बलात्कार के आरोपी को दोषमुक्त करार दिया न्यायालय ने

वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सोनकेशरिया के द्वारा दिए गए तर्कों से सहमत होकर दिया माननीय न्यायालय ने फैसला
(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। केवलारी थानांतर्गत दर्ज एक अपराध में अभियुक्त मुकेश बैगा को माननीय न्यायालय के द्वारा निर्दोष करार देते हुए दोषमुक्त किया गया है। अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सोनकेशरिया एवं अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमति दीपा मर्सकोले के द्वारा पैरवी की गई।
अधिवक्ता वीरेंद्र सोनकेशरिया ने बताया कि केवलारी थाने में मुकेश बैगाा पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 1860 की धारा 376 (2) (एन), 376 (2) (एफ) एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 05 (एन)/6 एवं धारा 05 (एल)/6 क अंतर्गत मामला पंजीबद्ध किया गया था कि 13 मई 2019 को केवलारी थानांतर्गत एक ग्राम निवासी नाबालिग बालिका को विवाह का प्रलोभन देते हुए उसके बहनोई के रिश्ते के भाई के द्वारा उसका दैहिक शोषण किया गया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सोनकेशरिया के द्वारा अपने मुवक्किल आरोपी के निरपराध होने के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अनेक दृष्टांत पेश किए गए। वहीं, दूसरी ओर अभियोजन पक्ष के द्वारा अभियुक्त को दोषी करार दिलवाए जाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए।
अंत में बचाव पक्ष के वकील वीरेंद्र सोनकेशरिया के तर्कों से सहमत होते हुए श्रीमति सुमन उइके, माननीय न्यायधीश, माननीय न्यायालय द्वितीय सत्र न्यायधीश एवं विशेष न्यायधीश (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम) सिवनी के द्वारा अभियुक्त मुकेश बैगा पर आरोप सिद्ध नहीं हो पाने पर अभियुक्त को बाईज्जत बरी किया गया।
इसके अलावा अभियुक्त इस प्रकरण में न्यायिक अभिरक्षा में होने के कारण अन्य मामलों में अगर जरूरत नहीं हो तो अभियुक्त को तत्काल रिहा करने एवं अभियुक्त 15 जुलाई 2019 से निर्णय होने (28 सितंबर 2021) तक अभिरक्षा में रहा है अतः अभियुक्त के द्वारा न्यायिक हिरास में व्यतीत की गई अवधि के संबंध में धारा 428 दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अंतर्गत प्रमाण पत्र तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यहां यह भी उल्लेखनीय होगा कि इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा भी आरोपी की जमानत याचिका को पांच बार खारिज किया गया था।