फूल और खुशियाँ

(आशीष मोहन)

फूल नहीं खुशियाँ रोपता है
माली अपने बगीचे में
हंसती है धरती फूलों का मुख लेकर
फिर बेच देता है वह
इन खुशियों को
महज दो रोटी और तन ढकने के
कपड़े के लिए
फूलों का व्यापारी
खुशियाँ नहीं फूल बेचता है
अपने परिवार के लिए
विलासिता के साधन
जुटाने के लिए!

(साई फीचर्स)