काँग्रेस के अंदरखाने में जमकर बजने लगे बर्तन

 

0 काँग्रेस में लगने लगी स्तीफों की . . . 02

स्थानीय काँग्रेस संगठन नेत्तृत्व को किया जा रहा कटघरे में खड़ा!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। जिला काँग्रेस कमेटी में सब कुछ सामान्य नज़र नहीं आ रहा है। प्रदेश में जिस तरह की अनिश्चितता की स्थिति बनती दिख रही है, उसके बाद जिला काँग्रेस के अनेक जमीनी कार्यकर्त्ताओं के द्वारा न केवल प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दिया जा रहा है, वरन उनके त्याग पत्र सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहे हैं।

सरपंच संघ के अध्यक्ष ब्रजेश सिंह राजपूत के बाद जनपद पंचायत कान्हीवाड़ा की सदस्य विनीता राजेश सोलंकी एवं यूथ काँग्रेस के उमंग बब्बी शर्मा के द्वारा त्याग पत्र दिये गये। बुधवार को तीन चार अन्य जमीनी कार्यकर्त्ताओं के त्याग पत्र सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए। इधर, जिला सहकारी बैंक के प्रशासक पद पर राजा बघेल के मनोनयन के बाद अब सत्ता की धुरी राजा बघेल के आसपास ही नज़र आती दिख रही है।

सोशल मीडिया पर जनपद पंचायत सिवनी की सदस्य श्रीमति सरोज बाई उईके का त्याग पत्र भी वायरल हो रहा है। इस त्याग पत्र को उनके द्वारा जिला काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष को भेजा गया है। इसमें उन्होंने जिला काँग्रेस कमेटी के नेताओं से त्रस्त और परेशान होकर त्याग पत्र देने की बात कही है।

मूलतः बखारी के गुढ़ी ग्राम निवासी श्रीमति सरोज उईके ने कहा है कि वे आदिवासी समाज की सदस्य हैं। उन्होंने कहा है कि वे तथा उनका परिवार कई वर्षों से भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी के लिये जमीनी कार्यकर्त्ता के रूप में काम करता आया है। उन्होंने अपने त्याग पत्र में कहा है कि प्रदेश में काँग्रेस की सरकार बनने के बाद कोई काम नहीं किया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए त्याग पत्र में उनके द्वारा संगीन आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब भी काँग्रेस कार्यालय जाकर कोई काम बताया जाता है तो यह कह दिया जाता है कि छोटे नेताओं से मिलकर अपनी समस्या से उन्हें आवगत करा दिया जाये। इसके साथ ही आपकी सरकार आपके द्वार जैसी महात्वाकांक्षी योजना की जानकारी भी उन्हें जनपद सदस्य होने के बाद नहीं दी जाती है। उन्होंने कहा है कि वे स्थानीय नेताओं के व्यवहार से दुःखी होकर अपना त्याग पत्र दे रहीं हैं।

इसी तरह सोशल मीडिया पर सिवनी जनपद पंचायत की एक अनय सदस्य श्रीमति बैजन्ती सरयाम के द्वारा भी अपना त्याग पत्र दिये जाने की बात वायरल हो रही है। इनके द्वारा भी जिला स्तर के काँग्रेस संगठन पर अनेक संगीन आरोप लगाते हुए अपना त्याग पत्र देने की बात कही गया है। उन्होंने यह भी कहा है कि काँग्रेस के स्थानीय नेताओं की कार्यप्रणाली से आदिवासी समाज अपने आप को अपमानित महसूस कर रहा है।

सोशल मीडिया पर सिंधिया फेंस क्लब के प्रदेश सचिव शेखर जैसवाल का त्याग पत्र भी वायरल हो रहा है। उन्होंने काँग्रेस की नगर ईकाई के संगठन मंत्री के पद एवं प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र देने की बात कही है।

काँग्रेस के अंदरखाने से छन-छन कर बाहर आ रहीं खबरों पर अगर यकीन किया जाये तो काँग्रेस संगठन में महज़ आधा दर्जन नेताओं का ही वर्चस्व नज़र आता रहा है। काँग्रेस के अन्य पदाधिकारी महज़ शोभा की सुपारी ही बने दिखायी देते रहे हैं। अचानक ही काँग्रेस के अंदर असंतोष का लावा खदबदाता दिख रहा है। आने वाले समय में और भी त्याग पत्र अगर सामने आयें तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये।