हिंदू पंचाग का अंतिम माह है फाल्गुन, जानिए इस महीने की कथा
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फाल्गुन माह हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का अंतिम माह होता है। यह माह फाल्गुन नक्षत्र के नाम पर आधारित है, जो इस महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा के साथ युति करता है। फाल्गुन माह को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। इस महीने में कई महत्वपूर्ण त्योहार आते हैं, जिनमें महाशिवरात्रि और होली प्रमुख हैं।
इस साल फाल्गुन माह कब से आरंभ होकर कब तक रहेगा यह जानिए,
इस वर्ष फाल्गुन माह की गणना के अनुसार यह महीना 13 फरवरी से आरंभ होकर 14 मार्च तक रहेगा।
फाल्गुन माह 2025 व्रत, पर्व, जयंती और उत्सव जानिए,
रविवार, 16 फरवरी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, सोमवार, 24 फरवरी, को विजया एकादशी, मंगलवार, 25 फरवरी, को भौम प्रदोष व्रत कथा, बुधवार, 26 फरवरी को महाशिवरात्रि, ब्रहस्पतिवार, 27 फरवरी को दर्श अमावस्या, अन्वाधान, फाल्गुन अमावस्या, शनिवार, 1 मार्च को फुलैरा दूज, चन्द्र दर्शन, सोमवार 10 मार्च को आमलकी एकादशी, मंगलवार 11 मार्च, को प्रदोष व्रत, ब्रहस्पतिवार 13 मार्च, को छोटी होली एवं होलिका दहन तथा शुक्रवार 14 मार्च, को वसन्त पूर्णिमा, होली, मीन संक्रान्ति, चन्द्र ग्रहण ’पूर्ण, फाल्गुन पूर्णिमा, अन्वाधान का पर्व, व्रत आदि रहेगा।
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फाल्गुन महीने से जुड़ी कुछ कथाएं जानिए,
धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था. इसी दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। फाल्गुन महीने में चंद्रमा का जन्म हुआ था, इसलिए इस महीने में चंद्रमा की भी पूजा की जाती है। फाल्गुन महीने में शनिवारी अमावस्या की कथा भी होती है। फाल्गुन महीने में दान-पुण्य करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
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अब जानिए फाल्गुन माह की पौराणिक कथा के बारे में,
फाल्गुन माह की महिमा का वर्णन कई पौराणिक कथाओं में मिलता है। इनमें से एक प्रमुख कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक धर्मात्मा राजा राज्य करते थे। उनके राज्य में एक ब्राम्हण रहते थे, जिनका नाम विष्णु शर्मा था। विष्णु शर्मा के सात पुत्र थे, जो सभी अलग-अलग रहते थे। जब विष्णु शर्मा वृद्ध हो गए, तो उन्होंने अपनी सभी बहुओं को गणेश जी का व्रत करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि जो भी बहू सच्चे मन से गणेश जी का व्रत करेगी, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
सबसे पहले बड़ी बहू ने व्रत किया, लेकिन उसका मन शुद्ध नहीं था। इसलिए उसे कोई फल प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद दूसरी, तीसरी और चौथी बहुओं ने भी व्रत किया, लेकिन उन्हें भी कोई फल नहीं मिला। अंत में सबसे छोटी बहू ने व्रत किया। उसने सच्चे मन से गणेश जी की पूजा की और व्रत किया। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसे दर्शन दिए और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी कीं। इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी कार्य को करने से पहले मन का शुद्ध होना आवश्यक है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान की पूजा करता है, उसे अवश्य ही फल प्राप्त होता है।
अब जानिए फाल्गुन माह का महत्व,
हिन्दू पंचांग का अंतिम महीना फाल्गुन माह होता है और इस महीने से धीरे-धीरे गर्मी के दिन शुरू होने लगते हैं तथा ठंड कम होने लगती है। फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि और होली ये दो सबसे बड़े त्योहार पड़ते हैं जो कि बहुत ही धूमधाम से मनाए जाते हैं।
हिन्दू धर्म के अनुसार अनेक देवताओं में से एक चंद्र देवता हैं। चंद्र के देवता भगवान शिव है और शिव जी ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण कर रखा है। अतः पुराणों की मानें तो फाल्गुन माह चंद्र देव की आराधना के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है, क्योंकि यह चंद्रमा का जन्म माह माना जाता है।
