अभिभावक बोले-साहब ने देर से ली सुध

 

 

 

 

98 फीसदी ने खरीद ली स्कूलों की बताई महंगी किताबें

(ब्‍यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। मान्यता के मापदंड और सीबीएसई बोर्ड की गाइडलाइन दरकिनार कर एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें चलाने वाले सीबीएसई स्कूलों की जांच कराई जा रही।

कलेक्टर के बाद अब कमिश्नर ने निरीक्षण टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से अभिभावक संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि साहबने बड़ी देर से सुध ली।

जांच करानी थी तो 15 दिन पहले से कराते। अब तो 98 प्रतिशत अभिभावकों ने 4 से 5 हजार रुपए खर्च कर स्कूलों की बताई किताबें खरीद ली हैं। बच्चे स्कूल भी जाने लगे। कमिश्नर को ज्ञापन देकर स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग करने वाले नागरिक मित्र फाउंडेश्न ने यह तक कह दिया कि यदि वाकई शासन-प्रशासन अभिभावकों के पक्ष में हैं तो नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाए। साथ ही अभिभावकों को क्षतिपूर्ति दिलाई जाए। नहीं तो कोर्ट में याचिका दायर करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

हर दिन लुटते रहे अभिभावक, प्रशासन रहा बे-परवाह

अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों ने अचानक ही कोर्स में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें शामिल नहीं की। न ही एकाएक फीस में 10 से 12 फीसदी बढ़ोत्तरी की। यह सब महीनों पहले ही कर लिया गया था, तब भी प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। स्कूल खुलने के 15 दिन पहले से अभिभावकों को किताबों की सूची थमाकर चुनिंदा दुकानों में भिजवाना शुरू कर दिया। चुनिंदा दुकानों में अभिभावक लाइन लगाकर स्कूलों द्वारा बताई गईं महंगी किताबें खरीदने मजबूर रहे। तब भी जिला प्रशासन के अफसर बे-परवाह रहे। यदि उसी वक्त स्कूलों की मनमानी रोकी होती तो यह नौबत नहीं आती।