कब रूक पायेंगे फोरलेन पर हादसे!

 

(शरद खरे)

सिवनी जिले में सड़क हादसों की संख्या में एकाएक बढ़ौत्तरी हुई है। इसमें अनेक लोग काल कलवित भी हुए हैं। यह विचारणीय प्रश्न ही माना जायेगा कि अचानक ही कैसे यहाँ सड़क हादसों में लोगों की जान गयी हैं। निश्चित तौर पर कहीं न कहीं गड़बड़ी अवश्य ही है।

इसमें फोरलेन पर हादसों की तादाद बढ़ी है, जिस पर शासन को विचार अवश्य करना चाहिये। हो सकता है इसके निर्माण में लापरवाही बरती गयी हो, या मानकों को ताक पर रखा गया हो। फोरलेन जैसे मार्ग दिल्ली और उसके आसपास बहुतायत में हैं, पर वहाँ हादसों की दर इतनी ज्यादा नहीं है।

जिला प्रशासन को चाहिये कि इन हादसों की संख्या पर गौर कर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को इसके लिये एक पत्र अवश्य लिखे, जिसमें सिवनी जिले के अंदर बनी सड़क की जाँच करवायी जाये कि यह मानक आधार पर बनी है अथवा नहीं? एनएचएआई का हाईवे पेट्रोलिंग वाहन भी सड़क पर कम, शहर के पॉश इलाके बारापत्थर की दुकानों के सामने ज्यादा दिखायी देता है।

एनएचएआई की टो वेन (जिस क्रेन से वाहनों को खींचा जाता है), एंबुलेंस का भी अता-पता नहीं है। सड़क निर्माण के वक्त एनएचएआई और निर्माण के लिये पाबंद निज़ि कंपनी के बीच हुए अनुबंध के हिसाब से क्या-क्या होना चाहिये था और क्या नहीं हो पाया, इस बारे में भी जाँच होनी चाहिये थी।

सड़क निर्माण का कार्य वर्ष 2008 में अवरूद्ध हुआ था। विडंबना ही कही जायेगी कि एनएचएआई के मानकों के हिसाब से यहाँ एक ट्रामा यूनिट की स्थापना वर्ष 2010 तक की जाकर इसे आरंभ करवा दिया जाना चाहिये था, जो नहीं हुआ। जिला चिकित्सालय के अंदर यह यूनिट बनकर पाँच वर्षों से धूल खा रहा है। यहाँ पहुँचने के लिये घुमावदार रास्तों से होकर जब घायल मरीज़ यहाँ पहुँचेगा, तब उसे राहत तो मिलेगी पर देखा जाये तो इसे सड़क पर ही बनाया जाना चाहिये था। अगर इसे फोरलेन के बायपास के इर्द-गिर्द बनाया जाता तो निश्चित तौर पर यह उपयोगी साबित होता। फोरलेन के बायपास पर इसकी संस्थापना की जानी चाहिये थी, किन्तु इसके निर्माण के उपरांत जिले के सांसद और विधायकों ने इस मामले में मौन ही साधे रखा गया है, जो वाकई चिंता की बात मानी जा सकती है।

फोरलेन से इतर दुर्घटनाओं के संबंध में देखा जाये तो इस मामले का दूसरा पहलू यह है कि पालकों को भी इसके लिये चिंतित होना चाहिये। पालकों को चाहिये कि वे अपने जवान होते बच्चों को वाहन चलाने देते समय हिदायत अवश्य दें। इसके लिये आवश्यक है कि गाहे-बेगाहे वे भी अपने बच्चों के साथ बैठें और उसके द्वारा वाहन चलाये जाने पर नज़र रखें। वह अगर वाहन तेज चलाता है तो उसे इसके लिये रोकें। अमूमन देखा गया है कि आज की युवा पीढ़ी वाहन लेकर हवा में उड़ती ही नज़र आती है।

शहर के अलावा ग्रामीण अंचलों में आवारा मवेशी, सड़कों पर विचरण करते हैं। एनएचएआई के मार्ग पर भी सड़कों पर आवारा मवेशी अचानक ही प्रकट हो जाते हैं। यह वाकई दुःखद ही है। इसके साथ ही साथ सड़कों पर निर्माण सामग्री फैली पड़ी होती है। अतिक्रमण के चलते भी वाहन चलाना दुष्कर ही साबित होता है। इन सभी मामलों में गंभीरता के साथ विचार कर, कदम उठाने की महती जरूरत अब महसूस की जाने लगी है।

संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि वे ही कम से कम इस संवेदनशील मामले में स्वसंज्ञान से कदम उठाकर एनएचएआई का ट्रामा केयर यूनिट बनवाने और जिला चिकित्सालय के शोभा की सुपारी बने इस यूनिट को आरंभ करवाने के मार्ग प्रशस्त अवश्य करें।

 

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