जनवरी 2021 में जारी हुए दिल्ली नागपुर कारीडोर के प्रस्ताव के बारे में सिवनी के नागरिकों को पता ही नहीं!

लिमटी की लालटेन 289

क्या केंद्र की योजनाओं की जानकारी सांसदों को नहीं रहती!

(लिमटी खरे)

हर राज्य में विधान सभा सदस्यों के जिम्मे अपने विधान सभा क्षेत्र की समस्याओं को दूर करना, राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाना और अपने क्षेत्र के विकास आदि का काम होता है। इसी तरह सांसदों के जिम्मे उनके संसदीय क्षेत्र में केंद्रीय योजनाओं का प्रचार प्रसार, केंद्र के द्वारा दी जाने वाली सौगातों की जानकारी जनता को सुलभ करने आदि का काम होता है।

हाल ही में दिल्ली नागपुर औद्योगिक गलियारे पर चर्चाएं तेजी से चल रहीं हैं। वह इसलिए क्योंकि इसके मार्ग में परिवर्तन की बात कही जा रही है। जनवरी 2021 में उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के द्वारा जारी किए गए नेशनल इंडस्ट्रीयल कारीडोर प्रोग्राम में नई दिल्ली से नागपुर औद्योगिक गलियारे को नई दिल्ली से आरंभ किया जाकर मथुरा, ग्वालियर, झांसी, ललितपुर, सागर, नरसिंहपुर, सिवनी होते हुए नागपुर जाना प्रस्तावित था। हाल ही में इस कारीडोर को दिल्ली से नरसिंहपुर तक तो यथावत ही रखा गया है पर उसके आगे नरसिंहपुर और सिवनी के स्थान पर अब यह ललितपुर से बीना, गंजबासौदा, विदिशा, भोपाल, नर्मदापुरम, इटारसी, बैतूल, मुलताई, पांढुरना, काटोल से होकर नागपुर ले जाने की बात कही जा रही है।

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जनवरी 2021 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करने वाले उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के द्वारा जारी किए गए नेशनल इंडस्ट्रीयल कारीडोर प्रोग्राम जारी किया गया था उसके पेज नंबर सात पर दिल्ली नागपुर औद्योगिक गलियारा (डीएनआईसी) की परिकल्पना डेडीकेटेड फ्रेट कारीडोर (डीएफसी) के अलावा उत्तर दक्षिण फोरलेन गलियारा भी इसमें शामिल किया गया था। इस गलियारे के द्वारा न केवल डीएफसी का लाभ उठाया जाएगा वरन राष्ट्रीय राजमार्ग के उत्तर दक्षिण फोरलेन गलियारे वाले नेटवर्क का भी लाभ उठाया जाएगा।

इसका उद्देश्य इस गलियारे के क्षेत्र में पड़ने वाले जिलों की वर्तमान आर्थिक क्षमता को बढ़ाने के साथ ही साथ रोजगार सृजन करना भी है। इसके साथ ही जिन जिलों से यह होकर गुजरता वहां रेलमार्ग भी उन्नत ही होते। जहां भी हवाई पट्टियां हैं उनको भी इसके लिए उपयोग में लाया जाता। इसके अलावा बहुत सारी सुविधाएं नरसिंहपुर और सिवनी जिले को मिल सकती थीं। अगर इस गलियारे को नरसिंहपुर सिवनी के बजाए बीना, भोपाल होकर नागपुर ले जाया जाता है तो सिवनी और नरसिंहपुर जिले पहले की ही तरह पिछड़े रह सकते हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि केंद्र सरकार के द्वारा जिन भी जिलों को सौगातें दी जाती हैं, उन जिलों के सांसदों को उस बात की जानकारी सबसे पहले दी जाती है, ताकि सांसद अपने अपने क्षेत्रों की जनता को सरकार की उपलब्धि बता सकें और इसका पालिटिकल माईलेज भी उनके द्वारा लिया जा सके।

जनवरी 2021 में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग अथवा उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के द्वारा जारी नेशनल इंडस्ट्रीयल कारीडोर प्रोग्राम के बारे में होशंगाबाद के सांसद उदय प्रताप सिंह को इसलिए बताया होगा क्योंकि यह उनके संसदीय क्षेत्र के नरसिंहपुर जिले से होकर गुजर रहा था। इसके साथ ही इन्हीं विभागों के द्वारा बालाघाट के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को भी इसकी जानकारी दी ही होगी क्योंकि यह उनके संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले से होकर गुजर रहा था।

विडम्बना ही कही जाएगी कि केंद्र में किसी मंत्री से मिलकर अपने संसदीय क्षेत्र के बारे में महज चर्चा किए जाने पर ही सांसदों के द्वारा मीडिया में प्रेस नोट जारी किए जाते हैं, सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली जाती हैं, पर इतनी बड़ी परियोजना के बारे में जनवरी 2021 के डेढ़ साल बाद तक इसकी जानकारी न तो नरसिंहपुर जिले की जनता को ही होशंगाबाद सांसद के द्वारा दी गई न ही सिवनी जिले की जनता को ही बालाघाट सांसद के द्वारा दी गई।

पीएमओ के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को यह भी बताया कि जनवरी 2021 में तो वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अधीन काम करने वाले उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के द्वारा इसके ड्राफ्ट को जारी किया गया था, इस पर काम तो 2019 में लोकसभा चुनावों के तत्काल बाद ही आरंभ हो गया था। पीएमओ के सूत्रों ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि तीन सालों में भी सांसदों के द्वारा विभिन्न विभागों के द्वारा भेजे जाने वाले पत्रों का अवलोकन तक नहीं किया गया! अगर किया गया तो इस बात को उनके द्वारा मीडिया के जरिए अपने संसदीय क्षेत्र के उन जिलों के नागरिकों को क्यों नहीं बताया गया जहां से गुजरना प्रस्तावित था।

सूत्रों ने भी कहा कि दिल्ली से नागपुर जाने वाला औद्योगिक गलियारा अगर बन जाए तो नरसिंहपुर और सिवनी जिले में सड़क मार्ग के साथ ही साथ रेल मार्ग भी और अधिक उन्नत हो जाएंगे। इसके अलावा दोनों ही जिलों में हवाई सेवाओं के द्वार भी खुल सकते हैं। इतना ही नहीं इन दोनों जिलों में औद्योगिक क्रांति भी आ सकती है जिससे सिवनी एवं नरसिंहपुर जिले के युवाओं को रोजगार के मार्ग भी प्रशस्त हो सकते हैं।

वैसे होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र से होकर तो भोपाल से नागपुर का गलियारा गुजरेगा ही, पर सिवनी जिला इससे पूरी तरह अछूता ही रह जाएगा! अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। अभी भी बालाघाट के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन एवं होशंगबाद के सांसद उदय प्रताप सिंह अगर मिलकर इसे वापस पुरानी स्थिति में लाने का प्रयास करें तो सिवनी और नरसिंहपुर के दिन फिरने में समय नहीं लगेगा।

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(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)

(साई फीचर्स)