आधा दर्जन भाजपाई सांसद मिलकर भी महाकौशल के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र को रेल समृद्ध नहीं बना पा रहे!

दूरी कम होने की गुंजाईश को भी रख दिया गया बलाए ताक, अधिकारियों की मनमानी चरम पर, जनप्रतिनिधि दिख रहे अफसरों के सामने बौने!
(लिमटी खरे)


सिवनी (साई)। महाकौशल अंचल एवं आसपास के क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन भाजपाई सांसद मिलकर भी महाकौशल क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र को रेल सुविधाओं के मामले में समृद्ध नहीं बना पा रहे हैं। कोरोना काल में जब अनेक रेल गाड़ियों का परिचालन स्थगित है तब पटरियों का रखरखाव तथा अमान परिवर्तन द्रुत गति से कराया जा सकता था, किन्तु इस मामले में भी क्षेत्र पिछड़ता ही दिख रहा है।
उल्लेखनीय होगा कि जबलपुर से भाजपा के सांसद राकेश सिंह, मण्डला से भाजपा के सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, बालाघाट से भाजपा के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन, गोंदिया भण्डारा से सुनील बाबूराव मेंढे, नागपुर से केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी सहित राजनांदगांव से संतोष पाण्डेय, रायपुर के सुनील सोनी, बिलासपुर से अरूण साव एवं दुर्ग के विजय बघेल मिलकर भी जबलपुर से गोंदिया होकर रायपुर की दूरी को रेल मार्ग से कम नहीं करवा पा रहे हैं।

ढाई दशक लगे अमान परिवर्तन में

दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे मुख्यालय बिलासपुर के महाप्रबंधक कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जबलपुर से नैनपुर, बालाघाट होकर गोंदिया तक के अमान परिवर्तन के काम में लगभग 24 साल का इंतजार करना पड़ा। जबलपुर से बालाघाट होकर गोंदिया रेल पथ तैयार होने के बाद यात्रियों को उम्मीद थी कि इस मार्ग पर बेतहाशा सवारी गाड़ियां चलेंगी किन्तु क्षेत्रीय सांसदों के कथित अनदेखी वाले रवैए से यह संभव नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही रेल के लिए संघर्ष करने वाले संगठनों के आंदोलनों की धार बोथरी होती दिख रही है।

दूरी कम, फिर भी सुस्त है चाल

सूत्रों का कहना है कि जबलपुर से घंसौर, नैनपुर, बालाघाट होते हुए गोंदिया मार्ग के अमान परिवर्तन से जबलपुर से रायपुर की ओर जाने वाली सवारी और माल गाड़ियों को अब जबलपुर से इटारसी, नागपुर, गोंदिया होकर जाने के बजाए सीधे सीधे गोंदिया जाने का रास्ता सुलभ हो रहा है, किन्तु कोरोना का ग्रहण इस पर लग गया है।

रेलों की आवाजाही के मामले में सांसद सुस्त!

सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को यह भी बताया कि उत्तर से दक्षिण का मार्ग हो या जबलपुर से रायपुर, बिलासपुर का, हर तरफ की दूरी जबलपुर से घंसौर, नैनपुर, बालाघाट होकर गोंदिया रेल मार्ग के कारण कम होने के बाद भी यह क्षेत्र सवारी गाड़ियों के मामले में समृद्ध नहीं हो सका है। वर्तमान में रीवा, जबलपुर होकर नागपुर के लिए सप्ताह में तीन दिन ही एक रेलगाड़ी चल रही है। जबलपुर से वल्लारशाह हो या नागपुर अथवा रायपुर, इस नए रेल मार्ग के कारण यह दूरी लगभग डेढ़ सौ से तीन सौ किलोमीटर कम हो जाती है। और तो और संसद में भाजपा के गढ़ समझे जाने वाले इस क्षेत्र में केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार रहने के बाद भी यह क्षेत्र उपेक्षित ही माना जा सकता है।

अधिकारियों के द्वारा बनाए जा रहे तरह तरह के बहाने!

सूत्रों ने आगे बताया कि जबलपुर, नैनपुर, बालाघाट का अमान परिवर्तन का काम तो पूरा हो चुका है। इस मार्ग पर माल गाड़ियों की आमद रफत तो बढ़ चुकी है पर सवारी गाडियों के मामले में यह रेल खण्ड पिछड़ता ही दिख रहा है। वहीं नैनपुर से सिवनी होकर छिंदवाड़ा मार्ग को जोड़ने में बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले का हिस्सा अब तक नहीं जोड़ा जा सका है। इसके प ीछे नैनपुर में तैनात रेल्वे के अधिकारी जब चाहे तब मनमाने बहाने बनाकर जनता के जनादेश प्राप्त सांसदों को भी बरगलाने से नही चूक रहे हैं।