(दीपक अग्रवाल)
महाकुंभ नगर (साई)। प्रयागराज में चल रहा महाकुंभ मेला अपने अंतिम पड़ाव पर है। इस बार का महाकुंभ 13 जनवरी 2025 से शुरू हुआ था और इसका समापन 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर होगा। महाकुंभ में शाही स्नान का विशेष महत्व होता है और इस बार कुल छह शाही स्नान हुए हैं। आइए जानते हैं महाकुंभ का आखिरी शाही स्नान क्यों महत्वपूर्ण है।
महाशिवरात्रि और महाकुंभ
महाशिवरात्रि का त्योहार भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाकुंभ के अंतिम दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है और इस दिन शाही स्नान का विशेष महत्व है।
महाशिवरात्रि पर शाही स्नान का महत्व
महाकुंभ में शाही स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और मोक्ष मिलता है। लेकिन महाशिवरात्रि के दिन शाही स्नान का महत्व और भी अधिक है। मान्यता है कि इस दिन शिव जी की कृपा से सभी पाप धुल जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
महाकुंभ 2025 के शाही स्नान
पहला शाही स्नान: 13 जनवरी (पौष पूर्णिमा)
दूसरा शाही स्नान: 14 जनवरी (मकर संक्रांति)
तीसरा शाही स्नान: 29 जनवरी (माघ अमावस्या)
चौथा शाही स्नान: 3 फरवरी (बसंत पंचमी)
पांचवां शाही स्नान: 13 फरवरी (माघ पूर्णिमा)
छठा (आखिरी) शाही स्नान: 26 फरवरी (महाशिवरात्रि)
महाशिवरात्रि के शुभ मुहूर्त
चतुर्दशी तिथि: 26 फरवरी 2025 को सुबह 11 बजकर 08 मिनट से 27 फरवरी 2025 को सुबह 08 बजकर 54 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:09 बजे से 5:59 बजे तक
प्रातः सन्ध्या: सुबह 5:34 बजे से 6:49 बजे तक
अमृत काल: सुबह 7:28 बजे से 9:00 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:29 बजे से 3:15 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:17 बजे से 6:42 बजे तक
महाकुंभ का आखिरी शाही स्नान महाशिवरात्रि के दिन किया गया। यह दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और मान्यता है कि इस दिन शाही स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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