फाल्गुन माह में कर लीजिए ये सरल उपाय, हर तरह की चिंताओं का हो सकता है समाधान . . .
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हिंदू धर्म में फाल्गुन माह का विशेष महत्व है, क्योंकि इस माह में देवाधिदेव महादेव ब्रम्हाण्ड के राजा भगवान शिव से जुड़ा हुआ महाशिवरात्रि, रंगों का पर्व होली जैसे बड़े व्रत त्योहार पड़ते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल का आखिरी महीना फाल्गुन का होता है। माघ पूर्णिमा के अगले दिन 13 फरवरी से फाल्गुन माह की शुरुआत हो चुकी है। यह महीना भगवान श्री कृष्ण को समर्पित होता है। इस माह में किए कुछ उपाय व्यक्ति के जीवन से परेशानियों का नाश कर सकते हैं।
अगर आप जगत को रोशन करने वाले भगवान भास्कर, भगवान विष्णु जी एवं भगवान श्री कृष्ण जी की अराधना करते हैं और अगर आप विष्णु जी एवं भगवान कृष्ण जी के भक्त हैं तो कमेंट बाक्स में जय सूर्य देवा, जय विष्णु देवा, जय श्री कृष्ण, हरिओम तत सत, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः लिखना न भूलिए।
फाल्गुन माह में भगवान शिव और भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है, क्योंकि इस माह में भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि और भगवान विष्णु से संबंधित आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है।
माघ माह की तरह फाल्गुन माह में भी दान का विशेष महत्व है। इस माह में जरूरतमंदों को अपनी योग्यता के अनुसार शुद्ध घी, सरसों का तेल, मौसमी फल, अनाज, वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
जानकार विद्वानों के अनुसार आज के समय में बहुत से लोग हैं, जिन्हें विवाह में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी आ रही है तो फाल्गुन माह में सुगंधित केवड़े के फूल से बना इत्र पानी में डालकर स्नान करने से लाभ होता है। साथ ही, भगवान श्री कृष्ण को भी अर्पित करें। इससे मुरलीधर भगवान श्री कृष्ण जी की कृपा आप पर बनी रहती है और विवाह के प्रस्ताव जल्द मिल सकते हैं।
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जानकार विद्वानों के अनुसार ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन माह में भगवान श्री कृष्ण को चमेली और पीले रंग के फूल अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में आ रही समस्याएं दूर होती हैं। घर में सुख शांति बनी रहती है।
फाल्गुन माह में माता लक्ष्मी की पूजा शाम के समय जरूर करें। साथ ही उन्हें खीर का भोग लगाएं। इसके अलावा माता लक्ष्मी के इस ऊँ श्रीं क्लीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा मंत्र का जाप करें और उनका ध्यान करें। ऐसा करने से पैसों की तंगी दूर होगी।
माना जाता है कि फाल्गुन में चंद्रमा का जन्म हुआ था। इस पूरे महीने चांद की रोशनी में बैठकर चंद्रदेव के मंत्र ऊं सों सोमाय नमः का 108 बार जाप करें। दूध, दही दान करें। ये उपाय स्वास्थ लाभ पहुंचाता है।
वैवाहिक जीवन में प्यार खत्म हो गया है और पति-पत्नी के बीच सामंजस नहीं रहता। ऐसे में फाल्गुन के महीने में श्रीकृष्ण को मोरपंख अर्पित करने का विधान भी बताया गया है।
फाल्गुन यह माह हिंदू पंचाग का आखिरी महीना होता है इसके उपरांत हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। हिंदू पंचाग के बारह महीनों में पहला महीना चैत्र का होता है तो फाल्गुन आखिरी। फाल्गुन माह को मस्त और मस्ती के महीने के तौर पर जाना जाता है। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार यह महीना फरवरी या मार्च में पड़ता है।
