आखिर क्यों हुए पुनीत कपूर व्यथित!

(लिमटी खरे)
2020 के मार्च माह में देश में कोरोना का कहर बरपा था। कुछ माहों तक स्थिति नियंत्रण में नहीं रहने के बाद सब कुछ सामान्य होता दिखा, पर अचानक ही 2021 में फरवरी माह से इसका संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ता दिखा। आज यह बेकाबू वाली स्थिति में पहुंचता दिख रहा है।
सभी को याद होगा कि 10 मई को तुमड़ीपार (घंसौर विकासखण्ड) में पहला मरीज मिला था कोरोना का। उस दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी प्रवीण सिंह अढ़ायच के द्वारा घंसौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उस मरीज का इलाज करवाया, और वह स्वस्थ्य भी हो गया। तब लोगों की आस बंधी थी कि जिले में कोरोना को लेकर चाक चौबंद व्यवस्थाएं हो सकेंगी।
जिला चिकित्सालय में आपरेशन कायाकल्प चलाया गया। सांसदों, विधायकों सहित सभी ने बढ़ चढ़कर इसके लिए मुक्त हस्त से सहयोग किया, जिला चिकित्सालय का भवन तो चकाचक हो गया, पर व्यवस्थाएं जस की तस ही रहीं। उस दौरान जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा जीएनएम ट्रेनिंक सेंटर (नर्सेस प्रशिक्षण केंद्र) मे कोरोना के मरीजों को भर्ती करने के लिए माकूल व्यवस्थाएं की गईं थीं।
इस साल जिस तरह की बात जिला चिकित्सालय में कोरोना वार्ड से निकलकर आ रही है, वह किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं मानी जा सकती है। सोशल मीडिया पर लोग स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं, पर स्वास्थ्य प्रशासन इस मामले में पूरी तरह मौन ही धारित किए हुए नजर आ रहा है।
आपरेशन कायाकल्प में प्रदेश में सिवनी जिला प्रथम आया। सिवनी को 40 लाख का पुरूकार मिला। इस साल 15 लाख का पुरूस्कार फिर मिला। इसके अलावा रोगी कल्याण समिति और रेडक्रास में भारी भरकम राशि जमा है। राज्य शासन के द्वारा दो करोड़ रूपए और सिवनी के विधायक दिनेश राय के द्वारा 01 करोड़ की राशि देने की बात कही गई है। इसका तातपर्य यह है कि पैसों की कोई कमी नहीं है, फिर अस्पताल से रोज ही अप्रिय खबरें क्यों!
आज तक के संवाददाता पुनीत कपूर ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक मार्मिक पोस्ट लिखी है। वे लिखते हैं माननीय सांसद-विधायक महोदय, सत्ताधारी दल के अध्यक्ष, विपक्ष के अध्यक्ष और तमाम दलों के सम्माननीय नेता गण.
विषय : सिवनी को भगवान भरोसे ना छोड़ने और मानवीय कोशिश किए जाने के निवेदन बावत
आज जब मैं ये खुला ख़त लिख रहा हूँ तब तक ज़िला अस्पताल ऑक्सिजन की क़िल्लत है, दोनों प्राईवेट अस्पतालों में ऑक्सिजन लगभग ख़त्म इसलिए मरीज़ को डिस्चार्ज के लिए बोल जा रहा है, मरीज़ को रेफ़र करने के लिए एक भी ऑक्सिजन वाली प्राईवेट ऐम्ब्युलन्स नहीं है, एक दोस्त की माता जी उसके सामने ही तड़पकर चल बसीं क्योंकि जबलपुर जाने के लिए ऑक्सिजन वाली ऐम्ब्युलन्स नहीं है।
शमशान और क़ब्रिस्तान जाकर देखा तो मौतों का आँकड़ा भी डराने वाला है पर बताया कुछ नहीं जा रहा, सीएमएचओ साहब बोलते हैं अस्पताल जानकारी नहीं दे रहा जबकि पूरे ज़िले के स्वास्थ्य महकमे के मुखिया वो खुद हैं, कोई मरीज़ टेस्ट कराने जाए तो किट ख़त्म है, एक दो दिन की जद्दोजहद के बाद टेस्ट हो जाए और पॉज़िटिव आए गए तो अस्पताल में बेड नहीं है और बेड मिल भी गया क़िस्मत से तो ऑक्सिजन मिले किस्मत इतनी अच्छी भी तो नहीं, छिन्दवाड़ा, नागपुर या जबलपुर रेफ़र भी नहीं हो सकते वहाँ तो पहले ही सब फ़ुल है और अगर जुगाड़ करके रेफ़र हो भी गए तो ऑक्सिजन वाली एम्ब्युलन्स नहीं है, तो अब गिनते रहिए आखिरी साँसें और जब ख़त्म हो जाएँगी सांसें तब मिलेगी पूरी सुविधा, शांति वाहन हाज़िर है और अंतिम संस्कार का बंदोबस्त भी है पर जीते जी कुछ नहीं हो सकता।
कोविड 19 की दूसरी लहर में इस शहर को तो सभी ने जैसे भगवान भरोसे ही छोड़ दिया है, अगर कोई कोविड 19 से संक्रमित हो गया तो ऊपर लिखे नाम तो नहीं करेंगे कुछ, ऊपर वाला भगवान ही बचा सकता है वर्ना मौत तो तय है। क्या आपको याद है एक अप्रैल से लेकर आज तक सांसद-विधायक और पक्ष विपक्ष का कोई भी ज़िला अस्पताल गया हो, किसी ने कोविड के किसी मरीज़ से पूछा हो कि इलाज हो रहा है या नहीं? ज़रूरी दवा हैं भी या नहीं? अस्पताल में बेड के नाम पर पलंग के अलावा और कुछ हो रहा है या नहीं? कोविड आईसीयू में फ़ुल टाइम कोई डॉक्टर है या नहीं? मरीज़ को रेफ़र करने के लिए ऑक्सिजन वाली एम्ब्युलन्स है या नहीं?
