रविवार 18 अक्टूबर का राष्ट्रीय ऑडियो बुलेटिन

नमस्कार, आप सुन रहे हैं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज की समाचार श्रंखला में रविवार 18 अक्टूबर का राष्ट्रीय ऑडियो बुलेटिन. अब आप शरद खरे से समाचार सुनिये.
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अक्टूबर के शुरुआती दिनों से ही देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली, और एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ना आरंभ हो गया है। प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी जैसे ही मौसम में थोड़ी नमी और ठंडक हुई, वैसे ही प्रदूषण की परत, वायुमंडल पर जमा होने लगी। राजधानी दिल्ली के कुछ इलाकों में इसका लेवल खतरे के निशान से ऊपर निकल गया।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रदूषण के खिलाफ चल रही जंग में आम जनता को सीधे जोड़ने की पहल करते हुए रविवार को जनसंवाद किया। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि वे…. समीर ऐप को मोबाइल पर डाउनलोड करें ताकि लोगों को प्रदूषण का लेवल पता चलता रहे। उन्होंने कहा है कि कुछ दूरी के लिए वाहन का प्रयोग न करें।
प्रकाश जावडेकर ने फेसबुक लाइव के दौरान जनता से सुझाव लिए तो तमाम सवालों के जवाब भी दिए। केंद्रीय मंत्री ने मोदी सरकार की ओर से प्रदूषण के खात्मे के लिए उठाए गए सभी कदमों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में अगले दो वर्षों में, प्रदूषणकारी 60 से 70 बिजली संयंत्रों को चिह्नित कर बंद किया जाएगा। दिल्ली – एनसीआर में बदरपुर और सोनीपत के बिजली संयंत्र बंद हो चुके हैं।
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यूनेस्को ने कहा है कि कोविड – 19 महामारी ने, शिक्षा के क्षेत्र में संकट उत्पन्न कर दिया है और लैंगिक भेदभाव पर आधारित गहरी, एवं विविधि असमानताओं ने, उसमें अहम भूमिका निभायी है। यूनेस्को ने वैश्विक शिक्षा निगरानी नामक एक रिपोर्ट में कहा है कि कोविड – 19 महामारी के चलते परिवारों के घरों पर ही रहने के दौरान लैगिंक हिंसा, किशोरावस्था में गर्भधारण एवं समय से पूर्व शादी में संभावित वृद्धि, विद्यालयों और महाविद्यालयों से बालिकाओं के एक बहुत बड़े वर्ग के निकल जाने की संभावना, ऑनलाइन शिक्षण के चलते लड़कियों को नुकसान होने तथा उन पर, घरेलू कामकाज की जिम्मेदारियां बढ़ जाना जैसे कई प्रभाव सामने आये हैं।
उसने कहा, कि कोविड – 19 की संक्रामकता एवं प्राणघातकता पर अनिश्चिततता के कारण दुनियाभर में सरकारों को लॉकडाउन लगाना पड़ा, आर्थिक गतिविधियां बिल्कुल सीमित करनी पड़ी तथा विद्यालय एवं महाविद्यालय बंद करने पड़े। अप्रैल, में 194 देशों में 91 प्रतिशत विद्यार्थी प्रभावित हुए। कोविड – 19 महामारी ने शिक्षा का संकट उत्पन्न कर दिया जिसमें विविध तरह की असमानताओं ने भूमिका निभायी। उनमें से कुछ असमानताएं महिला – पुरूष, भेदभाव पर आधारित हैं। उसने कहा कि वैसे तो इन प्रभावों के हद का सटीक आंकलन मुश्किल है लेकिन उसकी कड़ी निगरानी आवश्यक है।
यूनेस्को ने कहा कि, इन प्रभावों में पहली चिंता यह है कि लॉकडाउन के दौरान परिवारों के घरों में लंबे समय तक ठहरने से लैंगिक हिंसा बढ़ी। चाहे ऐसी हिंसा मां को प्रभावित करे या लड़कियों को, लड़कियों की शिक्षा जारी रखने की समर्थता पर उसके परिणाम स्पष्ट है। दूसरा, यौन एवं लिंग आधारित हिंसा तथा प्रजनन स्वास्थ्य, पुलिस, न्याय एवं सामाजिक सहयोग सेवाओं तक पहुंच नहीं हो पाने से, शीघ्र गर्भधारण बढ़ सकती है। यूनेस्को की रिपोर्ट में चिंता व्यक्त की गयी है कि समयपूर्व शादियों से शीघ्र गर्भधारण में वृद्धि हो सकती है और यह समय पूर्व शादी की वजह, महामारी के चलते परिवारों के गरीबी के दलदल में फंस जाने का परिणाम है।
