रशि के अनुसार डालें होलिका में आहूति

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। इस वर्ष 09 मार्च को होलिका दहन एवं 10 मार्च को रंगों का त्यौहार मनाया जायेगा। नौ मार्च को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त प्रदोष काल से मध्य रात्रि से कुछ समय पूर्व तक है। प्रदोष काल सूर्यास्त 06ः42 बजे से लेकर निशामुख रात्रि 11 बजकर 26 मिनिट तक है।

होलिका दहन के दिन सुबह 06ः08 मिनिट से लेकर दोपहर 12ः32 बजे तक भद्रा है। भद्रा को विघ्न कारक माना गया है। ज्योतिष की जानकार आरजू विश्वकर्मा ने बताया कि भद्रा में होलिका दहन करने से हानि और अशुभ फल मिलते हैं। इसी भद्रा में होलिका दहन नहीं किया जाता है।

राशियों के अनुसार होलिका में डालें आहूति : मेष और वृश्चिक राशि के लोग गुड़ की आहूति दें। वृष राशि वाले होलिका में चीनी की आहूति दें। मिथुन और कन्या राशि के लोग कपूर की तो कर्क के लोग लोहबान की आहूति दें। इसके साथ ही सिंह राशि के लोग गुड़ की, तुला राशि वाले कपूर की, धनु और मीन के लोग जौ और चना की एवं मकर व कुंभ वाले तिल कत होलिका दहन में आहूति दें।

होलिका दहन पूजा की विधि : होलिका दहन से पहले विधि विधान के साथ होलिका की पूजा करें। इस दौरान होलिका के सामने पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करने का विधान है। पहले होलिका को आचमन से जल लेकर सांकेतिक रूप से स्नान के लिये जल अर्पण करें।

इसके पश्चात कच्चे सूत को होलिका के चारों और तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटना है। सूत के माध्यम से उन्हें वस्त्र अर्पण किये जाते हैं। फिर रोली, अक्षत, फूल, फूल माला, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें। पूजन के बाद लोटे में जल लेकर उसमें पुष्प, अक्षत, सुगन्ध मिला कर अर्घ्य दें। इस दौरान नयी फसल के कुछ अंश जैसे पके चने और गेहूँ, जौ की बालियां भी होलिका को अर्पण करने का विधान है।