भगवान भास्कर के उत्तरायण होने व गुड़ तिल का पर्व है मकर संक्रांति . . .
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मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख त्योहार है जो हर साल जनवरी के मध्य में मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है और इसे उत्तरायण का पहला दिन भी माना जाता है। इस दिन से दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी। मकर संक्रांति को भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे कि पोंगल, मकर सक्रांति, बिहू आदि।
अगर आप जगत को रोशन करने वाले भगवान भास्कर, भगवान विष्णु जी एवं भगवान श्री कृष्ण जी की अराधना करते हैं और अगर आप विष्णु जी एवं भगवान कृष्ण जी के भक्त हैं तो कमेंट बाक्स में जय सूर्य देवा, जय विष्णु देवा, जय श्री कृष्ण, हरिओम तत सत, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः लिखना न भूलिए।
मकर संक्रांति का महत्व जानिए,
इसे कृषि का त्योहार माना जाता है, मकर संक्रांति को कृषि का त्योहार भी कहा जाता है क्योंकि यह रबी की फसल के पकने का समय होता है। किसान इस दिन अपनी फसल काटते हैं और देवताओं को धन्यवाद देते हैं।
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सूर्य देवता का पूजन इस दिन किया जाता है, इस दिन सूर्य देवता का विशेष पूजन किया जाता है। मान्यता है कि सूर्य देवता इस दिन अपने पुत्र शनि से मिलने मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मन शुद्ध होता है।
इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व है। दान करने से पुण्य प्राप्त होता है।
मकर संक्रांति को एक नए साल की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।
मकर संक्रांति के विभिन्न नाम जानिए
पोंगल, तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग नए चावल उबालकर भगवान को भोग लगाते हैं।
बिहू, असम में इस त्योहार को बिहू के नाम से जाना जाता है। बिहू को तीन भागों में बांटा गया है – मांघ बिहू, माघ बिहू और बोहाग बिहू। मकर संक्रांति माघ बिहू के नाम से मनाई जाती है।
मकर सक्रांति, यह नाम मुख्य रूप से उत्तर भारत में प्रचलित है।
लोहड़ी, पंजाब में इस त्योहार को लोहड़ी के नाम से जाना जाता है।
जानिए मकर संक्रांति की परंपराएं,
मकर संक्रांति के दिन भारत के विभिन्न राज्यों में कई तरह की परंपराएं निभाई जाती हैं। इनमें से कुछ प्रमुख परंपराएं इस प्रकार हैं,
तिल के लड्डू, इस दिन तिल के लड्डू बनाकर खाए जाते हैं। माना जाता है कि तिल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
पतंगबाजी, गुजरात में मकर संक्रांति के दिन पतंगबाजी का बहुत शौक है। लोग रंग-बिरंगे पतंग उड़ाते हैं।
नदी में स्नान, कई लोग इस दिन गंगा नदी में स्नान करने जाते हैं।
दान, इस दिन गरीबों को दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
देवालयों में पूजा, इस दिन लोग मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं।
मकर संक्रांति का महत्व विस्तार से जानिए,
मकर संक्रांति का भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में बहुत महत्व है। यह त्योहार लोगों को एकजुट करता है और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देता है। इस त्योहार के माध्यम से लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखते हैं।
मकर संक्रांति किसानों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार उनके लिए कड़ी मेहनत और लगन का फल होता है। इस दिन किसान अपनी फसल का आनंद लेते हैं और भगवान को धन्यवाद देते हैं।
मकर संक्रांति पर्यावरण के संरक्षण का भी संदेश देती है। इस त्योहार के दौरान लोग पेड़ लगाते हैं और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रतिज्ञा लेते हैं।
मकर संक्रांति सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। इस त्योहार के दौरान लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं और मिठाई बांटते हैं।
मकर संक्रांति धार्मिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन लोग अपने ईश्वर में विश्वास करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं।
मकर संक्रांति, भारत का एक प्रमुख त्योहार है जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह त्योहार प्राचीन काल से ही मनाया जाता रहा है और आज भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है। आधुनिक जीवनशैली के बावजूद, मकर संक्रांति का महत्व आज भी उतना ही है जितना पहले था। इस लेख में, हम आधुनिक समय में मकर संक्रांति के महत्व को विभिन्न दृष्टिकोणों से विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे।
मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व जानिए,
मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व भी काफी गहरा है। इस दिन सूर्य दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ना शुरू करता है। जिसके कारण दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी। इस परिवर्तन का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो, मकर संक्रांति हमें प्रकृति के चक्र और उसके नियमों के बारे में समझाती है।
मकर संक्रांति के साथ ही ऋतु परिवर्तन होता है। शीतकाल समाप्त होकर बसंत ऋतु का आगमन होता है। यह परिवर्तन हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण होता है।
किसानों के लिए मकर संक्रांति एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन से फसलों की कटाई का मौसम शुरू होता है और नई फसल बोने की तैयारी की जाती है।
मकर संक्रांति का सांस्कृतिक महत्व जानिए,
मकर संक्रांति का सांस्कृतिक महत्व भी काफी गहरा है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। इस दिन लोग एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं, पतंग उड़ाते हैं और नदियों में स्नान करते हैं।
परिवार और समाज का दृष्टिकोण, मकर संक्रांति परिवार और समाज को एकजुट करने का एक अवसर प्रदान करती है। इस दिन लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ मिलकर खाना खाते हैं और एक दूसरे के साथ समय बिताते हैं।
