अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्यों पर से पर्दा उठाएगा जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप

लिमटी की लालटेन 296

जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप से आसान होगा अंतरिक्ष के राज पता करना

(लिमटी खरे)

मनुष्य के लिए सबसे ज्यादा कौतुहल का विषय ब्रम्हाण्ड ही रहा है। आपको देखने में तो सामान्य नीला आकाश दिखता है, पर इस आकाश में कहां क्या है इस बात की कल्पना भी लोग नहीं कर पाते हैं। वैज्ञानिक जो भी बताते हैं उसे लोग बहुत ही उत्सुकता के साथ देखते और सुनते हैं। अब लगने लगा है कि ब्रम्हाण्ड के रहस्य जल्द ही सुलझ सकते हैं।

25 दिसंबर 2021 को अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा के द्वारा जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप को लॉच किया था। उस वक्त यह माना जा रहा था कि यह टेलिस्कोप कुछ नया करने में कामयाब होगा। इसके प्रक्षेपण के लगभग छः माह बाद बीते मंगलवार को इस टेलिस्कोप के द्वारा पहली तस्वीर भेजी गई थी, जिसे अद्भुत, अकल्पनीय और चमत्कारिक माना जा सकता है।

जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप के द्वारा जो तस्वीरें भेजी गईं हैं वे रंगीन तस्वीरें हैं। इनमें बहुत ही छोटे दिखने वाले तारों का एक बेहतरीन लैण्डस्केप जैसा नजर आ रहा है। इसमें आकाश में पांच आकाशगंगाएं भी बहुत ही स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। इतना ही नहीं इसमें नीले और नारंगी रंग वाला एक टूटता सितारा भी दिख रहा है।

जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप के द्वारा भेजी गई सात तस्वीरें अपने आप में अंतरिक्ष की कहानी बयां करती नजर आ रही हैं। ये तस्वीरें बहुत ज्यादा स्पष्ट हैं। इसके जरिए ब्रम्हाण्ड के लगभग हर कोने में धरती के इंसान की पहुंच को भी सुनिश्चत करने का काम किया जा सकेगा।

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जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप की यह खूबी है कि यह बहुत ज्यादा ताकतवर होने के साथ ही साथ अब तक की सबसे ज्यादा रिजॉल्यूशन वाली इंफ्रारेड तस्वीर उतारने में सक्षम है। सबसे ज्यादा आश्चर्य तो इस बात पर हो रहा है कि इस कैमरे से जारी तस्वीरों में 13 अरब साल पहले बने तारे की चमक दिखाई दे रही है। बिग बैंग को 13 अबर साल पहले का माना जाता है। इसका अर्थ यह निकाला जा सकता है कि ब्रम्हाण्ड की उतपत्ति के आसपास के दौर को न केवल चित्रित किया जा सकता है वरन उसे महसूस भी किया जा सकता है। धरती की उतपत्ति लगभग चार अरब साल पुरानी मानी जाती है।

नासा का कहना है कि इससे गैलेक्सी के साथ ही ब्लैक होल जैसी चीजों पर भी ठीक से रिसर्च हो सकेगी। इसके द्वारा भेजी गई तस्वीरों में सदर्न रिंग नाम के नेबुला के एक तारे को देखा जा सकता है। नेबुला गैस और डस्ट से बनने वाले बादल होते हैं, जिनके बीच तारों का जन्म होता है। इस नेबुला का यह तारा खत्म होने की कगार पर है, जिससे इसकी ऊर्जा बाहरी परतों पर देखने को मिल रही है।

इसके अलावा इन तस्वीरों में कैरिना नेबुला की बात करें तो पृथ्वी से 7,600 प्रकाश वर्ष दूर, यह ब्रह्मांड में सबसे बड़े नेबुला में से एक है। इसकी फोटो को देख दुनियाभर के खगोलविद हैरान रह गए हैं। यह नेबुला किसी पहाड़ और घाटियों की तरह लग रहा हैं। तस्वीर में नीचे की तरफ डस्ट है और ऊपर की तरफ गैस प्रतीत हो रही है।

जेम्स वेब टेलिस्कोप इंफ्रारेड तरंगों के हिस्से को देखता है, जिसके लिए बेहद ठंडे तापमान में काम करने वाले उपकरण, कैमरे और आइनों की जरूरत पड़ती है। इसलिए टेलिस्कोप को सूर्य के रेडिएशन से बचाने के लिए बहुत बड़ी सन शील्ड भी लगाई गई है।

इस जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप को नासा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी और कैनेडियन स्पेस एजेंसी ने तैयार किया है। इस पर करीब 75 हजार करोड़ रुपए खर्च आया है। यह दुनिया का सबसे ताकतवर टेलिस्कोप है। इसकी क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह अंतरिक्ष से धरती पर उड़ रही चिड़िया को भी आसानी से डिटेक्ट कर सकता है।

नासा के इस जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप को 10 हजार वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया है। नासा के नए टेलिस्कोप में एक गोल्डेन मिरर अर्थात सुनहरा आईना भी लगा हुआ है। इसकी चौड़ाई करीब 21.32 फीट है। यह मिरर बेरिलियम से बने 18 षटकोण टुकड़ों को जोड़कर बनाया गया है। हर टुकड़े पर 48.2 ग्राम सोने की परत चढ़ी हुई है। इसे बनाने में 10 अरब डॉलर खर्च हुए हैं।

कुल मिलाकर ब्रम्हाण्ड की उतपत्ति कैसे और कब हुई! इस रहस्य पर से पर्दा भी उठने की उम्मीदें जागने लगी हैं। वैसे भी मनुष्य के द्वारा नित नए अविष्कार किए जाते हैं। आज प्रौढ़ हो रही पीढ़ी इन अविष्कारों और दुनिया में तेजी से हुए बदलावों की साक्षात गवाह मानी जा सकती है।

साठ सत्तर के दशक में संचार, परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी आदि हर क्षेत्र में पहले जिस तरह धीमी गति से दुनिया चल रही थी, आज दुनिया उस चाल को काफी पीछे छोड़कर लगभग दौड़ती ही नजर आने लगी है। हर क्षेत्र में क्रांति का आगाज हुआ है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप के जरिए कुछ ही सालों में ब्रम्हाण्ड के अनेक रहस्यों पर से पर्दा उठेगा और लोगों को आने वाले समय में इससे बहुत फायदा भी हो सकता है।

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(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)

(साई फीचर्स)