प्रशासनिक मदद के लिये तरसती बैनगंगा

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिले के इतिहास में वर्षों से जीवन दायिनी का स्थान पाने वाली हजारों किसानों को कृषि हेतु पानी एवं मुख्यालय सिवनी सहित अन्य ग्रामों को पेयजल उपलब्ध कराने वाली बैनगंगा नदी, अपने मुण्डारा उद्गम स्थल से लेकर लखनवाड़ा घाट तक प्रशासनिक अनदेखी और वर्षों से गहरीकरण न होने के चलते नाले के रूप में तब्दील हो गयी है। अपना स्वरूप खोती बैनगंगा को एक बार फिर प्रशासनिक मदद की जरूरत महसूस होने लगी है।

ज्ञातव्य है कि पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ किये गये स्वच्छ भारत मिशन से प्रेरणा लेकर नगर के कुछ युवाओं ने ग्राम लखनवाड़ा, बम्होड़ी, फरेदा, परतापुर और जैतपुर के निवासियों की मदद से लखनवाड़ा घाट में प्रवाहित बैनगंगा को संरक्षित कर वर्ष भर यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को पानी उपलब्ध कराने हेतु प्रयास किया, लेकिन प्रशासनिक मदद के बिना अब इस नदी का पुर्नउद्धार होना संभव दिखायी नहीं दे रहा है।

पूर्व में तत्कालीन जिला कलेक्टर धनराजू एस. के द्वारा कुछ समय तक बैनगंगा के उद्गम मुण्डारा के कुण्ड को साफ करने की दिशा में प्रयास किये गये थे। इसके बाद से यह प्रशासनिक उदासीनता का शिकार ही हो रहा है।

लोगों का कहना है कि अगर इस नदी में उद्गम से छपारा में संजय सरोवर परियोजना के भीमगढ़ बाँध तक नदी की तलहटी को साफ किया जाकर यहाँ बीस तीस किलोमीटर में स्टाप डेम बना दिये जायें तो बारिश का पानी लंबे समय तक इस नदी में सहेजा जा सकता है। इससे आसपास का ग्राउंड वाटर लेवल भी काफी हद तक ऊपर आने की संभावना है।

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