अनुसूचित जाति विरोधी हैं सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन: वासनिक

28 जुलाई को अंबेडकर चौक पर एकत्र होंगे बड़ी तादाद में लोग: एडव्होकेट बारामाटे
(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। बागरी समाज को अनुसूचित जाति माना जाए अथवा नहीं, इस बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, किन्तु बालाघाट के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन के प्रतिनिधि के द्वारा सोशल मीडिया पर डाली गई एक इबारत से सियासत गर्माती दिख रही है।
क्रांतिकारी दलित संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय संयोजक कामरेड डी डी वासनिक ने प्रेस को बताया कि सिवनी बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद श्री ढाल सिंह बिसेन प्रदेश में निवास करने वाले वास्तविक अनुसूचित जाति के विरोध में हैं क्योंकि समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार के अनुसार बघेल बागरी जाति के प्रतिनिधियों ने सांसद महोदय से मुलाकात किया तब तत्काल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा कर बघेल बागरी जाति को अनुसूचित जाति का मानते हुए उन्हें अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र देने के लिए कहा है और संसद में इस विषय पर प्रश्न उठाने का आश्वासन दिया है।
इस विषय पर ऑल इंडिया समता सैनिक दल की प्रांतीय महासचिव एडवोकेट सुरेंद्र बारमाटे ने कहा है कि राजनैतिक लोग अपने फायदे के लिए बघेल बागरी जाति का समर्थन करते हैं क्योंकि बघेल बागरी जाति के लोग इस क्षेत्र में बड़े-बड़े जोत वाले जमीदार कृषक लोग हैं तथा नकली सर्टिफिकेट बना कर बड़े-बड़े सरकारी पदों पर आसीन हो गए हैं परंतु वास्तविक रूप में वह अपने गांव में वहां बसने वाले अनुसूचित जातियों के साथ में ऊंच-नीच और छुआछूत का बर्ताव करते जाते हैं और वह अपने आप को ठाकुर राजपूत बताते हुए कमजोर लोगों पर रौब गांठते रहते हैं इसके बाद भी जानबूझकर इस क्षेत्र के सांसद ढाल सिंह बिसेन बघेल बागरी जाति का समर्थन कर रहे हैं।
इसीलिए गरीब कमजोर शोषित पीड़ित अनुसूचित जाति के पक्ष में क्रांतिकारी दलित संघर्ष मोर्चा के डॉक्टर बीसी ओके तीरथ सिंह गजभिए डी एस डहाट एवं ऑल इंडिया समता सैनिक दल के जे डी बौद्ध यदु राज मेश्राम गोवर्धन भालेकर विवेक गजभिए नितिन भालेराव राहुल कुमार आदि ने सांसद ढाल सिंह बिसेन को वास्तविक अनुसूचित जाति का विरोधी निरूपित करते हुए सक्षम सबल और धनिक कृषक बघेल बागरी जाति का पक्षधर बताया है क्योंकि मालवा के पठार में रहने वाली बागड़ी जाति के लोग अनुसूचित जाति में आते हैं और उसी तर्ज पर सिवनी छिंदवाड़ा बालाघाट जबलपुर में रहने वाले बघेल बागरी जाति के लोग अनुसूचित जाति का लाभ ले रहे हैं जो बिल्कुल ही अनुचित है तथा वास्तविक अनुसूचित जाति के हक तथा अधिकारों पर कुठाराघात है इससे वास्तविक अनुसूचित जातियों में आक्रोश व्याप्त हो गया है और वे आंदोलन की राह अपनाने वाले हैं।
28 को अंबेडकर चौक में जमावड़ा
उधर, आल इंडिया समता सैनिक दल के प्रांतीय सचिव अधिवक्ता सुरेंद्र बारामाटे ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान बताया कि बागरी जाति को आरक्षण का लाभ दिया जाना दुरूपयोग की श्रेणी में आता है। इसके लिए एक दिवसीय धरना का आयोजन ब्रहस्पतिवार 28 जुलाई 2022 को जिला मुख्यालय सिवनी में अंबेडकर चौक पर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दौरान घेराव एवं ज्ञापन सौंपने की तैयारी भी की जा रही है।
एडव्होकेट सुरेंद्र बारामाटे का कहना है कि स्थानीय जिला पंचायत चुनाव व नगरीय निकायों के चुनाव संपन्न होने की प्रक्रिया चल रही है जिसमे अनुसूचित जाति व जनजाति व पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्राप्त है। आरक्षण के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर सिवनी जिले में अनुसूचित जाति के स्थान पर राजपूत ठाकुर की उपजाति बागरी जाति के सदस्यों ने अपने आप को अनुसूचित जाति का बताकर झूठा शपथपत्र देकर चुनाव में भाग लिया जबकि बागरी जाति के सदस्यों का पास स्थायी जाति प्रमाण पत्र भी नही है।
उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग के एक अस्पस्ट दिशा निर्देश के कारण फर्जी लोगो को चुनाव में भाग लेने का अवसर मिला। एक तरफ राज्य सरकार व जिला प्रशासन बागरी जाति को अनुसूचित जाति का सदस्य नही मानती वही दूसरी ओर एक शपथपत्र के आधार पर अनुचित जाति के लिए सुरक्षित सीट से चुनाव में भाग लेने का मौका देती हैं।
सुरेंद्र बारामाटे ने आगे कहा कि राज्य चुनाव आयोग के एक अस्पष्ट आदेश के कारण अनुसूचित जातियों को प्राप्त आरक्षण पर राजपूत ठाकुर की उपजाति बागरी बधेल जाति के लोग गलत फायदा उठाकर अनुसूचित जाति को मिले मौलिक व सवैधानिक अधिकारों का हनन कर अनुसूचित जाति के हक व अधिकारों को हड़प रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिले में राजनीति की बागडोर सभाल रहे जनप्रतिनिधि भी राजपूत ठाकुर जाति की उपजाति बागरी जाति को वोट बैंक साधने के लिए अनुसूचित जातियों की अनदेखी कर गलत लोगो का साथ दे रहे है, उनके पक्ष में मुख्यमंत्री व प्रेस नोट जारी कर रहे हैं, जबकि एक बागरी जाति को खुश करके जिले में निवासरत 15 जातियों को नाराज कर रहे है जबकि सिवनी बालाघाट ससदीय एरिया में चार लाख लोग अनुसूचित जातियों के लोग निवास करते है मतदाता है जबकि बागरी जति मात्र दो विधानसभा एरिया में निवास करते हैं जिनकी सख्या बहुत कम है।
अधिवक्ता सुरेंद्र बारामाटे ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने जानबूझकर यह जानते हुए कि बागरी जाति अनुसूचित जाति में मान्य नहीं है उनका नाम निर्देशन पत्र स्वीकार किया। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग में अस्पस्ट आदेश जारी कर सुरक्षित सीट से गलत लोगो को चुनाव में भाग लेने का मौका दिया। वहीं जनप्रतिनिधियों ने भी सत्य का साथ नही दिया। इस कारण जिले भर के अनुसूचित जातियों के जनजातियों के सगठनों की तरफ से एक दिवसीय धरना प्रदर्शन घेराव व ज्ञापन दिए जाने का निर्णय लिया गया है।