अमान परिवर्तन में विलंब : क्या टेंडर अलग अलग डेट को हुए थे!

जब सारे टेंडर एक साथ तो सिर्फ बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से का काम क्यों रहा है पिछड़! अधिकारियों की कसना होगा मश्कें, बढ़ता दिख रहा जनाक्रोश!
(संजीव प्रताप सिंह)


सिवनी (साई)। 01 दिसंबर 2015 से बंद हुई सिवनी जिले की नेरोगेज रेल 06 बरस बाद भी अब तक आरंभ न हो पाने से लोगों का संयम अब जवाब देता दिख रहा है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं। सिवनी जिले में मण्डला संसदीय क्षेत्र के हिस्से में भोमा तक एवं पड़ोस के छिंदवाड़ा जिले में चौरई तक लाईन डलकर परीक्षण भी हो चुका है पर सिवनी में पटरियों का अता पता भी नहीं है।


दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे मुख्यालय बिलासपुर के महाप्रबंधक कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जबलपुर से नैनपुर होकर बालाघाट, नैनपुर से मण्डला, नैनपुर से सिवनी होकर छिंदवाड़ा के रेलखण्ड को अनेक हिस्सों में बांटकर इसका ठेका दिया गया था।

सूत्रों की मानें तो अलग अलग हिस्सों में ठेका लेने वाले ठेकदारों को समय सीमा में काम पूरा करना चाहिए था। इस पूरे हिस्से में जबलपुर से बालाघाट के बीच के हिस्से का काम बहुत ही तेज गति से इसलिए कराया गया था क्योंकि जून 2015 में इटारसी मे रूट रिले इंटरलाकिंग सिस्टम जलकर खाक हो गया था। इसके बाद उत्तर भारत से दक्षिण भारत की ओर जाने वाली माल एवं सवारी गाड़ियों को कहां से ले जाया जाए यह समस्या रेल्वे के सामने आन खड़ी हुई थी।


सूत्रों ने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटना अगर कभी घटती है तो उसे देखते हुए जबलपुर से नैनपुर बालाघाट, गोंदिया या बालाघाट के बाद कटंगी होते हुए दक्षिण भारत को ले जाने का प्रस्ताव रेल्वे के द्वारा रखा गया था। यही कारण था कि बालाघाट के आसपास रेल्वे का जाल बिछना आरंभ हो गया था।


सूत्रों ने बताया कि उसी दौरान नैनपुर से सिवनी एवं सिवनी से कटंगी (बरघाट होकर नहीं) के लिए रेलमार्ग बनाए जाने की बात भी सामने आई थी, ताकि दूरी कम की जा सके। विडम्बना ही कही जाएगी कि उस दौरान तत्कालीन सांसद बोध सिंह भगत के द्वारा किसी तरह की दिलचस्पी नहीं लिए जाने के कारण नैनपुर से सिवनी होकर कटंगी का मामला ठण्डे बस्ते के हवाले ही कर दिया गया था।


बहरहाल, सूत्रों ने आगे बताया कि मण्डला संसदीय क्षेत्र के मण्डला और सिवनी जिले के हिस्से में अमान परिवर्तन का काम पूरा कर लिया गया है। नैनपुर से केवलारी, पलारी, कान्हीवाड़ा होकर भोमा तक के मण्डला संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में पटरी बिछाई जा चुकी है। जल्द ही यहां बिजली के खम्बे खड़े किए जाकर मार्च के पहले इलेक्ट्रिफिकेशन का काम भी पूरा कर लिया जाएगा।


सूत्रों ने कहा कि जब रेल्वे के डिप्टी एसई मनीष लावणकर के द्वारा नैनपुर और छिंदवाड़ा से कनेक्टिविटी की बात की जाती है तो बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में काम नहीं होने पर बालाघाट के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को चाहिए कि वे एसईसीरेल्वे के जोनल प्रबंधक आलोक कुमार से सीधे बात कर फोरलेन का उदहारण देते हुए बताएं कि लखनादौन से सिवनी तक मीनाक्षी कंपनी तो सिवनी से खवासा तक सद्भाव कंपनी के द्वारा काम कराया जा रहा था, और दोनों ही के द्वारा समयसीमा में काम पूरा करवा दिया गया है।

सांसद करें डिप्टी एसई के तबादले की सिफारिश

सवाल यही उठता है कि अगर ठेके एक ही तारीख में दिए गए थे तो सिर्फ बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में ठेकेदार के द्वारा काम में विलंब क्यों कारित किया जा रहा है।


वहीं, रेल्वे के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिस ठेकेदार के द्वारा छिंदवाड़ा जिले के चौरई से सिवनी तक का काम लिया गया था उसके द्वारा आत्महत्या किए जाने से दुबारा निविदा बुलानी पड़ी जिससे काम पर असर हुआ है, की बात से जनता और जनप्रतिनिधियों को संतुष्ट किया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि उसी ठेकेदार जिसके द्वारा आत्म हत्या की गई थी ने नैनपुर से केवलारी, मण्डला से चिरई डोंगरी, लामटा से समनापुर, चौरई से सिवनी आदि का काम लिया गया था। इसमें से चौरई से सिवनी को छोड़कर शेष हिस्सों में काम न केवल पूरा हो चुका है, वरन वहां रेल चलना भी आरंभ हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि अधिकारियों के द्वारा जनप्रतिनिधियों को भरमाने (कारण चाहे जो भी हो) में कोई कसर नहीं रख छोड़ी जा रही है।