भगवान श्री कृष्ण की पालनहार माता यशोदा जयंति का शुभ महूर्त जानिए . . .

जानिए इस साल कब मनाई जाएगी महिलाओं के लिए विशेष मानी जाने वाली माता यशोदा की जयंति
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हिंदू धर्म में यशोदा जयंती का पर्व बहुत ही खास माना गया है। हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। यह दिन भगवान कृष्ण की मां यशोदा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान कृष्ण का जन्म माता देवकी के कोख से हुआ था, लेकिन माता यशोदा ने श्रीकृष्ण भगवान का पालन-पोषण किया था। यशोदा जयंती के पावन पर्व पर भगवान कृष्ण और माता यशोदा का पूजन किया जाता है। साथ ही माताएं अपने संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए व्रत भी रखती हैं। यह त्योहार खासतौर से गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय राज्यों में बड़े धूमधाम और हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाता है।
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हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। इस बार यशोदा जयंती इस साल 2025 में मंगलवार 18 फरवरी को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान श्री कृष्ण की मैया यशोदा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। मां यशोदा ने ही भगवान श्रीकृष्ण का लालन-पालन किया था। जबकि कृष्ण का जन्म मां देवकी के कोख से हुआ था। यह पर्व दुनियाभर के इस्कॉन मंदिरों और कृष्ण जी के सभी मंदिरों में धूमधाम से मनाया जाता है। माताओं के लिए यह व्रत बेहद खास होता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और उनकी मंगल कामना के लिए व्रत करती हैं।
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यशोदा जयंती हिंदू धर्म का एक विशेष पर्व है, जो कन्हैया की मैया यशोदा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यद्यपि कृष्ण को जन्म तो देवकी ने दिया था, लेकिन उनका लालन पालन करने का अवसर और मातृत्व का सुख यशोदा रानी को मिला। यशोदा जयंती को लेकर शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि यदि कोई स्त्री इस दिन माता यशोदा और श्री कृष्ण की विधिवत पूजा करती है, तो उन्हें उत्तम संतान की प्राप्ति होती है, और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
जानिए कब है यशोदा जयंती?
द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत 18 फरवरी को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगी और अगले दिन 19 फरवरी को सुबह 07 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 18 फरवरी 2025 को यशोदा जयंती मनाई जाएगी। यशोदा जयंती के दिन वृद्धि योग का निर्माण हो रहा है।
यशोदा जयंती के शुभ मुहूर्त जानिए,
ब्रम्ह मुहूर्त सुबह 5 बजकर 15 मिनिट से 6 बजकर 6 मिनिट तक,
अभिजित मुहूर्त अपरान्ह 12 बजकर 13 मिनिट से 12 बजकर 58 मिनिट तक,
विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनिट से दोपहर 3 बजकर 13 मिनिट तक,
गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 11 मिनिट से 6 बजकर 37 मिनिट तक,
अमृत काल रहेगा 19 फरवरी को रात 12 बजकर 44 मिनिट से 19 फरवरी को मध्य रात्रि 2 बजकर 32 मिनिट तक एवं,
निशिता मुहूर्त रहेगा 19 फरवरी को मध्य रात्रि 12 बजकर 9 मिनिट से 19 फरवरी को मध्य रात्रि 1 बजे तक,
यशोदा जयंती का महत्व जानिए,
माताओं के लिए यशोदा जयंती का पर्व बहुत ज्यादा विशेष माना जाता है। यह पर्व माता और संतान के प्रेम को दर्शाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं। मान्यता है कि इस दिन माता यशोदा और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करने और व्रत रखने से संतान प्राप्ति की कामना शीघ्र पूर्ण होती है।
यशोदा जयंती की पूजा विधि जानिए,
यशोदा जयंती के दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के बाद माता यशोदा और कृष्ण का ध्यान करें।
