घटिया राजनीतिक बदला

 

 

यह वाकई स्तब्ध करने वाली वारदात है कि नोआखाली के सुबर्ण चार उपजिले में एक और महिला के साथ कुछ लोगों ने इसलिए सामूहिक दुष्कर्म किया, क्योंकि वह चेयरमैन पद के उनके विरोधी प्रत्याशी का चुनाव प्रचार कर रही थी। महज तीन महीने पहले इसी उपजिले में सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक अन्य औरत के साथ सामूहिक बलात्कार किया था। तब कथित रूप से वजह यह थी कि उसने 10 दिसंबर के आम चुनाव में धान की बाली (बीएनपी का चुनाव चिह्न) पर अपना वोट डाला था। उस कांड का मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और मामले की सुनवाई अदालत में जारी है। नई घटना में चेयरमैन पद के दो प्रत्याशियों के बीच की प्रतिद्वंद्विता के कारण संबंधित महिला को निशाना बनाया गया, ये दोनों उम्मीदवार सत्ताधारी अवामी लीग के समर्थक बताए जा रहे हैं।

अपनी पसंद के राजनीतिक प्रत्याशी के समर्थन के लिए इन महिलाओं के साथ यौन हिंसा की हैरान करने वाली वारदातें बताती हैं कि बलात्कार अब राजनीतिक बदले का हथियार बन गया है। सरकार स्त्रियों के सशक्तीकरण की बातें हमेशा बढ़-चढ़कर करती है, मगर हकीकत में हालात बिल्कुल उलट नजर आते हैं। वरना पार्टी के भीतर की आपसी प्रतिद्वंद्विता में एक औरत जघन्य यौन हिंसा का शिकार कैसे बनाई जाती? इस शर्मनाक कांड के दोषी लोग भले अहम कार्यकर्ता न हों, मगर आम जानकारी यही है कि वे सत्ताधारी पार्टी से जुड़े हैं। इसलिए पार्टी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकती।

पिछले कुछ वर्षों में बलात्कार, सामूहिक दुष्कर्म और स्त्रियों के खिलाफ अन्य तरह की हिंसा की वारदातों में पूरे मुल्क में काफी बढ़ोतरी हुई है। कई मामलों में अपराधी या तो सत्ताधारी पार्टी से जुड़े पाए गए या फिर इसके रसूखदार नेताओं के साथ उनके गहरे ताल्लुकात थे। शायद यही वजह है कि बलात्कार के मामलों में सजा की दर बहुत ही कम है। सुबर्ण चार उपजिले मामले में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वारदात में शामिल सभी बलात्कारी फौरन गिरफ्तार किए जाएं और उन्हें कठोर से कठोर सजा मिले। (द डेली स्टार, बांग्लादेश से साभार)

(साई फीचर्स)