प्राइवेट लैब, क्लिनिक और अस्पतालों में टेस्ट हो रहे हैं मरीज़ भी भर्ती हैं पर प्रशासन के पास ना तो कोई जानकारी है और ना ही कोई आँकड़ा, सब भगवान भरोसे . . .
आप सभी से हाथ जोड़कर विनती है कम से कम एक बार तो ज़िला अस्पताल के कोविड वॉर्ड्स में जाइए, देखिए क्या हालात हैं, क्या इलाज हो रहा है, कितने मरीज़ ऑक्सिजन के लिए तड़प रहे हैं, रेमडेसिविर से कितने लोगों की जिंदगियाँ बचाई जा सकती हैं, कितने इंजेक्शन की ज़रूरत है, कहां से कैसे आएँगे इंजेक्शन और कैसे रोका जा सकता है मौत का सिलसिला . .
– पुनीत कपूर
नोट : ख़त पढ़ने पर मन में सवाल आ ही जाएगा कि क्या लिखने वाला गया है कभी, तो जवाब हैं हाँ, कोविड 19 आईसीयू में मरीज़ को खुद बिस्तर पर लिटाया है और कोई स्टाफ़ ना होने पर वहाँ मौजूद एक वार्डबॉय के साथ मरीज़ का बीपी और ऑक्सीजन भी चेक किया है और 48 घंटे में ही वृद्धाश्रम दादाजी को गुजरते हुए भी देखा है, शमशान और क़ब्रिस्तान में चिताएँ जलते हुए देखा है।
तो दोस्तों, यह है पुनीत कपूर की मार्मिक पोस्ट। पुनीत कपूर को हम सालों से जानते हैं। वे दिल्ली में आज तक में रहे हैं, वर्तमान में वे सिवनी में आज तक के लिए काम कर रहे हैं। वे बहुत धीर गंभीर व्यक्तित्व के स्वामी हैं। अमूमन हमने उन्हें कभी भी इस तरह व्यथित नहीं पाया है। यह पहला मौका होगा जब उनकी आखों में न केवल आंसू देखे, वरन व्यवस्थाओं पर उनकी बेबसी को भी महसूस किया है।
सिवनी में सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के नेताओं प्रेम तिवारी, नरेद्र ठाकुर, संतोष नगपुरे, नवनीत ठाकुर आदि के द्वारा जिस तरह की पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की जा रही हैं, वे वाकई हृदय की गहराईयों में हलचल मचाने के लिए पर्याप्त मानी जा सकती हैं।
सिवनी के भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष आलोक दुबे, दोनों नगर अध्यक्ष संजय सोनी, अभिषेक दुबे सहित कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राज कुमार खुराना, नगर अध्यक्ष इमरान पटेल को चाहिए कि वे मीडिया के मित्रों को साथ लेकर एक बार जिला चिकित्सालय के कोरोना वार्ड का निरीक्षण अवश्य करें। जिस तरह की बातें सोशल मीडिया पर चल रही हैं, उन्हें नकारात्मकता की संज्ञा अवश्य दे रहे हों, अधिकारी पर कहीं भी असंसदीय भाषा का प्रयोग शायद ही कोई कर रहा हो। जो भी जिम्मेदार लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं, वे सुझाव या असलियत ही मानी जा सकती है। प्रशासन को चाहिए कि इस तरह के सुझावों पर विचार जरूर करे।
नागरिकों से आग्रह है, अपील है, गुजारिश है कि कोरोना की दूसरी लहर के चलते घरों पर रहें, मास्क के बिना किसी भी कीमत पर घरों से न निकलें, शासन प्रशासन के नियमों का पालन करें। सोशल मीडिया पर असंसदीय भाषा का प्रयोग कतई न करें, संयम बरतें, चिकित्सकों, पेरामेडिकल स्टॉफ, पुलिस, प्रशासन का सहयोग करें।
(साई फीचर्स)