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सरकार द्वारा कोविड-19 पर नियुक्त एक समिति के अनुसार स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के लिए कोई संभावित खतरा नहीं होने तक, कोविड – 19 को फैलने से रोकने के वास्ते, जिला या राज्य स्तर पर कोई नया लॉकडाउन नहीं लगाया जाना चाहिए। आई.आई.टी. हैदराबाद के प्रोफेसर, एम.विद्यासागर की अध्यक्षता वाली समिति ने यह भी दावा किया यदि सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है तो अगले वर्ष की शुरूआत तक इस महामारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
दस सदस्यीय समिति ने भारत में कोविड-19 महामारी की प्रगति, रोग निदान और लॉकडाउन प्रभावों पर एक अध्ययन किया। समिति ने कोविड-19 के बढ़ने के लिए एक साक्ष्य आधारित, गणितीय मॉडल विकसित किया है। राष्ट्रीय स्तर का सुपर मॉडल विभिन्न, मापंदडों पर आधारित है जिनमें लॉकडाउन का समय, वैकल्पिक लॉकडाउन परिदृश्य, प्रवासी श्रमिकों के अपने घरों में लौटने का प्रभाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करने के प्रभाव आदि शाामिल हैं।
समिति ने कहा, कि यदि हम सभी इन प्रोटोकॉल का पालन करते हैं, तो महामारी को अगले वर्ष की शुरुआत में, फरवरी के अंत तक, संक्रमण के मामलों को कम से कम रखकर, नियंत्रित किया जा सकता है। हम अभी तक इस महामारी के बारे में यह नहीं जानते कि यह किस, विशेष मौसम में कैसा बर्ताव करेगा (सामान्य तौर पर वायरस ठंडे वातावरण में अधिक सक्रिय होते हैं)।
विद्यासागर ने कहा कि इसलिए, मौजूदा व्यक्तिगत सुरक्षा प्रोटोकॉल को जारी रखने की आवश्यकता है, नहीं तो हमें संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि देखने को मिल सकती है। स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के लिए कोई संभावित खतरा नहीं होने तक कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए जिला या राज्य स्तर पर कोई नया लॉकडाउन नहीं लगाया जाना चाहिए।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन ने रविवार को कहा कि कोरोना वायरस का सामुदायिक तौर पर संक्रमण, चुनिंदा राज्यों के कुछ जिलों में सीमित है और ऐसा पूरे देश में नहीं हो रहा है। डॉ.हर्षवर्धन ने अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स से बातचीत में यह बात कही। वे एक प्रतिभागी के सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस बयान का जिक्र किया, कि उनके राज्य में सामुदायिक संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। डॉ.हर्षवर्धन ने कहा, कि पश्चिम बंगाल समेत अनेक राज्यों के विभिन्न हिस्सों में और खासतौर पर, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कोविड-19 का, सामुदायिक संक्रमण हो सकता है। उन्होंने कहा, हालांकि देशभर में ऐसा नहीं हो रहा है।
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पूर्व वित्त मंत्री, दिवंगत अरुण जेटली के बेटे, रोहन जेटली को निर्विरोध रूप से दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) का अध्यक्ष चुना गया है। रोहन जेटली इस पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार थे। अन्य उम्मीदवार सुनील कुमार गोयल ने अपना नामांकन दाखिल करने के बाद वापस ले लिया था। रोहन जेटली के डीडीसीए चीफ बनने की आधिकारिक घोषणा नौ नवंबर को की जाएगी। इससे पहले अरुण जेटली इस पद पर 14 वर्षों तक रहे थे।
रोहन जेटली को डीडीसीए का अध्यक्ष बनाए जाने पर सोशल मीडिया यूजर्स जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह के साथ अरूण जेटली के बेटे की तस्वीर शेयर कर तंज कसा है कि बीजेपी में भाई – भतीजावाद नहीं है। जय शाह, बी.सी.सी.आई. के सचिव हैं।
