खण्डवा में पुलिस की हैवानियत आई सामने!

नमस्कार, आप सुन रहे हैं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज की समाचार श्रृंखला में रविवार 11 अप्रैल 2021 का प्रादेशिक आडियो बुलेटिन, अब आप रीना सिंह से समाचार सुनिए.
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अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले बीजेपी विधायक और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई ने एक बार फिर गंभीर सवाल उठाए हैं। अजय विश्नोई ने आरोप लगाया है कि प्रशासन जो आंकड़े बता रहा है वो सच नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि जबलपुर के चौहानी श्मशान घाट में शुक्रवार को 14 अंतिम संस्कार हुए जबकि प्रशासन मीडिया को केवल दो मौतों की जानकारी दे रहा है। शनिवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक के दौरान अजय विश्नोई ने ये बात कही।
बीजेपी विधायक अजय विश्नोई शनिवार को आपदा प्रबंधन समिति के साथ हुई सीएम शिवराज सिंह चौहान की वर्चुएल कॉन्फ्रेंसिंग में मौजूद थे। इसी दौरान विश्नोई ने कहा कि प्रशासन अपना एक अलग मीटर लेकर चल रहा है और उसे ही सच मान रहा है। जबकि वो सच नहीं है। विश्नोई ने कहा कि कोरोना की आरटीपीसीआर की जो जांच होती है उसके आंकड़े प्रशासन देता है लेकिन मरीज एवं प्राइवेट अस्पातल आरटीपीसीआर रिपोर्ट का इंतजार नहीं करते हैं। वो रैपिड टेस्ट कराते हैं और उसकी रिपोर्ट के अनुसार ही अपना इलाज शुरु करा लेते हैं। रैपिड टेस्ट में कोरोना पॉजिटिव आने पर ब्लड टेस्ट मरीज और हॉस्पिटल की ओर से कराया जाता है और फिर सीटी स्कैन कराता है। इसके बाद इलाज शुरु हो जाता है। यही कारण है कि प्राइवेट अस्पतालों में मरीज खचाखच भरे हुए हैं और उनकी गिनती सरकारी आंकड़ों से गायब है।
अजय विश्नोई ने प्रशासन की तरफ से जारी किए जा रहे कोरोना मरीजों की मौत के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाए। विश्नोई ने कहा कि प्रशासन मौत के जो आंकड़े बता रहा है वो वास्तव में हुई मौतों से काफी कम है। उन्होंने आगे कहा कि जबलपुर के चौहानी श्मशान घाट पर शुक्रवार को 14 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ जबकि प्रशासन दो मौत होने की बात कह रहा है। विश्नोई ने सलाह देते हुए कहा कि प्रशासन को कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़ों को सही सही लोगों को बताना चाहिए। एक तो इससे विवाद नहीं होगा और दूसरा लोगों में भय फैलेगा और लोग सतर्क व सावधान रहेंगे। विश्नोई ने खुद के विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र मझौली में एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हो चुकी है और उसके बाद से ही इलाके के लोगों ने मास्क पहनना शुरु कर दिया है।
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सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा कोविड-19 की रोकथाम के उद्देश्य से कार्यालयीन कार्य करने वाले आधिकारी/कर्मचारियों की उपस्थिति के संबंध में निर्देश जारी किए गये हैं। मंत्रालय एवं राज्य स्तरीय कार्यालयों में कोरोना कर्फ्यू (लॉकडाउन) की अवधि के दौरान प्रथम एवं द्वितीय श्रैणी के अधिकारियों की उपस्थिति शत-प्रतिशत और तृतीय एवं चतुर्थ श्रैणी के कर्मचारियों की उपस्थिति 25 प्रतिशत रोटेशन के अनुसार होगी। जिला कलेक्टर कोरोना कर्फ्यू क्षेत्र में जिला/संभाग स्तरीय कार्यालयों को पूर्णतः या आंशिक रूप से संचालित करने का निर्णय ले सकेंगे। कर्त्तव्यस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए कोरोना के संक्रमण से बचाव हेतु मास्क का उपयोग, सोशल डिस्टेसिंग का पालन और अन्य समस्त आवश्यक सावधानियाँ रखने के निर्देश जारी किए गये हैं।
