यात्री बसों में मची है भर्राशाही

 

 

यात्रियों से वसूला जा रहा ज्यादा किराया, नहीं देते टिकिट

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सड़क परिवहन निगम का अस्तित्व जबसे समाप्त हुआ है उसके बाद से जिले में निजि वाहन संचालकों की मनमानी पूरी तरह हावी हो गयी है। यात्रियों को न तो टिकिट दिये जाते हैं और न ही किराया सूची के अनुसार ही किराया वसूला जा रहा है।

जिले के शहरी और ग्रामीण अंचल में चल रहीं क्षेत्रीय परिवहन सेवा में बस संचालक मनमानी कर रहे हैं। किराया अधिक वसूला जा रहा है, जबकि सुविधाएं लगातार कम हो रहीं हैं। निर्धारित से अधिक किराया देने के बावजूद यात्रियों को खड़े-खड़े सफर पूरा करना पड़ रहा है।

सिवनी से भोमा, कान्हीवाड़ा, मेहरा पिपरिया, बरघाट, धारना, बण्डोल, अरी, गंगेरूआ, जाम, अमरवाड़ा, सागर, बखारी, कलारबांकी भीमगढ़, आदेगाँव, घंसौर, कहानी, धनौरा सहित अन्य क्षेत्रीय ग्रामों की ओर चलने वाली बसों में देखा जा सकता है। ठसाठस भरी बस में खड़े रहकर भी अधिक किराया देने के लिये लोग विवश कर दिये गये हैं। ऐसे ही हालात का सामना कर रहे ग्रामीणों ने इस ओर प्रशासन से कार्यवाही की अपेक्षा व्यक्त की है।

सिवनी नगर पालिका परिषद के अकबर वार्ड पार्षद एवं स्वास्थ्य समिति के सभापति चितरंजन तिवारी ने बताया कि क्षेत्रीय बसों में हो रही मनमानी की लगातार मिल रहीं शिकायतों पर जब गुरुवार को सिवनी से कान्हीवाड़ा, कान्हीवाड़ा से मेहरा पिपरिया तक क्षेत्रीय बस में सफर किया तब वे स्थिति से वाकिफ हुए।

उन्होंने बताया कि उन्होंने अनुभव किया और देखा कि ठसाठस भरी बस में या तो लोकल सवारी को चढ़ने ही नहीं दिया जाता है और बस में चढ़ भी जायें तो किराया भी ज्यादा वसूला जा रहा है। इसके बदले में टिकिट भी नहीं दी जा रही है। क्षमता से अधिक सवारी लेकर जा रही बस भले ही थाना के सामने से गुजर रही हो, लेकिन चालक – परिचालक को किसी भी तरह की कार्यवाही का कोई डर भी नहीं रहता है।

गप्पू तिवारी ने जब ज्यादा किराया लिये जाने और टिकिट न देने पर बस के परिचालक से सवाल किया तो उनसे कहा गया कि ऐसा ही होता है, जिसको जाना है तो जाये, नहीं तो बस से उतर जाये, जो किराया कम ले रहा हो, उसी में जाना। ऐसा अमूमन ज्यादातर बसों में होता है।

क्षेत्रीय बसों में ऐसे भी नजारे दिखायी दे रहे हैं, जिसमें बसें खटारा हो चली हैं। खिड़कियों के काँच टूटे हुए हैं, फर्श की टीन उधड़ रही है, यात्रियों के बैठने की कुर्सी से गद्दियां उधड़ी हुईं हैं। बसों में प्राथमिक उपचार की पेटी नहीं है, अग्निशमन यंत्र नहीं है। इसके बावजूद ज्यादा सवारी लाना – और लेकर जाना, इनकी रोज की बात है।

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