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महात्मा गांधी के पौत्र, गोपालकृष्ण गांधी ने कहा है कि अगर भारत ने अलग आर्थिक नीति अपनाई होती तो भारत कोरोना वायरस महामारी से बेहतर तरीके से निपट सकता था। उनका कहना है कि वर्तमान आर्थिक नीति के कारण बड़े पैमाने पर शहरीकरण हो रहा है और किसान, शहरों का रूख करने के लिए बाध्य हैं। वे गुजरात विद्यापीठ के, 101वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह को, वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने देश की आर्थिक नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया क्योंकि इससे, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण को बढ़ावा मिला है जिससे बड़ी आबादी इधर से उधर हुई है और बड़ी संख्या में किसान, शहरों की तरफ जाने के लिए बाध्य हुए हैं। उन्होंने कहा, कि उदारीकण, निजीकरण या वैश्वीकरण की आर्थिक नीति से, बड़ी संख्या में आबादी इधर से उधर हुई है न कि उसका पुनर्वास हुआ है। जिस तरीके से शहरों की आबादी बढ़ रही है उसने आज महामारी (कोविड-19) का तेजी से प्रसार किया है।
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समाचारों के बीच में हम आपको यह जानकारी भी दे दें कि मौसम के अपडेट जानने के लिए समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के चेनल पर प्रतिदिन अपलोड होने वाले वीडियो अवश्य देखें। मौसम से संबंधित अपडेट मूलतः किसानों, निर्माण कार्य, यात्रा या समारोह आदि के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा अब तक मौसम के जो पूर्वानुमान जारी किए गए हैं, वे 95 से 99 फीसदी तक सही साबित हुए हैं।
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त्योहारी सीजन है, लेकिन बाजारों में रौनक गायब है। दिल्ली के चांदनी चौक, करोलबाग, खान मार्केट, तो कोलकाता का न्यू मार्केट, धर्मतल्ला सब कुछ सूना है। बाजार में न ग्राहक हैं, ना कोई त्योहारी तामझाम। अगर कुछ है, तो बिक्री की आस में बैठे कारोबारी, और इन कारोबारियों को है दीपावली का बेसब्री से इंतजार क्योंकि, कोविड-19 के चलते मंदी की मार झेल रहे देश भर के बाजार को, अब इस दीपावली से काफी उम्मीदें हैं।
कोरोना महामारी से कारोबार में आई सुस्ती को, फेस्टिव सीजन में रफ्तार मिलने की आस से व्यापारी, स्टॉक जुटाने में लगे हैं ताकि, जब ग्राहक आएं तो निराश होकर दुकान से वापस न चले जाएं। कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि इस वर्ष दीपावली में लगभग एक लाख करोड़ रुपए तक का कारोबार हो सकता है। पिछले वर्ष 60 हजार करोड़ के लगभग यह आंकड़ा था। प्रवीण खंडेलवाल की मानें तो पिछले सात माह से लोगों ने सिर्फ आवश्यकता का ही सामान खरीदा है। ऐसे में ग्राहकों के पास सेविंग्स हुई है। और तो और, वे मानसिक तौर पर भी खरीददारी के लिए तैयार हुए हैं।
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देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 75 लाख 13 हजार 80 पहुंच गई है। इसमें से वर्तमान में सक्रिय मामलों की संख्या 07 लाख 82 हजार 965 है जबकि 66 लाख 14 हजार 737 मरीज, अब तक इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं। इस बीमारी से हुईं मृत्यु का आंकड़ा 01 लाख 14 हजार 176 हो गया है। कोरोना संक्रमितों के सक्रिय मामलों की संख्या जिन राज्यों में 20 हजार से अधिक हो गयी है उनमें महाराष्ट्र में सर्वाधिक 01 लाख 85 हजार 270 और कर्नाटक में 01 लाख 10 हजार 647 सक्रिय मरीज हैं।
कर्नाटक के बाद इस सूची में केरल दिख रहा है जहां वर्तमान में 96 हजार 04 सक्रिय मरीज हैं। इसके बाद तमिलनाडु में 40 हजार 192, आंध्र प्रदेश में 37 हजार 102, पश्चिम बंगाल में 33 हजार 121, उत्तर प्रदेश में 32 हजार 899, असम में 28 हजार 442, छत्तीसगढ़ में 27 हजार 180, दिल्ली में 23 हजार 292 उड़ीसा में 22 हजार 949, तेलंगाना में 22 हजार 50 और राजस्थान में 21 हजार 255 सक्रिय मामले हैं।
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आप सुन रहे थे समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज में शरद खरे से रविवार 18 अक्टूबर का राष्ट्रीय आडियो बुलेटिन। सोमवार 19 अक्टूबर को एक बार फिर हम ऑडियो बुलेटिन लेकर हाजिर होंगे, यदि आपको ये ऑडियो बुलेटिन पसंद आ रहे हों तो आप इन्हें लाईक, शेयर और सब्सक्राईब जरूर करें, सब्सक्राईब कैसे करना है यह प्रत्येक वीडियो के आखिरी में हम आपको बताते ही हैं। अभी आपसे अनुमति लेते हैं, नमस्कार।
(साई फीचर्स)