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मुरैना में यातायात थाने में पदस्थ एक ट्रैफिक आरक्षक (सिपाही) का शव फांसी के फंदे पर झूलता हुआ मिला है। रविवार की सुबह आरक्षक का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। जानकारी मिलने पर कोतवाली पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची और शव को फांसी के फंदे से उतरवा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
दरअसल, मुरैना में यातायात थाने में आरक्षक हरेंद्र जाट पदस्थ था। आरक्षक हरेंद्र जाट का शव रविवार की सुबह यातायात चौकी के एक कमरे में लटका हुआ मिला। सबसे पहले हनुमान मंदिर के पुजारी ने आरक्षक हरेंद्र जाट को फांसी के फंदे पर लटका हुआ देखा। आरक्षक हरेंद्र जाट रोज की तरह शनिवार की रात को भी यातायात की चौकी पर रुका था। लेकिन रविवार की सुबह हरेंद्र जाट की लाश फांसी के फंदे पर लटकी मिली।
फंदे पर लटके मिले हरेंद्र के साथियों ने बताया कि उसकी अभी शादी नहीं हुई थी। वह दोस्तों से कहता था कि एसआई बनने के बाद ही वह शादी की सोचेगा। हाल ही में दिल्ली पुलिस की लिखित परीक्षा के आए रिजल्ट में वह पास हुआ था। दो दिन पहले यानी 9 अप्रैल को ही उसने थाने में बर्थड मनाया था। उसकी उम्र 27 वर्ष थी।
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सभी जिलों से अस्पताल में लापरवाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं। छिंदवाड़ा जिले एक अस्पताल में तो कर्मियों ने इंतेहा की हदें पार कर दी हैं। कोरोना वार्ड के अंदर ही संक्रमित मरीज का शव पड़ा रहा और कोई उसकी सुध तक नहीं ली। वहीं, एक शव के मुंह से खून निकल रहा था। दोनों केस में परिजनों ने जमकर हंगामा किया है। उसके बाद मौके पर पुलिस को बुलानी पड़ी है।
दरअसल, अस्पताल परिसर में 2 लोगों के परिजनों ने जमकर हंगामा किया है। पहले मरीज के परिजनों को उनके चाचा की डेड बॉडी नहीं मिल रही थी। वहीं, दूसरे मरीज के परिजन ने आरोप लगाया कि उनके पिता की डेड बॉडी के नाक मुंह और शरीर से खून क्यों बह रहा है। पहला मामला यह है कि शिवनगर निवासी कोविड पॉजिटिव पति-पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोनों का शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात निधन हो गया। शनिवार को परिजन अस्पताल में शव लेने पहुंचे तो मर्चुरी में सिर्फ महिला का शव मिला। पुरुष का शव न मिलने पर लोगों ने हंगामा का शुरू कर दिया। उसके बाद जानकारी मिली कि मौत के बाद भी मरीज का शव अस्पताल में बेड पर ही पड़ा हुआ है। मरीज के परिजनों ने हंगामा शुरू किया, उसके बाद उन्हें पैक कर शव को सौंपा गया।
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्यम में प्रदेशव्यापी लॉकडाउन नहीं लगेगा। आर्थिक गतिविधियां चालू रहेंगी, ताकि लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो!
सीएम शिवराज ने कहा मैं यह मानता हूं कि लॉकडाउन समस्या का समाधान नहीं है। मध्यप्रदेश में कहीं भी लॉकडाउन नहीं है। न पूरे प्रदेश में लॉकडाउन लगाया जायेगा, क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप ने जनता से चर्चा करके कुछ स्थानों पर कुछ गतिविधियों पर रोक लगाई है। उन्होंने कहा कि प्रदेशव्यापी लॉकडाउन नहीं लगेगा। आर्थिक गतिविधियां चालू रहेंगी, ताकि लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो!
