संस्कारधानी में हो सकता है आचार्यश्री का चार्तुमास . . .

नमस्कार, आप सुन रहे हैं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज की समाचार श्रृंखला में शुक्रवार 23 जुलाई 2021 का प्रादेशिक आडियो बुलेटिन, अब आप रीना सिंह से समाचार सुनिए.
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उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी के मंदिर और मूर्तियां मिलने के बाद खुदाई के दौरान नर कंकाल और हड्डियां मिली हैं। इससे यहां काम कर रहे मजदूर सहमे हुए हैं। महाकाल मंदिर परिसर के विस्तारीकरण के लिए फिलहाल खुदाई कार्य चल रहा है। खुदाई का काम भोपाल पुरातत्व विभाग की देखरेख में हो रहा है। एक्सपर्ट का मानना है कि जमीन के नीचे मिले नरकंकाल मुगलकाल के भी हो सकते हैं।
महाकाल मंदिर के मुख्य पुजारी का कहना है कि मंदिर परिसर के सामने के हिस्से में पुराने समय में साधु-संत रहा करते थे। ये हड्डियां उनकी भी हो सकती हैं।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत महाकाल मंदिर परिसर का विस्तारीकरण किया जा रहा है। खुदाई की शुरुआत मई महीने में हुई थी। पहले छोटी-छोटी मूर्तियां और कुछ दीवारें मिलीं। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर भोपाल पुरातत्व विभाग की टीम की देखरेख में खुदाई करवाई गई। इससे पहले खुदाई के दौरान परमार काल की अलग-अलग मूर्तियां और करीब 1000 वर्ष पुराना मंदिर का ढांचा मिला था। जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले रहस्य सामने आ रहे हैं।
खुदाई कर रहे रिसर्चर डॉक्टर गोविंद सिंह ने कहा कि खुदाई में मानव हड्डी और जानवरों की हड्डी या नरकंकाल निकलना सामान्य है। फिर भी इसका अलग से परीक्षण किया जाना चाहिए। खुदाई में मिले करीब 1000 साल पुराने मंदिर केे ढांचे से मुगल बादशाहों से संबंधित जानकारियां मिलने की संभावना है। इन धरोहरों से मंदिरों पर हमले के दौरान लूटपाट के प्रमाण मिल रहे हैं। उस समय मुगल बादशाहों न नरसंहार भी किए थे। ये नरकंकाल और मानव हड्डियां उन नरसंहारों का प्रमाण हो सकती है
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प्रदेश में उच्च शिक्षा एवं स्कूल शिक्षा विभाग के अन्तर्गत आने वाले सभी महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों का कोविड-19 टीकाकरण एक अभियान के रूप में किया जायेगा। इसके लिये मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने सभी कलेक्टर्स और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया है कि 26 से 31 जुलाई में यह अभियान संचालित किया जाए।
टीकाकरण अभियान का आयोजन जिला मुख्यालय एवं विकासखंडों में सुविधा युक्त महाविद्यालयों का चयन कर नियत तिथि में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक किया जायेगा। इस अभियान में आदिम जाति कल्याण विभाग के विद्यालय सहित सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों एवं विद्यालयों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को कोविड-19 टीके के प्रथम तथा द्वितीय डोज़ लगाया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। निर्देशित किया गया है कि सभी शिक्षा संस्थानों से समन्वय स्थापित कर वर्कप्लेस कोविड-19 टीकाकरण सत्र हो। साथ ही इस अभियान के दौरान टीकाकरण केन्द्रों पर कोविड-19 अनुकूल व्यवहार का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिये गये हैं।
