प्रोटोकाल तोड़कर प्रधानमंत्री के काफिले ने रास्ता दिया एंबूलेंस को!

नमस्कार, आप सुन रहे हैं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज की समाचार श्रंखला में सोमवार 12 अप्रैल का राष्ट्रीय ऑडियो बुलेटिन.
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पिछले वर्ष कोरोना ने जब भारत पर पहली बार हमला किया, तब यहाँ दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन लगाया गया। चेतावनी साफ थी कि 130 करोड़ की आबादी में यदि यह वायरस तेजी से फैला, तो बेहद खतरनाक साबित होगा। हालांकि, वह लॉकडाउन गलतियों से भरा माना गया और उसने काफी नुकसान भी पहुँचाया, लेकिन संक्रमण की रोकथाम में यह काम करता दिखायी पड़ रहा था। संक्रमण दर घट रही थी और तुलनात्मक रूप से कम थी।
फिर सरकारें और जनता सावधानी छोड़कर रोजमर्रा की दिनचर्या में व्यस्त हो गयीं। विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी थी कि यदि संक्रमण की दूसरी लहर आती है तो सरकार की बेतरतीब कार्यप्रणाली एक और संकट को जन्म देगी और अब वह संकट सिर पर खड़ा है। हालांकि, मृत्युदर अभी कम है, लेकिन बढ़ रही है। इतने बड़े देश में वैक्सीन लगाना आसान नहीं है, इसके बावजूद यह काम धीमे चल रहा है। अस्पताल में बिस्तर भी कम पड़ते दिख रहे हैं।
वैज्ञानिक अभी वायरस के नये स्ट्रेन को समझने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर यहाँ उस स्ट्रेन की पहचान की कोशिश कर रहे हैं, जिसने ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के लिये खतरा उत्पन्न किया था। समस्या यह है कि प्रशासन ने यह कहते हुए हथियार डाल दिये हैं कि कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग लगभग असंभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लापरवाही और सरकार की गलत नीतियों के कारण भारत जो संक्रमण के विरूद्ध सफल होता दिख रहा था, वह आज दुनिया का सबसे ज्यादा प्रभावित देश बनता जा रहा है। इसका प्रभाव न केवल भारत पर, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा। बावजूद इसके नेता बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियां करते दिख रहे हैं।
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में रैलियों में व्यस्त हैं। ऐसे में बंगाल की सड़कों पर वी.आई.पी. काफिलों के गूंजते वाहनों का सिलसिला बढ़ गया है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐसा ही काफिला एक क्षेत्र से गुजर रहा था। इस दौरान सामने से दो एंबुलेंस आती दिखीं, जिसे प्रोटोकॉल तोड़कर प्रधानमंत्री मोदी के काफिले ने रास्ता दिया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर सराहना की जा रही है।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले के दौरान सड़क को पूरी तरह से खाली करा लिया जाता है। किसी भी तरह के वाहन को आने-जाने की अनुमति नहीं होती है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके काफिले के लिये प्रोटोकॉल निर्धारित हैं।
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देश में कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ौत्तरी के बीच नागर विमानन मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि एयरलाइन कंपनियों को उन घरेलू उड़ानों में भोजन देने की अनुमति नहीं होगी, जिनकी यात्रा अवधि दो घंटे से कम है। मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि यह रोक बृहस्पतिवार से प्रभावी होगी।
पिछले वर्ष कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिये लॉकडाउन लगाये जाने के बाद जब 25 मई से निर्धारित घरेलू उड़ान सेवाएं आरंभ की गयी थीं, तब मंत्रालय ने एयरलाइन कंपनियों को कुछ शर्तों के तहत विमानों में भोजन उपलब्ध कराने की अनुमति दी थी।
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महाराष्ट्र के जलगाँव जिले में पुलिस ने एक गद्दा बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। दरअसल गद्दा बनाने वाली फैक्ट्री में, गद्दे में कपास या दूसरी चीजों के स्थान पर उपयोग हो चुके मास्क भरे जा रहे थे। पुलिस ने फैक्ट्री के मालिक के विरूद्ध मामला दर्ज कर जांच आरंभ कर दी है। पुलिस ने फैक्ट्री परिसर में मास्क के ढेर भी बरामद किये हैं।
राजधानी मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर दूर जलगाँव में महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम के पुलिस स्टेशन के अधिकारियों को कथित तौर पर रैकेट की जानकारी मिली जिसके बाद पुलिस ने छापा मारा। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत गवली ने कहा, जब अधिकारियों ने कुसुम्बा गाँव में कारखाने का दौरा किया, तो उन्हें एक गद्दा मिला, जिसमें उपयोग किये जा चुके मास्क भरे हुए थे। पुलिस ने बताया, फैक्ट्री मालिक, अमजद अहमद मंसूरी के विरूद्ध मामला दर्ज किया गया है।