मकर संक्रांति हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक हिस्सा है। यह त्योहार हमें अपनी परंपराओं और मूल्यों से जोड़ता है।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व जानिए
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व भी काफी गहरा है। यह त्योहार सूर्य देव को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और इसीलिए इस दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है।
मकर संक्रांति से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। इन कथाओं में सूर्य देव की पूजा और दान करने का महत्व बताया गया है।
इस दिन लोग सूर्य देव की पूजा करते हैं, गंगा स्नान करते हैं और दान करते हैं।
आधुनिक समय में मकर संक्रांति की प्रासंगिकता जानिए,
आधुनिक समय में भी मकर संक्रांति का महत्व कम नहीं हुआ है। आज भी लोग इस त्योहार को बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं।
आधुनिक जीवनशैली बहुत तनावपूर्ण हो गई है। मकर संक्रांति हमें तनाव से मुक्ति दिलाने का एक अवसर प्रदान करती है।
मकर संक्रांति हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। इस दिन लोग पतंग उड़ाते हैं और प्रकृति के साथ एकात्म होते हैं।
मकर संक्रांति के दिन लोग गरीबों को दान करते हैं और समाज सेवा करते हैं।
मकर संक्रांति पर बनने वाले विभिन्न व्यंजनों को जानिए,
मकर संक्रांति, भारत का एक प्रमुख त्योहार है जो हर साल 14 जनवरी के आसपास मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है और इसीलिए इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। यह त्योहार भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है और अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। लेकिन एक चीज जो सभी को जोड़ती है, वह है इस त्योहार पर बनाए जाने वाले स्वादिष्ट व्यंजन।
तिल और गुड़ जो स्वाद और स्वास्थ्य का संगम होता है, मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का विशेष महत्व होता है। इन दोनों को मिलाकर कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं जो न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। तिल में प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में होता है, जबकि गुड़ शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
तिल के लड्डू सबसे लोकप्रिय व्यंजन हैं जो मकर संक्रांति पर बनाए जाते हैं। तिल को भूनकर पीस लिया जाता है और गुड़ के साथ मिलाकर लड्डू बना लिए जाते हैं।
तिल की चिक्की, एक और लोकप्रिय व्यंजन है जो तिल और गुड़ से बनाया जाता है। इसे बनाने के लिए तिल को गुड़ के साथ मिलाकर एक चपाती की तरह बेल लिया जाता है और फिर इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है।
गजक भी तिल और गुड़ से बना एक लोकप्रिय व्यंजन है। इसे बनाने के लिए तिल और गुड़ को मिलाकर एक पतली परत बनाई जाती है और फिर इसे सुखाकर कुरकुरा बना लिया जाता है।
विभिन्न राज्यों के विशेष व्यंजन जानिए,
भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति पर अलग-अलग तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं।
पंजाब में मकर संक्रांति को लोहड़ी के नाम से जाना जाता है। इस दिन तिल के लड्डू, गजक और मक्की की रोटी के साथ सरसों का साग बनाया जाता है।
महाराष्ट्र में मकर संक्रांति को माघी के नाम से जाना जाता है। इस दिन तिल के लड्डू, चिवड़ा, पुरण पोली और शिरा बनाए जाते हैं।
गुजरात में मकर संक्रांति को उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। इस दिन पतंगबाजी का त्योहार मनाया जाता है और साथ ही उंडियू, चूरमा और घरम चावल बनाए जाते हैं।
तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन पोंगल का भोग लगाया जाता है और साथ ही वड़ा, सांभर और चावल बनाए जाते हैं।
मकर संक्रांति के व्यंजनों के स्वास्थ्य लाभ को जानिए,
मकर संक्रांति पर बनाए जाने वाले अधिकांश व्यंजन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।
तिल और गुड़ शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और सर्दियों में शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं।
तिल और गुड़ पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और कब्ज की समस्या को दूर करते हैं।
तिल में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
तिल और गुड़ में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
मकर संक्रांति भारत का एक बहुत ही खूबसूरत और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार लोगों को एकजुट करता है और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देता है। इस त्योहार के माध्यम से लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखते हैं।
मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जो हमें हमारी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से जोड़ता है। यह त्योहार हमें प्रकृति के चक्र और उसके नियमों के बारे में भी समझाता है। आधुनिक समय में भी मकर संक्रांति का महत्व उतना ही है जितना पहले था। हमें इस त्योहार को मनाते हुए अपनी संस्कृति को जीवित रखना चाहिए और साथ ही पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के कार्यों में भी योगदान देना चाहिए। हरि ओम,
अगर आप भगवान विष्णु जी एवं भगवान श्री कृष्ण जी की अराधना करते हैं और अगर आप विष्णु जी एवं भगवान कृष्ण जी के भक्त हैं तो कमेंट बाक्स में जय विष्णु देवा, जय श्री कृष्ण, हरिओम तत सत, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः लिखना न भूलिए।
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लगभग 18 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। दैनिक हिन्द गजट के संपादक हैं, एवं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के लिए लेखन का कार्य करते हैं . . .
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