आचार्य महामण्डलेश्वर बने स्वामी प्रज्ञानानंद महाराज

 

 

चेतसिंह किला परिसर में हुआ प्रज्ञानानंद गिरी का पट्टाभिषेक

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगत्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य स्वामी प्रज्ञानानंद गिरी महाराज को आचार्य महामण्डलेश्वर की उपाधि दी गयी।

इसके लिये पंचायती अखाड़ा निरंजनी में बुधवार को सुबह दस बजे पट्टाभिषेक का आयोजन किया गया। शंकराचार्य व अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी महाराज की देखरेख में चेत सिंह किला परिसर बनारस में अनुष्ठान विधान आयोजित किया गया।

गौ, गीता, गंगा महामंच के अध्यक्ष पं.रविकान्त पाण्डेय ने बताया कि इस समाचार से सिवनी जिले के वासियों मे हर्ष की लहर दौड़ गयी। लोगों ने अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हुए अपने स्वामी महाराज को नमन कर मिठाई बांटकर प्रसन्नता व्यक्त की।

गौ, गीता, गंगा महामंच ने बलवंत श्रृद्धानंद सरस्वती महाराज के नेत्तृत्व में सिवनी जिले वासियों और समस्त शिष्य भक्तों की ओर से चादर ओढ़ाकर श्रीपट्ट भेंट कर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया गया। यह संपूर्ण अनुष्ठान चेत सिंह किला परिसर बनारस में शंकराचार्य व अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी के सानिध्य में संपन्न हुआ। इस दौरान देश भर से आये संतों और महंतों ने आयोजन में हिस्सा लिया।

पं.रविकान्त पाण्डेय ने बताया कि पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की ओर से बुधवार प्रातः 10 बजे महा मण्डलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक की शुरुआत हुई। इसके तहत अखाड़े की रीति – नीति के मुताबिक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच काशी स्थित मठ के महंत एवं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरी महाराज ने शंकराचार्य महाराज के शिष्य स्वामी प्रज्ञानाननंद गिरी का धूमधाम के साथ महा मण्डलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक किया। आयोजन के दौरान परिसर हर-हर महादेव के उदघोष से गूंजता रहा।

रविकान्त पाण्डेय ने बताया कि आनंद पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद गिरी तथा अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी, श्रीमहंत हरि गिरीजी साक्षी निरंज ज्योतिजी सहित अखाड़े के रमता पंचों, सचिवों, श्रीमहंतों ने भी उन्हें चादर ओढ़ायी। इसी क्रम में अन्य सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने भी अपने – अपने अखाड़े की ओर से चादर ओढ़ाकर उन्हें समर्थन और मान्यता दी।

इसके बाद उन्होंने अखाड़े के आराध्य भगवान कार्तिकेय के विग्रह का पूजन अर्चन किया और पुकार में भेंट चढ़ायी। बाद में सभी ने भण्डारा में प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के अंत में गौ, गीता, गंगा महामंच के सदस्यों ने उनसे आशीष लेकर धर्महित मंे कार्य करने का संकल्प लिया।

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