राशन के साथ अब प्राथमिकी की भी होम डिलेवरी!

लॉक डाऊन का उल्लंघन करने वालों के घरों पर पुलिस भेज रही है एफआईआर

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले में लाक डाउन का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कुल 27 प्रकरण आज दर्ज किए गए है।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय के विश्वस्त सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि बीते दिवस 06 अप्रैल की देर शाम से 07 अप्रैल की शाम तक लॉक डाउन का उल्लंघन करने पर जिले के विभिन्न थानों के अंतर्गत कुल 27 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। जिनमें 21 प्रकरण थाना कोतवाली में, 4 प्रकरण थाना लखनादौन में, 01 प्रकरण थाना बंडोल में एवं 01 प्रकरण थाना घंसौर में पंजीबद्ध किया गया है।

कोरोना लॉकडाउन के मद्देनजर इंदौर जैसे शहर में मध्य प्रदेश की पुलिस मेडिसीन और जरूरी सामाग्रियां दरवाजे तक पहुंचा रही है। अब पुलिस ने एफआईआर की कॉपी भी होम डिलीवरी करने का फैसला लिया है। दरअसल, जो लोग सरकारी निर्देशों का धज्जियां उड़ाते हुए लॉक डाउन का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके घर पुलिस एफआईआर की होम डिलीवरी कर रही है और इसकी शुरुआत मध्यप्रदेश के सिवनी से हो गई है।

सिवनी जिला महाराष्ट्र के नागपुर से सटा हुआ है, सोमवार से वहां एफआईआर की होम डिलीवरी शुरू हुई है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सोमवार को एफआईआर की होम डिलीवरी को लेकर घोषणा की, साथ ही लोगों से अपील की है कि इस खतरनाक वायरस को रोकने के लिए अपने घरों में ही रहें।

आधा दर्जन के घरों में हुई होम डिलीवरी : सूत्रों ने कहा कि हमलोगों ने छह लोगों पर गाड़ी के नंबर प्लेट के जरिए ट्रेस कर एफआईआर दर्ज की है। ये सभी लोग बिना किसी कारण के अपने घरों से बाहर निकले थे। कैमरा फुटेज से इनकी गाड़ी का नंबर मिला और उससे घर का एड्रेस निकाल कर एफआईआर की कॉपी घर पर भेज दी गई। सूत्रों के अनुसार, बुजुर्ग, रोगियों और जो लोग अपरिहार्य परिस्थितियों में बाहर जा रहे हैं, उन्हें छूट दी जा रही है।

वहीं, लॉक डाउन का उल्लंघन करने वाले सभी 06 लोगों पर आईपीसी की धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसे लोक सेवक द्वारा दिए गए आदेश की अवहेलना है। इस धारा के नियमों का उल्लंघन करते हुए जो भी मिलेगा, उसे एक महीने की जेल और या दो सौ रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है या फिर दोनों। इसके अलावे अगर नियम तोड़ने वाला मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा के लिए खतरा बनता है तो छह माह की भी सजा हो सकती है और जुर्माने की राशि भी एक हजार रुपये तक हो सकती है।