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भोपाल के दानिश नगर क्षेत्र में रहने वाले एक उपभोक्ता को बिजली कंपनी दस रुपये का हिसाब नहीं दे पा रही है। उपभोक्ता शशि श्रीवास्तव को बिजली कंपनी ने पांच हजार 391 रुपये का बिल दिया था। उन्हों ने बिल का ऑनलाइन भुगतान कर दिया। लेकिन कंपनी के खाते में पांच हजार 362 रुपये जमा हुए हैं, वहीं उपभोक्ता के खाते से पांच हजार 401 रुपये कट गए हैं। अब उपभोक्ता ने बिल राशि, जमा राशि व खुद के खाते से काटे गई अंतर वाली राशि का हिसाब मांगा है, जो उसे नहीं मिल रहा है।
शशि श्रीवास्तव ने बताया कि वह दानिश कुंज क्षेत्र के 40 बंगला क्षेत्र में रहती है। बिजली कंपनी ने उन्हें जून माह का बिल दिया था, जिसके मुताबिक पांच हजार 391 रुपये जमा करने थे। जब बेटे ने ऑनलाइन माध्यम से राशि जमा की तो कंपनी के पोर्टल पर बिल की राशि पांच हजार 362 रुपये दिखाई दे रही थी जो कि बिल की मूल प्रति में दर्ज राशि से 29 रुपये कम थी। जब उक्त राशि को जमा किया तो खाते से पांच हजार 401 रुपये काटे गए हैं। इस तरह मूल प्रति में दी गई राशि से 10 रुपये और जमा की गई राशि से 39 रुपये अधिक काट लिए हैं।
उपभोक्ता का कहना है कि राशि में बहुत बड़ा अंतर नहीं है, लेकिन गड़बड़ी तो है। जब यह बात अधिकारियों से पूछी गई तो वे भी सही जवाब नहीं दे पा रहे हैं। उपभोक्ता का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था में इस तरह की गड़बड़ी ठीक नहीं है। यदि कोई अतिरिक्त शुल्क काटा गया है तो उसकी लिखित में जानकारी देनी चाहिए। इस तरह उपभोक्ताओं को हिसाब में दिक्कत होती है।
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दो से अधिक बच्चे होने पर शिक्षक की वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने के मामले में राज्य शासन एवं अन्य से जवाब-तलब किया है। न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकल पीठ ने राज्य शासन, जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त और अन्य को तीन सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
सिवनी निवासी अखिलेश नेमा की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, आशीष त्रिवेदी, प्रशांत अवस्थी, अपूर्व त्रिवेदी और अरविंद सिंह चौहान ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति वर्ष 1999 में पंचायत शिक्षाकर्मी के रूप में हुई थी। बाद में उसका पंचायत विभाग के अंतर्गत सहायक शिक्षक के पद पर संलयन कर दिया गया था। वर्ष 2015 में याचिकाकर्ता की एक संतान को उनके भाई ने विधिवत गोद ले लिया था। इसके बाद वर्ष 2018 के जनवरी माह में याचिकाकर्ता की तीसरी संतान हुई। इसी वर्ष 2018 में याचिकाकर्ता का संविलियन शासन के अंतर्गत शिक्षक के कैडर में हो गया।
याचिकाकर्ता के अनुसार पंचायत विभाग के आचरण नियम में दो से अधिक संतान होना कोई कदाचरण नहीं था। वर्ष 2018 में शासन के अंतर्गत शिक्षक के कैडर में संविलियन होने के पूर्व याचिकाकर्ता ने तीसरी संतान को जन्म दे दिया था। राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बगैर आदेश पारित किया है। कोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। इससे पूर्व याचिकाकर्ता की ओर से उसके अधिवक्ताओं ने मनमानी के खिलाफ तर्क रखे। साथ ही दस्तावेजी सबूत भी प्रस्तुत किए।
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समाचारों के बीच में हम आपको यह जानकारी भी दे दें कि मौसम के अपडेट जानने के लिए समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के चेनल पर रोजाना अपलोड होने वाले वीडियो जरूर देखें। मौसम से संबंधित अपडेट मूलतः किसानों, निर्माण कार्य करवाने वालों आदि के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा अब तक मौसम के जो पूर्वानुमान जारी किए गए हैं, वे 95 से 99 फीसदी तक सही साबित हुए हैं।