पूजन के लिए माता यशोदा की भगवान कृष्ण की गोद में लिए हुए तस्वीर को स्थापित करें।
यदि माता यशोदा की तस्वीर न हो तो उनका ध्यान करते हुए भगवान श्री कृष्ण के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।
माता यशोदा जी को लाल चुनरी अर्पित करें।
स्नानादि के बाद माता यशोदा और कृष्ण जी का ध्यान करें।
अब फल,फूल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
मां यशोदा को लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं।
भगवान कृष्ण को मक्खन का भोग लगाएं।
अंत में मां यशोदा और भगवान कृष्णजी की आरती उतारें।
पूजा संपन्न होने के बाद अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।
खुशहाल और सुखमय जीवन की कामना करते हुए पूजा संपन्न करें।
यशोदा जंयती की कथा जानिए,
पुराणों में वर्णन मिलता है कि एक बार यशोदा जी ने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की थी। इस तपस्या से प्रसन्न होकर नारायण प्रकट हुए, और बोले- हे यशोदा! वरदान मांगो! तुम्हारी क्या इच्छा है?
माता यशोदा ने कहा- हे भगवन! मेरी एक ही अभिलाषा है कि आप मुझे पुत्र रूप में मिलें और अपनी माता कहलाने का महाभाग्य प्रदान करें।
माता यशोदा की बात सुनकर भगवान विष्णु मुस्कुराए और बोले- हे यशोदा! चिंता न करो! मैं तुम्हें अपनी मां कहलाने का वरदान देता हूं! विष्णु जी ने कहा- कुछ समय पश्चात् ही मैं वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से जन्म लूंगा। लेकिन मेरा लालन-पालन तुम्हारे ही हाथों होगा, और समस्त संसार में तुम ही मेरी मैया के रूप में जानी जाओगी।
धीरे-धीरे समय का पहिया आगे बढ़ता गया और अंततः वो अद्भुत संयोग आ ही गया, जब भगवान श्री कृष्ण ने वसुदेव-देवकी की आठवीं संतान के रूप में जन्म लिया। लेकिन वसुदेव ने अपने पुत्र को कंस के क्रोध से बचाने के लिए उन्हें अपने परम मित्र नंद के घर पहुंचा दिया। इस प्रकार भगवान ने यशोदा को दिया हुआ वरदान पूर्ण किया, और नंदरानी ने कान्हा पर जिस तरह से अपनी ममता न्यौछावर की, उसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता।
श्रीमदभागवत में वर्णन मिलता है कि नारायण ने जो महाभाग्य यशोदा को प्रदान किया, वैसी कृपा ब्रम्हाजी, शंकर जी और स्वयं उनकी अर्धांगिनी लक्ष्मी जी को भी कभी प्राप्त नहीं हुई। हरि ओम,
अगर आप भगवान विष्णु जी एवं भगवान श्री कृष्ण जी की अराधना करते हैं और अगर आप विष्णु जी एवं भगवान कृष्ण जी के भक्त हैं तो कमेंट बाक्स में जय विष्णु देवा, जय श्री कृष्ण, हरिओम तत सत, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः लिखना न भूलिए।
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(साई फीचर्स)

आकाश कुमार

आकाश कुमार ने नई दिल्ली में एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद देश की आर्थिक राजधानी में हाथ आजमाने की सोची. लगभग 15 सालों से आकाश पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के मुंबई ब्यूरो के रूप में लगातार काम कर रहे हैं.समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया देश की पहली डिजीटल न्यूज एजेंसी है. इसका शुभारंभ 18 दिसंबर 2008 को किया गया था. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया में देश विदेश, स्थानीय, व्यापार, स्वास्थ्य आदि की खबरों के साथ ही साथ धार्मिक, राशिफल, मौसम के अपडेट, पंचाग आदि का प्रसारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है. इसके वीडियो सेक्शन में भी खबरों का प्रसारण किया जाता है. यह पहली ऐसी डिजीटल न्यूज एजेंसी है, जिसका सर्वाधिकार असुरक्षित है, अर्थात आप इसमें प्रसारित सामग्री का उपयोग कर सकते हैं. अगर आप समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को खबरें भेजना चाहते हैं तो व्हाट्सएप नंबर 9425011234 या ईमेल samacharagency@gmail.com पर खबरें भेज सकते हैं. खबरें अगर प्रसारण योग्य होंगी तो उन्हें स्थान अवश्य दिया जाएगा.