दूर-दूर तक है प्रसिद्ध पांजरा का मेघनाथ मेला

 

(आगा खान)

कान्हीवाड़ा (साई)। जिले में आदिवासी परंपरा से जुड़े कई स्थान हैं। पांजरा में साठ फीट का एक विशाल खंबा है जिसे मेघनाथ कहा जाता है। मन्नत पूरी होने पर लोग इस खंबे पर उलटा लटकते हैं। मेघनाथ की परंपरा दूसरे जिलों में भी है लेकिन पंाजरा के इस मेघनाथ को एशिया का सबसे बड़ा मेघनाथ माना जाता है।

होली के दिन जहाँ भारत भर में हर जगह रंग गुलाल उड़ते हैं वहीं जिला मुख्यालय से लगभग 48 किलोमीटर दूर तहसील केवलारी के ग्राम पंचायत पांजरा में नज़ारा ही कुछ अलग होता है। यहाँ न होली खेली जाती है और न ही रंग गुलाल उड़ता है। यहाँ एशिया के सबसे ऊँचे 60 फीट मेघनाथ में वीर झूलते हैं।

आसपास के ग्राम क्षेत्रों से गाजे बाजे के साथ झूमते – नाचते वीर आते हैं। वीर हकड़े बिर दृ र ओ दृ ओ दृ ओ चिल्लाते हुए आते हैं। वीर उन्हें कहते हैं जिनकी मन्नतें पूरी होती हैं ऐसे वीर 60 फीट ऊँचे मेघनाथ की मचान में चढ़ाकर उलटे होकर घूमते हैं। चक्कर पूरे होने पर वीर ऊपर से नीचे नारियल फेंकते हैं। वीर का इससे भार उतर जाता है। यह सिलसिला कई वर्षों से चला आ रहा है।

आदिवासी परंपरा से जुड़ी मान्यता : रंगों के त्यौहार को इस तरह मनाने की यह अनोखी परंपरा आदिवासी सभ्यता से जुड़ी हुई है। ग्राम पांजरा में हर साल मेघनाथ मेले का आयोजन किया जाता है। आस्था और मन्नतों से जुड़े इस मेले में मेघनाथ के प्रतीक स्वरूप 60 फीट ऊँचा लकड़ी का स्तंभ लगाया जाता है। इस दिन का यहाँ के लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं।

तीन लोग चढ़ाते हैं ऊपर : ग्राम पांजरा का यह मेघनाथ मेला एशिया में सबसे बड़ा है जिसके मुख्य स्तंभ में 28 खूंटी लगायी जाती हैं। इन्हीं के माध्यम से युवक ऊपर चढ़ता व उतरता है। इसके ऊपरी हिस्से में तीन लोग खड़े हो सकें इसके लिये एक मचान तैयार किया जाता है। ये जितना आकर्षक है उतना खतरनाक भी होता है लेकिन बरसों की आस्था हर साल यहाँ 60 फीट ऊँचे स्तंभ में देखने मिलती है।

डेरा बाबा की करते हैं पूजा : संतान प्राप्ति, विवाह, बीमारी सहित किसी भी परेशानी का निदान मेघनाथ की पूजा ही होती है। मन्नत पूरी होने पर वीर फडेरा बाबा की विधि विधान के साथ पूजा की जाती है। इस दौरान मेघनाथ के नीचे वीर को विभिन्न व्यंजनों के साथ मुर्गे की बलि दे उसके माँस का भोग भी लगाया जाता है।

नहीं चलता रंग गुलाल : धुरेड़ी के दिन जहाँ लोग रंग गुलाल से बचने के लिये पुराने वस्त्र पहनते हैं। वहीं ग्राम पांजरा और उसके आसपास के लगभग एक दर्जन से अधिक ग्राम के लोग स्वच्छ और नवीन वस्त्र पहनकर मेघनाथ मेला में आते हैं। मेले में जमकर खरीददारी होती है वहीं बच्चे कोई आइसक्रीम तो कोई झूले का आनंद लेता नज़र आता है।

दूर-दूर से आते हैं लोग : मेघनाथ मेले में जिले के दूर दराज के ग्राम के साथ साथ प्रदेश के अन्य राज्यों से भी लोग मेघनाथ मेले में आदिवासी वीर के हैरत अंगेज दृश्य को देखने के लिये आते है। दूसरे राज्यों से भी लोग भी अब इस मेले में आने लगे हैं।