पहेली बनी थोक सब्जी मण्डी!

 

 

(शरद खरे)

सिवनी जिले की थोक सब्जी मण्डी भी अबूझ पहेली बनकर रह गयी है। कृषि उपज मण्डी के अधीन काम करने वाली थोक सब्जी मण्डी के लिये हाल ही में स्थान अधिसूचित किया गया है। इसके पहले शायद यहाँ थोक सब्जी मण्डी बिना किसी नियम कायदों के ही संचालित होती रही है।

मण्डी प्रशासन चाहता था कि थोक सब्जी मण्डी को नागपुर नाके के पास स्थानांतरित कर दिया जाये। इसके लिये यहाँ बकायदा स्थान को चिन्हित कर अधिसूचित भी किया जा चुका था। इस मण्डी में दस साल पहले 2009 में तीन हेक्टेयर रकबे में दो करोड़ रूपये से अधिक के काम भी कराये गये थे।

विडंबना तो देखिये कि इसके बाद लगभग दस सालों तक करोड़ों रूपये व्यय किये जाने के बाद भी यह स्थान निर्जन ही पड़ा रहा। जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह की व्यक्तिगत रूचि का ही परिणाम था कि इस साल 19 मार्च को थोक सब्जी मण्डी को नये स्थान पर भेजने की कार्यवाही की गयी।

यह बात जैसे ही व्यापारियों को पता चली, कृषि उपज मण्डी प्रशासन और थोक सब्जी व्यापारियों के बीच गतिरोध आरंभ हो गया। इसके बाद से अब तक यहाँ क्या हो रहा है इस बारे में शायद ही कोई जानता हो। इस बारे में मण्डी प्रशासन के द्वारा मानो पूरी तरह मौन ही साध लिया गया है।

एक बात और सामने आ रही है वह यह कि अब तक नयी थोक सब्जी मण्डी में बिना किसी कर का संग्रहण किये ही कारोबार चल रहा है। मण्डी अधिनियम में क्या यह व्यवस्था है कि बिना कर वसूले ही कारोबार किया जा सकता है? जाहिर है यह लापरवाही मण्डी के अधिकारियों के सिर पर ही आहूत होती है। बिना कर संग्रहण कैसे व्यापार किया जा सकता है यह शोध का ही विषय माना जा सकता है।

थोक सब्जी मण्डी में भूखण्डों के आवंटन में भी पैसे के लेनदेन की बातें सामने आ रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस सब्जी मण्डी में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं है। अगर किसी स्थान को मण्डी के द्वारा अधिसूचित किया जाता है तो वहाँ न्यूनतम सुविधाएं मुहैया कराने की जवाबदेही मण्डी प्रशासन की ही होती है।

अगर मण्डी प्रशासन के द्वारा नयी थोक सब्जी मण्डी में व्यापारियों और ग्राहकों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं करवायी जा रही हैं तो यह लापरवाही की श्रेणी में ही आयेगा। इसके लिये मण्डी प्रशासन के खिलाफ कार्यवाही की जाना चाहिये। प्रशासन को चाहिये कि व्यापारियों और ग्राहकों से फीडबैक लेकर यहाँ जरूरी सुविधाएं अवश्य मुहैया करवायी जायें।

इस मामले में जनप्रतिनिधियों सहित सियासी दलों के नुमाईंदों ने भी अपना मौन नहीं तोड़ा है। प्रमुख राष्ट्रीय दलों में किसानों से संबंधित अनुषांगिक संगठन हैं, पर वे भी इस मामले में निष्क्रिय ही दिख रहे हैं। संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि वे ही इस मामले में स्वसंज्ञान से उचित कार्यवाही कर नयी थोक सब्जी मण्डी को हरा-भरा करने की दिशा में प्रयास अवश्य करें।

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