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एनजीटी ने कलियासोत नदी के किनारों से 33 मीटर दायरे में नो कंस्ट्रक्शन जोन बनाने, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनवाने और ग्रीन बेल्ट विकसित कराने संबंधी कामों की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी राज्य के मुख्य सचिव को सौंपी है। इसके साथ संबंधित शासकीय एजेंसियों को भी दिए गए निर्देशों और गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंट्रल जोन बेंच ने डॉ सुभाष सी पांडे की याचिका पर यह निर्देश जारी करते हुए प्रकरण को निराकृत कर दिया। एनजीटी ने राज्य शासन को निर्देश दिए हैं कि नदी में सीवेज नहीं मिले इसके लिए पर्याप्त संख्या में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट आदि बनवाए जाएं। इसकी टाइमलाइन गुजर चुकी है इसलिए अब इस काम में तेजी लाएं। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देशित किया गया है कि यदि अनुपचारित सीवेज जलस्रोत में मिलता हुआ पाया जाए तो सीपीसीबी द्वारा तय फॉर्मूले के अनुसार पर्यावरण क्षति हर्जाने का आकलन कर उसकी वसूली करें। इसे पर्यावरण संरक्षण पर खर्च किया जाएगा। याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान बताया था कि अभी तक न तो 33 मीटर दायरे के निर्माण चिन्हित हो पाए हैं और न इस दायरे में ग्रीनबेल्ट विकसित हुआ है। यही नहीं अनुपचारित सीवेज सीधे नदी में जा रहा है। क्योंकि एसटीपी नहीं बन पाए हैं। इससे नदी का पानी प्रदूषित हो गया है।
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आचार्यश्री विद्यासागर महाराज अपने संघ के साथ अब संस्कारधानी से महज 16 किमी दूर रह गए हैं। गुरुवार को उन्होंने जबलपुर मार्ग पर स्थित बिछुआ ग्राम के बाहर ससंघ रात्रि विश्राम किया। शुक्रवार को सुबह गुरुवर की पदयात्रा एक बार फिर जबलपुर के लिए आरम्भ होगी। सम्भावना जताई जा रही है कि आचार्यश्री के चरण संस्कारधानी की धरा पर 23 जुलाई की शाम तक पड़ सकते हैं। शहर के जैन समुदाय में आचार्यश्री के आगमन व चातुर्मास को लेकर खासा उत्साह नजर आ रहा है। शहर के बाहर पहुंचकर गुरुवर की अगवानी की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
नगर के जैन समाज ने गुरुवर की अगवानी के लिए जोरदार तैयारियां कर रखी हैं। हालांकि कोरोनाकाल को देखते हुए बैंड बाजों की व्यवस्था नहीं होगी। महाराजश्री की अगवानी के लिए तिलवाराघाट के पार चरगवां मोड़ पर बड़ी संख्या में जैन सम्प्रदाय के लोग पहुंचेंगे। दयोदय तीर्थ से जुड़े सतीश जैन ने बताया कि श्रद्धालुओं से आचार्यश्री की अगवानी में सडक़ के दोनों ओर खड़े रहकर दूर से ही नमोस्तु करने की अपील की गई है।
प्रोटोकॉल के मद्देनजर गुरुवर के चरण स्पर्श की किसी को भी इजाजत नहीं होगी। अगवानी के लिए भी लोगों से सीमित संख्या में पहुंचने का आग्रह किया गया। जैन नवयुवक सभा, जबलपुर की ओर से आग्रह किया गया कि पूज्य आचार्यश्री की आगवानी के समय मास्क का उपयोग अवश्य करें।
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आप सुन रहे थे रीना सिंह से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज में शुक्रवार 23 जुलाई 2021 का प्रादेशिक आडियो बुलेटिन। रविवार 25 जुलाई 2021 को एक बार फिर हम आडियो बुलेटिन लेकर हाजिर होंगे, अगर आपको यह आडियो बुलेटिन पसंद आ रहे हों तो आप इन्हें लाईक, शेयर और सब्सक्राईब जरूर करें, सब्सक्राईब कैसे करना है यह हर वीडियो के आखिरी में हम आपको बताते ही हैं। फिलहाल इजाजत लेते हैं, नमस्कार।
(साई फीचर्स)

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