फाल्गुन माह में भगवान श्री कृष्ण की आराधना का भी विशेष महत्व है, इस माह में विशेषकर भगवान श्री कृष्ण के तीन स्वरूपों की पूजा करना बहुत ही लाभदायी माना जाघ्ता है। इसमें श्री कृष्ण के बाल कृष्ण स्वरूप, युवारूप के कृष्ण और गुरु कृष्ण की पूजा की जाती है।
बाल कृष्ण रूप की पूजा संतान पाने के लिए, युवा स्वरूप कृष्घ्ण का पूजन दांपत्य जीवन मधुर बनाने हेतु और गुरुरूप कृष्ण का पूजन मोक्ष और वैराग्य पाने के लिए ही फाल्गुन के महीने में कृष्ण जी का पूजन अवश्य ही सभी को करना चाहिए। साथ ही श्री गणेश के पूजन का भी महत्व है। फाल्गुल महीने में अपने खान-पान और दिनचर्या में बदलाव करना बहुत ही खास माना गया हैं, क्योंकि इस माह भोजन में अनाज का प्रयोग कम करके मौसमी फलों का सेवन अधिक करने की मान्यता है।
फाल्गुन माह को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। इस महीने में कई महत्वपूर्ण त्योहार आते हैं, जिनमें महाशिवरात्रि और होली प्रमुख हैं। महाशिवरात्रि भगवान शिव का त्योहार है। यह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
होली रंगों का त्योहार है। यह फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और खुशी मनाते हैं। फाल्गुन माह में कई अन्य महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार भी आते हैं, जैसे कि आमलकी एकादशी, विजया एकादशी और फाल्गुन अमावस्या। इन सभी व्रतों और त्योहारों का अपना-अपना महत्व है।
जानिए, फाल्गुन माह में क्या करें,
फाल्गुन माह में भगवान की पूजा-अर्चना करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस महीने में आप भगवान विष्णु, भगवान शिव और भगवान कृष्ण की विशेष पूजा कर सकते हैं। आप इस महीने में गरीबों और जरूरतमंदों को दान भी कर सकते हैं। दान करने से आपको पुण्य की प्राप्ति होती है। फाल्गुन माह में आप पवित्र नदियों में स्नान भी कर सकते हैं। स्नान करने से आपके सभी पाप दूर हो जाते हैं।
फाल्गुन माह हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माह माना जाता है। इस महीने में कई शुभ और पवित्र कार्य किए जाते हैं। आप भी इस महीने में भगवान की पूजा-अर्चना करके और दान आदि करके पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। फाल्गुन माह में आप भगवान कृष्ण को पीले फूल अर्पित कर सकते हैं। आप इस महीने में पीले रंग के वस्त्र धारण कर सकते हैं। आप इस महीने में पीले रंग के फल और मिठाइयों का सेवन कर सकते हैं। फाल्गुन महीने में तामसिक भोजन और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. इस महीने में अनाज का सेवन कम करना चाहिए और फल ज़्यादा खाना चाहिए.
फाल्गुन महीने में अंडा, प्याज़, लहसुन, मांस, शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
अब जानिए फाल्गुन महीने में क्या करना चाहिए,
इस माह में देवाधिदेव महादेव, ब्रम्हाण के राजा भगवान शिव की पूजा करने के साथ, शिवलिंग पर जल अर्पित करना, शिव जी के मंत्रों का जाप करना, भगवान श्रीकृष्ण और महादेव को गुलाल अर्पित करना, पीपल के पेड़ की पूजा करना, गाय की सेवा करना, मंदिर जाना और दान-पुण्य करना, मौसमी फलों का सेवन करना, रंग-बिरंगे कपड़े पहनना आदि कार्य करने का विधान जानकार बताते हैं। हरि ओम,
अगर आप भगवान विष्णु जी एवं भगवान श्री कृष्ण जी की अराधना करते हैं और अगर आप विष्णु जी एवं भगवान कृष्ण जी के भक्त हैं तो कमेंट बाक्स में जय विष्णु देवा, जय श्री कृष्ण, हरिओम तत सत, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः लिखना न भूलिए।
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लगभग 18 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। दैनिक हिन्द गजट के संपादक हैं, एवं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के लिए लेखन का कार्य करते हैं . . .
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