प्रकृति ने मनुष्य को कई सौगातें दी हैं उन्हीं में मौसम भी एक हैं। प्रत्येक मौसम हमें प्रकृति के अनेक रूप दिखाता है और हमें नए संदेश भी देता है। वैसे तो हर मौसम अपने आप में विशेष होता है लेकिन उन सभी में वसंत के मौसम का अपना एक अलहदा अदांज होता है। फाल्गुन का महीना और वसंत का मौसम जब साथ होते हैं तो धरती की तुलना सजी-धजी दुल्हन से की जाने लगती है।
इस मौसम में मीलों तक फैले पीली सरसों के खेत देख ऐसा लगता है कि जैसे धरती ने पीली चुनर ओढ़ रखी है। पीले रंग से सजी संवरी यह दुल्हन रुपी वसंत रूपी अपने पति के आगमन की सूचना देती है। फाल्गुन के महीने में बौराए आमों की मदमस्त गंध और पलाश के पेड़ों के साथ तन-मन मानो बौरा जाता है। हर वर्ष फाल्गुन का महीना आते ही सारा वातावरण जैसे रंगीन हो जाता है और हो भी क्यों न, खेतों में पीली सरसों लहलहाती है, पेड़ों पर पत्तों की हरी कौपलें और पलाश के केसरिया फूल। इन सब को देखकर मन भी अनायास ही रंगीन हो जाता है। इसे देख लोगों के मन में बरसब ही यह बात कौंधती है कि ऐसा होता है फाल्गुन का खुमार।
दरअसल यह समय बसंत ऋतु का समय होता है। इस समय प्रकृति की विविध छटाएं देखने को मिलती हैं असल में पूरे वातावरण में एक अलग सी मादकता छायी रहती है। हर और नवजीवन का संचार नज़र आता है। सर्दी जा रही होती है और गर्मी आने की आहट होने लगती है यानि ना ही सर्दी और ना ही गर्मी इस तरह का मौसम खासकर उत्तरी भारत में होता है। प्रकृति के नज़रिये से यह माह जितना महत्वपूर्ण है उतना ही धार्मिक महत्व भी इस माह का होता है। फाल्गुन माह में 2 बड़े ही लोकप्रिय त्यौहार आते हैं जिन्हें देशभर में बड़े स्तर पर मनाया जाता है। भगवान भोलेनाथ की आराधना का त्यौहार महाशिवरात्रि व रंगों का त्यौहार होली इसी महीने में मनाये जाते हैं।
फाल्गुन माह का महत्व जानिए,
फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि व होली जैसे बड़े त्यौहार मनाये जाते हैं इस कारण इस माह का धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है। एक और इसमें भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है तो वहीं भगवान द्वारा अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के लिये भी भगवान की पूजा करते हुए होलिका का दहन किया जाता है।
इसके अलावा देश भर के नर नारी इससे अगले दिन रंग वाली होली मनाते हैं। यह पर्व भेदभाव को भूलाकर हमारी सांस्कृतिक एकता के महत्व को भी दर्शाता है। मान्यता है कि चंद्रमा की उत्पति अत्रि और अनुसूया से फाल्गुन माह की पूर्णिमा को हुई थी इस कारण गाजे-बाजे के साथ नाचते गाते हुए चंद्रोदय की पूजा भी की जाती है। चूंकि यह हिंदू वर्ष का अंतिम महीना होता है इस कारण अधिकरत धार्मिक वार्षिकोत्सव इसी महीने में आयोजित होते हैं। दक्षिण भारत में उत्तिर नाम का मंदिरोत्सव फाल्गुन माह की पूर्णिमा को आयोजित किया जाता है। इतना ही नहीं फाल्गुन द्वादशी यदि श्रवण नक्षत्र युक्त हो तो इस दिन भगवान विष्णु का उपवास करने की मान्यता भी है। हरि ओम,
अगर आप भगवान विष्णु जी एवं भगवान श्री कृष्ण जी की अराधना करते हैं और अगर आप विष्णु जी एवं भगवान कृष्ण जी के भक्त हैं तो कमेंट बाक्स में जय विष्णु देवा, जय श्री कृष्ण, हरिओम तत सत, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः लिखना न भूलिए।
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