महाकालेश्वर मंदिर में भस्मारती के दौरान अबीर-गुलाल से खेली गई होली

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

उज्‍जैन (साई)। महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग मंदिर में मंगलवार सुबह 4 बजे भस्मारती में अबीर-गुलाल से होली खेली गई। इसके बाद शहर में होली उत्सव शुरू हुआ। परंपरा के अनुसार उज्जैन शहर में सबसे पहले त्योहारों को मनाने की शुरुआत महाकाल मंदिर से ही होती है, इसके बाद पूरा शहर उत्सव मनाता है। इसके पहले फाल्गुन पूर्णिमा पर सोमवार संध्या आरती में पुजारियों ने अवंतिकानाथ भगवान महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से होली खेली गई। आरती के उपरांत परंपरा अनुसार मंदिर परिसर में होलिका दहन किया गया। इधर, सिंहपुरी में 5 हजार कंडों से होली बनाई गई। मंगलवार सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में ब्राह्मण चकमक पत्थर द्वारा अग्नि प्रज्ज्वलित कर होलिका दहन किया गया।

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में फाल्गुन पूर्णिमा पर सोमवार को राजाधिराज भगवान महाकाल की राजसी होली देखने के लिए हजारों भक्त उमड़े। रंग पर्व पर पुजारी, पुरोहित परिवार की ओर से पुजारी प्रदीप गुरु व पं.प्रशांत पुजारी ने फाग उत्सव का आयोजन था। इंदौर के प्रसिद्ध भजन गायक हरिकिशन साबू भोपूजी महाराज के सुरमयी भजनों पर भक्त झूम उठे, आनंद का उल्लास फूल होली के रूप में नजर आया। पुजारी, पुरोहित व भक्तों ने 50 क्विंटल वासंती पुष्पों से होली खेली। प्रदोषकाल में पुजारी परिवार की महिलाओं ने होलिका का पूजन किया। संध्या आरती के बाद पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होलिका दहन किया।

मां शिप्रा का पूजन कर किया औषधियों से हवन

होलिका महोत्सव अंतर्गत मां शिप्रा का प्राकृतिक रंगों से पूजन कर कोरोना वायरस की समाप्ति एवं महामारी से रक्षा हेतु औषधियों से हवन किया गया। इस अवसर पर सौभाग्य सामग्री अर्पित की गई। पं. वेदप्रकाश त्रिवेदी मराठा गौर के अनुसार श्री रामघाट तीर्थपुरोहित सभा अवंतिकापुरी व अभा ब्राह्मण समाज की तीर्थ इकाई द्वारा दुग्धाभिषेक कर वेदमंत्रों के द्वारा प्राकृतिक रंगों से पूजन किया गया।