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प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर रविवार को तड़के रेलवे स्टेशन से सीधे जेएएच निरीक्षण करने के लिए पहुंच गए। सबसे पहले कोल्ड ओपीडी पहुंचे। जहां मौजूद स्टाफ से पूछा डाक्टर कहां हैं? मैं मरीज हूं, मुझे जांच कराना है। स्टाफ कोई जवाब नहीं दे पाया। उनका कहना था कि डाक्टर कुछ देर पहले ही गए हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में व्यवस्थाओं को लेकर ऊर्जा मंत्री ने कलेक्टर को फोन कर नाराजगी जताते हुए स्वस्थ्य सेवाओं को दुरूस्त करने के निर्देश दिए। ऊर्जा मंत्री जेएएच में लगभग एक घंटे तक घूमे। मोती महल स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी निरीक्षण करने पहुंचे। कोविड-19 की व्यवस्थाओं का जायज लिया।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर तड़के जेएएच स्थित कोल्ड ओपीडी का औचक निरीक्षण करने के लिए पहुंचे। वहां मौजूद स्टाफ से संतोषजनक जवाब नहीं देने पर ऊर्जा मंत्री खासे नाराज हुए। ऊर्जा मंत्री तोमर ने मौके से ही कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को फोन करके नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यहां की व्यवस्थाओं से में संतुष्ट नहीं हूं। मैं इस समय जेएएच की कोल्ड ओपीडी पर खड़ा हूं। मान लो कि मैं ही मरीज हूं। यहां न तो कोई डाक्टर है और न ही कोई जांच की व्यवस्था है। कलेक्टर ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी में 24 घंटे इलाज की सुविधा है। ऊर्जा मंत्री का कहना था कि यहां जांच कराने के बाद ही तो मैं इलाज कराने के लिए भर्ती हो पाऊंगा। यहां की व्यवस्थाओं को सुधारें। ऊर्जा मंत्री डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचे। इस बीच उन्होंने लॉकडाउन की व्यवस्था का जायजा लिया।
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समाचारों के बीच में हम आपको यह जानकारी भी दे दें कि मौसम के अपडेट जानने के लिए समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के चेनल पर रोजाना अपलोड होने वाले वीडियो जरूर देखें। मौसम से संबंधित अपडेट मूलतः किसानों, निर्माण कार्य करवाने वालों आदि के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा अब तक मौसम के जो पूर्वानुमान जारी किए गए हैं, वे 95 से 99 फीसदी तक सही साबित हुए हैं।
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खंडवा में पुलिस की हैवानियत सामने आई है। यहां कोरोना संक्रमित के घर पहुंचे चार पुलिसकर्मियों ने पॉजिटिव मरीज और उसके परिजन को जमकर लाठी-डंडों से पीटा। बताया जा रहा है, स्वास्थ्य विभाग की टीम संक्रमित युवक को लेने उसके घर पहुंची थी। यहां विवाद के बाद टीम ने पुलिस बुला ली। मौके पर पहुंची पुलिस ने न सिर्फ संक्रमित, उसके माता-पिता और बहन पर जमकर डंडे बरसाए, बल्कि परिजन के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस भी दर्ज कर लिया। कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों ने छैगांवमाखन थाने का घेराव कर दिया। किसी ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।
मामला थाना छैंगांवमाखन के गांव सिरसोद बंजारी का है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चार दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम उक्त परिवार में युवक का सैंपल लेने आई थी। रिपोर्ट में कोरोना की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम युवक को लेने के लिए घर पहुंची। परिजन ने कहा- बेटा घर पर रहकर ही स्वस्थ हो जाएगा। क्योंकि संक्रमित युवक की मां खुद आशा कार्यकर्ता है। इसी बात पर स्वास्थ्यकर्मियों व परिजन के बीच कहासुनी हो गई।
इस बीच स्वास्थ्यकर्मियों ने पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने संक्रमित युवक व परिजन को घर से निकाला और लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पंधाना व देशगांव पुलिस भी मौके पर पहुंची। इधर, स्थानीय पंधाना विधायक राम दंगोरे का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई गलत है। सभी पुलिसकर्मियों को निलंबित करवाएंगे। पुलिस के अनुसार पहले उनके साथ हाथापाई की गई। इसके बाद उन्होंने डंडे मारे।
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प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथान के लिए कई जिलों में लॉकडाउन लगा दिया गया है। प्रदेश के तीन और जिलों में अब लॉकडाउन की समय सीमा बढ़ा दी गई है। रविवार को देवास, पन्ना व मंडला जिले में लॉकडाउन की समय सीमा में इजाफा किया गया है। बता दें कि इससे पहले शनिवार को भी सीएम शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों की आपदा प्रबंधन समिति से चर्चा के बाद कई जिलों में लॉकडाउन बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
शनिवार को इंदौर, जबलपुर, उज्जैन सहित 12 शहरों में लॉकडाउन बढ़ा दिया गया था। सरकार ने उज्जैन, इंदौर, बड़वानी, राजगढ़, विदिशा (अर्बन-रूरल), राउ नगर, महूनगर और शाजापुर में लॉकडाउन की अवधि बढ़ाकर 19 अप्रैल की सुबह 6 तक कर दी है। वहीं, बालाघाट, नरसिंहपुर, सिवनी और जबलपुर में 12 से 22 अप्रैल तक लॉकडाउन लगाने का फैसला किया है।
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आप सुन रहे थे रीना सिंह से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज में रविवार 11 अप्रैल 2021 का प्रादेशिक आडियो बुलेटिन। सोमवार 12 अप्रैल 2021 को एक बार फिर हम आडियो बुलेटिन लेकर हाजिर होंगे, अगर आपको यह आडियो बुलेटिन पसंद आ रहे हों तो आप इन्हें लाईक, शेयर और सब्सक्राईब जरूर करें, सब्सक्राईब कैसे करना है यह हर वीडियो के आखिरी में हम आपको बताते ही हैं। फिलहाल इजाजत लेते हैं, नमस्कार।
(साई फीचर्स)

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