भारत में मास्क का उत्पादन मार्च 2020 से अब तक प्रत्येक दिन 1.5 करोड़ यूनिट की क्षमता से बढ़ा है। महामारी ने भारत के वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर बोझ बढ़ा दिया है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, जून और सितंबर 2020 के बीच 18 हजार टन से अधिक कोविड -19 संबंधित बायो मेडिकल वेस्ट उत्पन्न हुआ, जिसमें दस्ताने और फेस मास्क शामिल हैं।
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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में राह भटकर आतंकवाद के रास्ते पर गये युवाओं से मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा है कि गोली की भाषा कोई नहीं समझेगा और वे मारे जायेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा के रास्ते कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार से अनुच्छेद 370 को दोबारा बहाल करने की भी मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में कहा, कोई भी हथियार की भाषा नहीं समझेगा, यदि आप अपना नजरिया शांतिपूर्वक रखते हैं तो दुनिया आपको सुनेगी। यदि आप बंदूक की भाषा बोलेंगे तो आप मारे जाओगे, आपको कुछ हासिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मैं जम्मू-कश्मीर के युवाओं से अपील करती हूं कि हथियार छोड़ दें और बातचीत करें। उन्हें (सरकार को) एक दिन सुनना पड़ेगा।
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गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य में कोरोना से बिगड़ रहे हालात पर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगायी। एक जनहित याचिका पर सुनवायी करते हुए कोर्ट ने सोमवार को कहा कि प्रदेश और लोग जिस तरह की परेशानी झेल रहे हैं, वह सरकार के दावे से बहुत अलग है। चीफ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस भार्गव करिया की बेंच ने कहा कि लोगों को लगने लगा है कि वे अब भगवान भरोसे हैं।
एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने कोर्ट को सरकार की ओर से उठाये गये कदमों के बारे में बताया। उन्होंने अस्पताल में बिस्तरों की संख्या और एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिविर की उपलब्धता बढ़ाने की जानकारी दी। हालांकि, बेंच ने ज्यादातर दलीलों को मानने से इन्कार कर दिया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवायी में कोर्ट ने कहा कि आप जो दावा कर रहे हैं, स्थिति उससे काफी अलग है। आप कह रहे हैं कि सब कुछ ठीक है लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। इस समय लोगों में भरोसे की कमी है। लोग सरकार को कोस रहे हैं और सरकार लोगों को। इससे कुछ नहीं होगा। हमें संक्रमण की चेन तोड़ने की आवश्यकता है।
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समाचारों के बीच में हम आपको यह जानकारी भी दे दें कि मौसम के अपडेट जानने के लिये समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के चैनल पर प्रतिदिन अपलोड होने वाले वीडियो अवश्य देखें। मौसम से संबंधित अपडेट मूलतः किसानों, निर्माण कार्य, यात्रा या समारोह आदि के लिये फायदेमंद साबित हो सकते हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा अब तक मौसम के जो पूर्वानुमान जारी किये गये हैं, वे 95 से 99 प्रतिशत तक सही साबित हुए हैं।
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रांची में कोरोना के दौर में होने वाली मौतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। पिछले 10 दिनों में रांची के श्मशान और कब्रिस्तान में शवों के आने की संख्या में बेतहाशा बढ़ौत्तरी हुई है। रविवार को रिकॉर्ड 60 शवों का अंतिम संस्कार हुआ। इनमें 12 शव कोरोना संक्रमितों के थे, जिनका दाह संस्कार घाघरा में सामूहिक चिता सजाकर किया गया। इसके अलावा 35 शव पांच श्मशान घाटों पर जलाये गये और 13 शवों को रातू रोड और कांटाटोली कब्रिस्तान में दफन किया गया। सबसे अधिक शवों का दाह संस्कार हरमू मुक्ति धाम में हुआ।
मृतकों की संख्या इतनी अधिक हो गयी कि मुक्तिधाम में चिता जलाने का स्थान कम पड़ गया। लोगों ने घंटों इंतजार किया, फिर भी स्थान नहीं मिला तो लोग खुले में ही चिता सजाकर शव जलाने लगे। श्मशान में स्थान नहीं रहने के कारण मुक्तिधाम के सामने की सड़क पर वाहनों की पार्किंग में ही शव रखकर अंतिम क्रिया की जाने लगी। हालात ऐसे हो गये कि देर शाम तक मुक्तिधाम में कई लोग शव लेकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
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आप सुन रहे थे समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज की समाचार श्रंखला में शरद खरे से सोमवार 12 अप्रैल का राष्ट्रीय ऑडियो बुलेटिन। मंगलवार 13 अप्रैल को एक बार फिर हम ऑडियो बुलेटिन लेकर उपस्थित होंगे, आपको ये ऑडियो बुलेटिन यदि पसंद आ रहे हों तो आप इन्हें लाईक, शेयर और सब्सक्राईब अवश्य करें, सब्सक्राईब कैसे करना है यह प्रत्येक वीडियो के अंत में हम आपको बताते ही हैं। अभी आपसे अनुमति लेते हैं, नमस्कार।
(साई फीचर्स)