नींद से जागे सीएमएचओ, सरकारी अस्पतालों में भी नहीं हुआ फायर आडिट!

02 अगस्त के पत्र में फायर व इलेक्ट्रिकल सेफ्टी आड़िट की एनओसी के लिए दिए महज पांच दिन! जिला अस्पताल सहित किसी भी सरकारी अस्पताल ने जमा नहीं कराए दस्तावेज!
(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। हाल ही में जबलपुर के एक निजि अस्पताल में लगी आग के बाद प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की तंद्रा शायद टूटी है। 02 अगस्त को उनके हस्ताक्षरों से एक पत्र निजि अस्पताल संचालकों को जारी किया गया है, जिसमें पांच दिनों के अंदर फायर एवं इलेक्ट्रिकल सेफ्टी आडिट कराया जाकर उसका अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय होगा कि जिला चिकित्सालय में आपरेशन कायाकल्प के तहत हाल ही में पूरा काम कराया गया है।
सीएमएचओ कार्यालय के भरोसेमंद सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सीएमएचओ के द्वारा 02 अगस्त 2022 को एक पत्र लिखा गया है। जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, बीएमओ गोपालगंज, कुरई, बरघाट, केवलारी, छपारा, लखनादौन, घंसौर और धनौरा को इस पत्र को संबोधित किया गया है।
सूत्रों ने आगे बताया कि इसके अलावा यह पत्र क्रिश्चियन हास्पिटल लखनादौन, वरदान नेत्रालय सिवनी, जय हो आयुर्वेद अस्पताल लोनिया, न्यू लाईफ केयर अस्पताल सिवनी, जठार अस्पताल सिवनी, आर्शीवाद अस्पताल सिवनी, शुभाशीष अस्पताल सिवनी, नर्मदा नर्सिंग होम सिवनी, यश अस्पताल सिवनी, दीप अस्पताल सिवनी, शिफा अस्पताल सिवनी, साईराम अस्पताल सिवनी, महामाया अस्पताल बरघाट, सेवा सदन अस्पताल लखनादौन एवं एडवान्स केयर अस्पताल लखनादौन इस तरह कुल 16 अस्पतालों को यह पत्र लिखा गया है।
सूत्रों ने आगे बताया कि इस पत्र में क्षेत्रीय संचालक कार्यालय के एक पत्र का हवाला दिया गया है जिसमें तिथि का उल्लेख नहीं किया गया है। इसमें कहा गया है कि पूर्व में भी उपरोक्त सभी के द्वारा संचालित अस्पतालों का फायर आडिट कराने के लिए निर्देश दिए गए थे। इस संबंध में 02 अगस्त को एक पत्र संलग्न कर सभी को ओर भेजा गया है।
सूत्रों ने बताया कि इस पत्र में कहा गया है कि नियमानुसार सभी अपनी अपनी संस्था के फायर आडिट कराकर नगर पालिका अथवा नगर पंचायत के द्वारा फायर एनओसी प्राप्त कर 05 दिवस अर्थात 07 अगस्त तक सीएमएचओ कार्यालय में जमा करवाएं। अगर समय सीमा में यह एनओसी नहीं जमा करवाई जाती तो आगे होने वाली कार्यवाही के लिए संस्था प्रमुख जवाबदेह होंगे।
सूत्रों ने कहा कि जबलपुर में अगर अग्निकाण्ड जैसी दुर्घटना नहीं घटी होती तो प्रभारी सीएमएचओ की तंद्रा शायद ही टूट पाती। जब जिला चिकित्सालय सहित जिले भर के खण्ड चिकित्सा अधिकारियों के अधीन काम करने वाले अस्पतालों का फायर आडिट और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी आडिट नहीं कराया गया है तो निजि अस्पतालों की कौन कहे!
सूत्रों ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि बिना फायर एवं इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के आडिट को कराए बिना इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय सिवनी में आपरेशन कायाकल्प में 2019 में करोड़ों रूपए के काम कैसे करा दिए गए और प्रदेश भर में यह अस्पताल आपरेशन कायाकल्प में प्रथम स्थान पर कैसे आ गया!