युगांतर

अनिल शर्मा ,सिवनी

वो गंगा को स्वर्ग से ले आये 
वो समुन्दर को कही छिपा आये 
वो तो  कल की बात थी 
 अब जरा गंगा को हाथ लगा कर देखो 
समुन्दर का पानी जीभ तक लाकर देखो 
पता चल जाएगा युगों का अंतर 
अब नहीं चलेगा योग् मंतर 
क्या  करोगे  तुम मनीषी 
जब तुम्हारे सोचने मात्र से 
राजनीती हो जायेगी 
समुन्दर के लिए कोई पार्टी 
 तो गंगा किसी और पार्टी की
   झोली में नज़र आएगी