घंसौर की गुड़िया के बलात्कारी की फांसी को शीर्ष अदालत ने बदला उम्रकैद में!

2013 में सिवनी के घंसौर में चार साल की मासूम से किया था फिरोज ने बलात्कार, बाद में तोड़ दिया था गुडिया ने दम
(अपराध ब्यूरो)


नई दिल्ली (साई)। सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म करके उसकी हत्या करने के मामले में दोषी की मौत की सजा को 20 साल कैद में बदल दिया। अदालत ने फैसला बुधवार को सुनाया। घटना 17 अप्रैल 2013 को मध्य प्रदेश के धनसौर में हुई। जबलपुर हाईकोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई थी।
ज्ञातव्य है कि 2013 में मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के बरेला स्थित कोल आधारित पावर प्लांट की संस्थापना के दौरान एक कर्मचारी के द्वारा चार साल की गुडिया के साथ आप्रकृतिक कृत्य किया गया था। लगभग 12 घंटे बाद वह घायल अवस्था में मिली, जिसे जिला प्रशासन के सहयोग से प्राथमिकोपचार के बाद नागपुर भेजा गया था, जहां उसने दम तोड़ दिया था।
उस दौरान तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर संजय झा के द्वारा संपूर्ण जोन में किराएदारों के सत्यापन के आदेश जारी किए गए थे, जो अब तक अमली जामा नहीं पहन पाए हैं। बाद में आरोपी फिरोज को बिहार से पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किया गया था।
सर्वोच्च न्यायालय की जस्टिस यू.यू. ललित अगुआई वाली बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह मान लेना कि अधिकतम सजा देने से अपराधी की बुरी सोच का अंत हो जाएगा। यह हमेशा कारगर नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता और जघन्यता को देखते हुए अपराधी के लिए मौत की सजा के बदले आजीवन कारावास की सजा उचित होती, मगर हमें न्यायिक सिद्धांतों के जरिए यह सिखाया जाता है कि अपराध की कठोर सजा हमेशा कारगर नहीं होती। अपराधी में अगर सुधार की कुछ गुंजाइश नजर आए, तो उसे एक मौका दिया जाना चाहिए। इसलिए कोर्ट इस सिद्धांत का पालन करते हुए अपराधी को 20 साल कैद की सजा दे रही है।
इस मामले में पुलिस ने फिरोज और राकेश चौधरी को गिरफ्तार किया था। निचली अदालत ने इस मामले में फिरोज को फांसी की सजा सुनाई थी। वहीं, दूसरे आरोपी राकेश चौधरी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा था। इसके बाद फिरोज ने अपनी मां के माध्यम से मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि महान लेखक ऑस्कर वाइल्ड ने कहा था कि इस संसार में किसी संत और पापी में एकमात्र अंतर यही है कि हर संत का एक अतीत होता है और हर पापी का एक भविष्य होता है। कोई भी अपराधी अपने अपराध के अंजाम से बच नहीं सकता। ये बात हर अपराधी के मन में रहे।

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https://main.sci.gov.in/supremecourt/2014/31582/31582_2014_2_1501_35196_Judgement_19-Apr-2022.pdf