अतिक्रमण हटाने में क्यों आ रहा पसीना!

शहर का दिल बुधवारी बीमार . . . 02
(लिमटी खरे)
सिवनी (साई)। सिवनी शहर ही प्रदेश का शायद इकलौता शहर होगा जहाँ अस्थायी और कच्चे अतिक्रमण हटाकर ही कर्त्तव्यों की इतिश्री की जा रही हो। रसूखदारों के पक्के अतिक्रमण हटाने में नगर पालिका सहित जिम्मेदार विभागों को पसीना आता दिखता है। अतिक्रमण के चलते शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और इसे हटाने की बात करने की बजाय बस स्टैण्ड को शहर से बाहर ले जाने की माँग जोर पकड़ने लगती है।
सिवनी शहर में एक परंपरा का आगाज दो तीन दशकों से होता आया है जो उचित नहीं मानी जा सकती है और वह यह है कि अगर किसी अधिकारी के द्वारा नियम विरूद्ध गलत काम किये गये हैं, शहर का नुकसान किया गया है तो उस अधिकारी को दण्डित करने की बात करने के स्थान पर अब क्या सुधार हो सकता है इस पर बात की जाती है।
इससे सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि जो गलत काम हुए हैं वे अघोषित तौर पर वैध हो जाते हैं। दरअसल, सड़कों के सामने पहले लोगों के द्वारा वाहन रखने के लिये शेड बनाये जाते हैं। इसके बाद बाऊंड्री वाल बना ली जाती है। दस बीस सालों में इस बाऊंड्री वाल को ऊँचा किया जाकर इस पर छत भी ढाल दी जाती है।
इस तरह सड़क से घर के बीच के पार्किंग वाले हिस्से में लोगों के कमरे तैयार हो जाते हैं। इसके बाद लोग इस कमरे को अपनी जागीर समझने लगते हैं। होना यह चाहिये कि शहर की उन सड़कों जो संकरी हो गयी हैं में नगर पालिका, राजस्व, पुलिस विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से एक दल बनाया जाकर सड़कों एवं लोगों के आवासों, दुकानों की रजिस्ट्री में दर्ज भूमि का माप किया जाना चाहिये।
अगर ऐसा किया जाता है तो निश्चित तौर पर सड़कें चौड़ी नजर आयेंगी। अगर आप बबरिया की ओर से शहर में प्रवेश करते हैं तो चौड़ी सड़क देखकर आपको आभास होने लगता है कि आप किसी बड़े शहर में आ गये हैं। कमोबेश यही आलम कटंगी नाका, नागपुर नाका, छिंदवाड़ा नाका और जबलपुर नाके से आने पर होता है।
इसके बाद जैसे ही आप शहर के अंदर प्रवेश करते हैं तो सड़कें इस तरह सिकुड़ जाती हैं मानो वे कुपोषण की शिकार हो गयी हों। अपर बैनगंगा कॉलोनी के सामने से बाहुबली चौराहे तक की सड़क की चौड़ाई कितनी है इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिये। इसके साथ ही शहर के अंदर की सड़कों की वास्तविक चौड़ाई कितनी है इस बात को भी सार्वजनिक किये जाने की दरकार है।
कटंगी नाके से दीवान महल की ओर आते समय कुछ दूरी तक तो सड़क चौड़ी दिखती है उसके बाद यह संकरी हो जाती है। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण किसके लिये किया जा रहा है, जाहिर है शहर के वाशिंदों के लिये, तब शहर के वाशिंदों से एक बार पूछ लिया जाये तो प्रशासन का काम हल्का हो सकता है।
पूर्व जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा अपना ध्यान अतिक्रमण की ओर केंद्रित किया गया था, किन्तुव उनके द्वारा भी दिसंबर 2019 में ही इस काम को रोक दिया गया था। इसके बाद अतिक्रमण का जिन्नी एक बार फिर बोतल में बंद हो गया है। लोगों की मानें तो अगर जिला कलेक्टर के द्वारा शहर के मुख्य बाजार सहित शहर में प्रवेश के मार्गों का सूक्ष्म अवलोकन कर लिया जाये तो उन्हें समझ में आ जायेगा कि सरकारी मशीनरी किस तरह का काम करती है और यही कारण है कि शहर में यातायात जाम की समस्या आये दिन मुँह बाए खड़ी रहती है।
(क्रमशः जारी)