चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात!

 

 

(शरद खरे)

अतिक्रमण की जद में सिवनी शहर सालों से कसमसा रहा है। भारतीय जनता पार्टी शासित नगर पालिका परिषद के द्वारा अब तक न जाने कितनी बार शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चलाया गया है। विडंबना ही कही जायेगी कि यह अभियान महज दो या तीन दिन ही चल पाता है। ऐसे अभियान के खिलाफ किसी भी न्यायालय से किसी के द्वारा भी स्थगन नहीं लाया जाता। नगर पालिका प्रशासन ही इसे अनिश्चित काल के लिये अघोषित तौर पर स्थगित कर देता है।

शहर में शायद ही कोई हिस्सा होगा जहाँ अतिक्रमण न पसरा हो। एक समय में शहर को दो हिस्सों में विभाजित करने वाली नेहरू रोड किस कदर संकरी हो चुकी है यह बात किसी से छुपी नहीं है। बुधवारी बाजार, शुक्रवारी बाजार, बाहुबली चौक, गणेश चौक न जाने कितने स्थानों पर अतिक्रमण के चलते यातायात प्रभावित हो रहा है।

पता नहीं नगर पालिका परिषद को शहर की सड़कों से अतिक्रमण हटाने में पसीना क्यों आने लगता है। नगर पालिका परिषद अगर चाहे तो सिवनी शहर को महज एक सप्ताह में ही अतिक्रमण के कैंसर से पूरी तरह मुक्त करा सकती है, पर इसके लिये इच्छा शक्ति चाहिये, जिसकी कमी पालिका के अब तक के चुने हुए प्रतिनिधियों में साफ दिखायी देती है।

अगर किसी अधिकारी का वाहन जाम में फंसता है तो दूसरे दिन से पालिका, पुलिस, राजस्व आदि अमले की सक्रियता देखते ही बनती है। दूसरे ही दिन से सड़कों पर यातायात पुलिस के जवानों के साथ राजस्व और पालिका का अमला अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही को अंजाम देता दिख जाता है।

सिवनी शहर में एक बार घूमकर जाने वाला शख्स, इस शहर को शटर्स का शहर के नाम से पुकारने से भी नहीं चूकता है। शहर के कमोबेश हर घर में ही एक शटर दिखायी दे जाती है, जहाँ व्यवसाय आरंभ कर दिया जाता है। जाहिर है खरीददार पैदल तो आने से रहा। उसका वाहन कहाँ पार्क होगा, इस बारे में सोचने का काम किसका है!

नगर पालिका परिषद के द्वारा शटर लगी दुकानों की अनुमति किस तरह दे दी जाती है यह भी शोध का ही विषय है। बिना पार्किंग स्पेस के आखिर दुकानों का संचालन कैसे करने की अनुमति दे रही है नगर पालिका। शहर मे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाकर उनकी दुकानें या तो महंगे दामों पर बेच दी गयीं या मोटे किराये पर दे दी गयी हैं।

शहर में जितने भी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और दुकानें हैं उनमें ग्राहकों के चलने के लिये कम से कम पाँच फीट की जगह और पार्किंग के लिये दस फीट की जगह न हो तो उन दुकानों का चालान बनाया जाकर, उन्हें पार्किंग की जगह मुहैया करवाने के लिये प्रशासन को निर्देशित करने की दरकार प्रतीत हो रही है।

चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात की तर्ज पर नगर पालिका के द्वारा चलाये जाने वाले अतिक्रमण हटाओ अभियान से समस्या का समाधान शायद ही हो पाये। इसके लिये आवश्यकता है ठोस कार्ययोजना की। संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि वे ही सवसंज्ञान से इस मामले में पहल करते हुए शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिये पालिका को निर्देशित करें।

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