सूर्य से निकलने वाले खतरनाक विकिरण को रोकने स्पेस बबल ही एकमात्र सहारा!

लिमटी की लालटेन 280

क्या हो चुकी है ताप युगकी शुरूआत!

(लिमटी खरे)

धरती पर तापमान लगातार ही बढ़ता जा रहा है। 2022 में भारत में पड़ी गर्मी को असहनीय माना जा सकता है। दिन में तो गर्मी अधिक महसूस हुई साथ ही रात में भी गर्मी ने लोगों को हलाकान कर रखा था। वैज्ञानिक भी हैरान हैं कि आखिर गर्मी इस कदर क्यों बढ़ रही है।

इसके पीछे की कुछ वजहें भी सामने आ रहीं हैं। पिछले दिनों भास्कर अर्थात सूर्य पर मौजूद कुछ धब्बों में विस्फोट की तस्वीरें भी सामने आईं थीं। यह विस्फोट कहीं पृथ्वी के लिए खतरा तो नहीं! वैज्ञानिकों की मानें तो सूर्य पर हुए इस विस्फोट से निकलने वाला विकिरण धरती पर भू चुंबकीय तूफान पैदा कर सकता है, जिससे इलेक्ट्रानिक उपकरणों पर खतरे के बादल भी मण्डरा सकते हैं।

देखा जाए तो पिछले कुछ दशकों में धरती का तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है। लोगों का यह कहना भी है कि यह कहीं ताप युगकी शुरूआत तो नहीं। बढ़ता वैश्विक तापमान, युद्ध से उतपन्न विकिरण एवं परमाणु परीक्षण वैसे भी मनुष्य के लिए खतरे से कम नहीं माने जा सकते हैं।

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इस बात को सभी जानते हैं कि वर्तमान में इलेक्ट्रनिक प्रौद्योगिकी का बोलबाला है। आने वाले समय में यह और भी उन्नत स्वरूप में सामने आ सकती है। यह प्रौद्योगिकी भी ब्रम्हाण्ड के अनेक खतरों से मुक्त नहीं मानी जा सकती है। सूर्य से आने वाले विकिरण से ये प्रभावित भी हो सकते हैं। वैज्ञानिक भी इस दिशा में शोध कर रहे हैं कि आखिर इस खतरे को किस तरह कम किया जा सकता है।

कुछ शोध इस निष्कर्ष पर भी पहुंच रहे हैं कि सूर्य और पृथ्वी के मध्य अगर एक बहुत विशालकाय गुब्बारे अथवा बुलबुले का निर्माण कर दिया जाए तो सूर्य के विकिरण को धरती तक पहुंचने से रोका जा सकता है। इसके लिए केंब्रिज में 1865 में स्थापित की गई मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालाजी के द्वारा सूर्य और धरती के मध्य एक स्पेस बबलबनाए जाने का प्रस्ताव रखा है। इस बुलबुले का नाम इन्फ्लेटेबल बबल अर्थात हवा में तैरने वाला बबल रखा जाना प्रस्तावित किया गया है।

स्पेस बबल के बारे में जो जानकारी उपलब्ध है उसके अनुसार यह सिलिकान धातु का बनाया जाएगा और यह सूर्य और पृथ्वी के बीच एक कवच के रूप में काम करेगा। इस बुलबुले से टकराकर विकिरण की दिशा को परिवर्तित किया जा सकता है। अगर यह प्रयोग कामयाब रहा तो यह बहुत ही बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। वैसे यह भी कहा जा रहा है कि सूर्य से आने वाले विकिरण को रोकना संभव नहीं है, पर इस बबल के जरिए उसे कम जरूर किया जा सकता है।

खबरों की तह में अगर आप जाएं तो पाएंगे कि स्पेस बबल का परीक्षण किया जा चुका है और आने वाले समय में इसका उपयोग भी आरंभ कर दिया जाएगा। कहा जा रहा है कि सूर्य के विकिरण के धरती पर टकारने के पहले अगर 1.8 फीसदी हिस्से को भी अगर परिवर्तित कर दिया जाता है तो बढ़ रहे तापमान से निजात मिलने की उम्मीद है।

वैज्ञानिकों की मानें तो धरती का चुंबकीय क्षेत्र ही सूर्य से आने वाले विकिरण से हमें बचाता है। इसके बावजूद भ्ज्ञी सूर्य पर लगातार उठने वाले तूफान धरती पर काफी प्रभाव डालते हैं। सूर्य पर लगातार ही उठने वाले तूफानों से निकलने वाली गर्म लपटें पृथ्वी के बाहरी वायूमण्डल की परतों को गरम कर रही है, जिसका असर अनेक उपग्रहों पर पड़ना अवश्यंभावी ही है।

इन तूफानों से निकलने वाली सौर लपटों के कण बहुत ही तेज गति से धरती की ओर गमन करते हैं एवं धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराकर ये उर्जा उत्सर्जित करते हैं। इसका असर पावर ग्रिड, संचार व्यवस्था, नेवीगेशन सिस्टम, जीपीएस सिस्टम, टीवी सिग्नल्स, मोबाईल सिग्नल्स आदि पर पड़ता है। कई बार तो धरती पर लगे बिजली के ट्रांसफार्मर के जलने का खतरा भी इससे बना रहता है।

इतिहास खंगालें तो पता चलता है कि पहली बार सौर तूफान का असर 1859 में देखने को मिला था, उस वक्त इस तूफान के कारण अमेरिका और यूरोप में टेलीग्राफ तकनीक को इसने तहस नहस कर दिया था। वैसे 1989 में एक कम तीव्रता वाला तूफान भी आया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में बहुत ज्यादा शक्तिशाली सौर तूफान भी आ सकते हैं।

सूर्य की पराबैगनी किरणें भी औसत से तीन गुना अधिक अर्थात खतरनाक स्तर पर जा पहुंची हैं, जो मनुष्य के लिए घातक ही मानी जा रही हैं। हाल ही में सूर्य में विस्फोट की तस्वीरें सामने आई हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे उठने वाला विकिरण पृथ्वी पर भू चुंबकीय तूफान का कारण बन सकता है, जो इलेक्ट्रानिक उपकरणों के लिए काल बन सकता है।

यह बात भी सामने आई है कि उपग्रहों के क्षेत्र में एकाधिकार जमाने वाली एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स के चालीस से ज्यादा उपग्रह भू चुंबकीय तूफान का शिकार हो चुके हैं। वहीं वैज्ञानिक यह भी कह रहे हैं कि सौर तूफान की शुरूआत 2020 से हो चुकी है और आने वाले समय में और भी तूफान सामने आ सकते हैं।

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(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)

(साई फीचर्स)