कलेक्टर ने थामी अस्पताल की नब्ज़!

 

 

कहीं जलावर्धन की तरह ही अस्पताल के न हो जायें हाल!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। सड़ांध मार रही जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं से नागरिक तो लंबे समय से आजिज आ चुके थे, पर अब जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं विशेषकर जिला अस्पताल की सुध ली गयी है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि एक माह के अंदर इस मामले में कुछ ठोस प्रगति अवश्य दिखायी देगी।

जिला कलेक्टर कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिला कलेक्टर जब अपने अध्ययन काल के दौर से गुजर रहे थे तब उनके मन में चिकित्सक बनने की लालसा थी। उनके द्वारा मेडिकल में प्रवेश के लिये पीएमटी की परीक्षा भी दी गयी थी, पर तब वे सफल नहीं हो पाये थे।

सूत्रों ने बताया कि जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह का झुकाव स्वास्थ्य सेवाओं की ओर पहले से ही रहा है, यही कारण है कि उनके द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिये अब अस्पताल की नब्ज़ थाम ली गयी है। उनके द्वारा एक के बाद एक लगातार किये गये औचक निरीक्षणों से यही प्रतीत हो रहा है कि वे अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने में महती भूमिका अवश्य निभायेंगे।

वैसे जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिये तत्कालीन जिला कलेक्टर मोहम्मद पाशा राजन, पुखराज मारू, एम.मोहन राव, मोहम्मद सुलेमान, डॉ.जी.के. सारस्वत, धनराजू एस. के द्वारा विशेष प्रयास किये गये थे। अस्पताल का कायाकल्प एम.मोहन राव के कार्यकाल में हुआ था, उसके बाद मोहम्मद सुलेमान के कार्यकाल में अस्पताल को गहन चिकित्सा ईकाई (आईसीसीयू) की सौगात मिली थी।

जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के अस्पताल के औचक निरीक्षण के उपरांत पेरामेडिकल स्टॉफ में रोष और असंतोष देखा जा रहा है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि जब भी किसी बड़े अधिकारी के द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया जाता है तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के द्वारा नर्स या वार्डब्वाय को आगे कर दिया जाता है।

पेरामेडिकल स्टॉफ के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार जिले के आला अधिकारी या प्रदेश या संभाग के अधिकारियों के द्वारा निरीक्षण किये जाने पर अस्पताल या जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के नियंतत्रण कर्त्ता अधिकारियों को (जो अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी से नहीं करते हैं) तो कुछ नहीं कहा जाता है पर छोटे कर्मचारियों पर निलंबन अथवा कारण बताओ नोटिस (एससीएन) की गाज़ गिरा दी जाती है।

चर्चाओं के अनुसार जिला अस्पताल में अगर व्यवस्थाएं पटरी से उतरी हैं तो इसके लिये जवाबदेह मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन और आरएमओ आदि हैं, पर जिला कलेक्टर के द्वारा लिखा पढ़ी में इन जिम्मेदारों के खिलाफ तो किसी तरह की कार्यवाही नहीं की जाती है, पर छोटे कर्मचारियों को मोहरा बनाकर उन पर निलंबन या एससीएन की गाज़ गिरा दी जाती है।

अस्पताल में चल रहीं चर्चाओं के अनुसार जिस तरह जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा जिला अस्पताल का बार – बार निरीक्षण किया जा रहा है, उसी तर्ज पर उनके द्वारा नवीन जलावर्धन योजना का निरीक्षण किया जाकर ठीक इसी तरह एक माह का अल्टीमेटम दिया गया था। नवीन जलावर्धन योजना के हाल किसी से छुपे नहीं हैं इसलिये जिला अस्पताल के हाल भी उसी तरह न हो जायें, इस बात को लेकर स्वास्थ्य विभाग के छोटे कर्मचारी चिंतित नजर आ रहे हैं।

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