, इसके बाद से किसी भी नगर निरीक्षक या यातायात निरीक्षक के द्वारा काले शीशे वाले वाहनों से फिल्म हटवाने की कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया गया है।

माना जा रहा है कि काले कांच वाले वाहनों में बाहर से अंदर देखना संभव नहीं होता है। इन परिस्थितियों में इस तरह के वाहनों में अनैतिक गतिविधियों का संचालन भी आसानी से किया जा सकता है।

मॉडीफाइड वाहन : इसी तरह वाहनों के आकार को परिवर्तित (मॉडीफाई) कराने का चलन चल पड़ा है। जानकारों का कहना है कि मॉडीफाइड वाहनों को परिवहन अधिकारी कार्यालय की अनुमति आवश्यश्क होती है किन्तु, किसी के द्वारा इसकी अनुमति नहीं ली जा रही है। इस तरह के वाहन भी बेखौफ ही सड़कों पर घूम रहे हैं।

तेज आवाज के साइलेंसर : बताया जाता है कि शहर भर में तेज आवाज वाले साइलेंसर लगाने का फितूर युवाओं पर सवार है। शान की सवारी समझी जाने वाली बुलॅट मोटर साइकिल में इंदौरी साइलेंसर, जिसमें रेस करने पर पटाखे की आवाज निकलती है के अलावा तेज आवाज वाले साइलेंसर भी रात के सन्नाटे में लोगों के चैन में खलल डालते नज़र आ जाते हैं।

मनमाने तरीके से लिखे नंबर : इसी तरह दोपहिया और चार पहिया वाहनों में पिछले कुछ वर्षों से मनचाहे तरीके से नंबर लिखवाने का चलन सा निकल पड़ा है। दो पहिया वाहनों पर तो इस तरह के नंबर लिखे होते हैं जिन्हें पढ़ना बेहद दुष्कर कार्य ही साबित होता है। इसके अलावा नंबर प्लेट पर तरह – तरह के चित्र भी सजे हुए हैं जो परिवहन नियमों को धता बता रहे हैं।

प्रेस और पुलिस : जिले भर में दौड़ने वाले अनेक वाहनों में अवैध रूप से प्रेस और पुलिस लिखा आसानी से देखा जा सकता है। जिन वाहन स्वामियों का प्रेस या पुलिस से लेना – देना भी नहीं है वे भी अपने – अपने वाहनों में प्रेस या पुलिस लिखवाकर रूआब झाड़ते देखे जा सकते हैं। कुछ दिनों पूर्व जिला जन संपर्क कार्यालय के द्वारा समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों की सूची चाही गयी थी, इस मामले में क्या हुआ इस बारे में भी शायद ही कोई जानता हो।