शोषणमुक्त व कल्याणकारी समाज निर्मिती का आधारस्तंभ

(डॉ. प्रितम भि. गेडाम)

“समाजकार्य एक अभ्यास-आधारित पेशा और एक शैक्षिक अनुशासन है जो सामाजिक परिवर्तन, विकास, सामाजिक सामंजस्य, लोगों के सशक्तिकरण और मुक्ति को बढ़ावा देता है। सामाजिक न्याय के सिद्धांत, मानव अधिकारों, सामूहिक जिम्मेदारी और विविधताओं के प्रति सम्मान यह सामाजिक कार्यों के लिए केंद्रीय रूप में हैं। सामाजिक कार्य, सामाजिक विज्ञान, मानविकी और स्वदेशी ज्ञान के सिद्धांतों से रेखांकित, समाजकार्य लोगों को और जीवन की चुनौतियों को संबोधित करने और भलाई, परोपकार बढ़ाने के लिए संरचनाओं को संलग्न करता है।

समाजकार्य का अर्थ है सकारात्मक, और सक्रिय हस्तक्षेप के माध्यम से लोगों और उनके सामाजिक माहौल के बीच अन्तःक्रिया प्रोत्साहित करके व्यक्तियों की क्षमताओं को उन्नत करना ताकि वे अपनी जिंदगी की जरूरतें पूरी करते हुए अपनी तकलीफों को कम कर सकें। इस प्रक्रिया में समाजकार्य लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति करने और उन्हें अपने ही मूल्यों की कसौटी पर खरे उतरने में मददगार होता है। सरल शब्दो मे कहा जाये तो समाजकार्य व्यवसाय का प्राथमिक मिशन मानव कल्याण को बढ़ाना है और सभी लोगों की बुनियादी व जटिल जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है, कमजोर, पीड़ित, असहाय और गरीबी में रहनेवाले लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाता हैं। समाजकार्य एक अंतःविषय पेशा है, जिसका अर्थ है कि यह कई क्षेत्रों से आता है, जैसे मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, राजनीति, अपराधशास्त्र, अर्थशास्त्र, पारिस्थितिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून, दर्शन, मानविकी विज्ञान, और परामर्श, सहित मनोचिकित्सा। समाज कार्य में फील्ड वर्क शिक्षाशास्त्र के लिए एक विशिष्ट गुण है।

समाजसेवा का उद्देश्य व्यक्तियों, समूहों और समुदायों के अधिकतम हितों की रक्षा करना होता है। अतः सामाजिक कार्यकर्ता सेवार्थी को उनकी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम बनाने के साथ उसके पर्यावरण में अपेक्षित सुधार लाने का प्रयास करता है और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के निमित्त सेवार्थी की क्षमता तथा पर्यावरण की रचनात्मक शक्तियों का प्रयोग करता है। समाजसेवा सेवार्थी तथा उसके पर्यावरण के हितों में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करती है। सामाजिक कार्यकर्ता को सेवार्थी की समस्या निवारण हेतु निम्न प्रक्रिया से गुजरना होता है जैसे सेवार्थी के साथ व्यस्तता, मूल्यांकन, उपाययोजना, परामर्श, कार्यान्वयन साथ ही निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना अति आवश्यक है जैसे सेवा, सामाजिक न्याय, व्यक्ति की गरिमा और मूल्य, मानवीय रिश्तों का महत्व, ईमानदारी, क्षमता, कौशल इत्यादी।

विश्व समाज कार्य दिवस पर इस वर्ष 2021 के लिए “उबुंटु: मै हू क्योंकी हम हैं – सामाजिक एकजुटता और वैश्विक समानता को मजबूत करना” यह थीम रखी गई हैं। उबुंटू शब्द दक्षिण अफ्रीका के स्वदेशी लोगों से उत्पन्न हुआ और नेल्सन मंडेला द्वारा दुनिया भर में लोकप्रिय हुआ। उबुंटु: मैं हूं क्योंकि हम हैं ’एक शब्द, अवधारणा और दर्शन है जो सभी लोगों और उनके वातावरण के परस्पर संबंध के सामाजिक कार्य के दृष्टिकोण से गूंजता है। आत्मनिर्णय को बढ़ावा देने के लिए व्यापक रूप से लोकतांत्रिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता हैं और व्यापक रूप से समाज में आवाज को मजबूत करता हैं। यह वैश्विक एकजुटता की आवश्यकता पर बात करता है। यह सरकारों द्वारा जनता के लिए नए सामाजिक समझौतों, योजनाओं को विकसित करने की एक समावेशी प्रक्रिया के प्रचार की नींव रखता है। नए सामाजिक समझौते का उद्देश्य राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक रूप से सभी लोगों के लिए सार्वभौमिक अधिकारों, अवसरों, स्वतंत्रता और स्थायी कल्याण की सुविधा प्रदान करना है।

देश की पावनभूमी प्राचीन काल से समाज सेवको के महान कार्य के लिए जानी जाती रही है। सती प्रथा को समाप्त करने वाले समाज सुधारक राजा राम मोहन रॉय। जाति प्रथा, छुआ-छात, जैसे समाज के कलंक के खिलाफ लडने और महिला शिक्षा को बढावा देने वाले ज्योतिराव फुले। ब्रिटिश सरकार को विधवा पुनर्विवाह अधिनियम को पारित करने के लिए मजबूर करनेवाले ईश्वर चंद्र विद्यासागर। अहिंसा व मानवाधिकार साथ ही भूदान आंदोलन के प्रणेता विनोबा भावे। एचआईवी एड्स से मरने वाले लोगों, कुष्ठ और ट्यूबरकुलोसिस से प्रभावित लोगों की सेवा करने वाली मदर टेरेसा। महिलाओं और श्रमिकों को उनका अधिकार, वंचितो को समाज मे बराबर का अधिकार दिलानेवाले व संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर। कुष्ठ रोग से पीड़ित गरीब लोगों के पुनर्वास और उत्थान के लिए कार्य करनेवाले बाबा आमटे। पुरे विश्व मे हर समाज, वर्ग में ऐसे अनेक महान समाजसेवी संत, महात्मा, गुरूजन हो गये जिन्होने अपना सम्पूर्ण जीवन ही असहाय लोगों के कल्याण विकास के लिए समर्पित कर दिया। आज के समय मे समाज कार्य को खास तौर पर विशेष शिक्षण, प्रशिक्षण देकर व्यावसायिक रूप दिया गया हैं दुनियाभर में समाज कार्य पर अनेक संगठन, संस्थाये, समूह, असोसिएशन स्थानिक स्तर से लेकर विश्व स्तर स्तर पर लोक कल्याण के लिए कार्य कर रहे है। अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रिय स्तर पर प्रशासन भी समाज के विकास के लिए समाज कार्य संस्थाओ की भागीदारी से कल्याणकारी कार्य करती हैं।

ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति राष्ट्रवाद में पीछे हट गई है, उबंटू यह समुदायों, समाजों और विश्व स्तर पर अर्थात सभी स्तरों पर एकजुटता की आवश्यकता पर एक शक्तिशाली संदेश है। यह एक संदेश है कि सभी लोग आपस में जुड़े हुए हैं और यह है कि हमारा भविष्य एक सतत, निष्पक्ष और सामाजिक रूप से भविष्य के सह-निर्माण में सभी लोगों की भागीदारी को पहचानने पर निर्भर है। हम साथ मिलकर आनेवाली पीढ़ियों के लिए दुनिया बदल सकते हैं।

(साई फीचर्स)