बीएमओ चौधरी पर जमकर बरसे कलेक्टर

 

 

(संतोष बर्मन)

घंसौर (साई)। स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह का नज़ला टूटता दिख रहा है। एक के बाद एक कार्यवाहियों के बाद जिला कलेक्टर के द्वारा घंसौर और धनौरा के अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान अव्यवस्थाओं को लेकर जिला कलेक्टर ने घंसौर के खण्ड चिकित्सा अधिकारी को जमकर लताड़ लगायी।

जिला कलेक्टर ने अब जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिये कमर कस ली है। पहले जिला अस्पताल में सतत निरीक्षण के बाद जिला कलेक्टर के द्वारा अब ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था की तरफ रूख किया गया है। लोगों ने कलेक्टर के प्रयासों की सराहना तो की है लेकिन साथ ही अपेक्षा व्यक्त की है कि इस कवायद का अंजाम भी नवीन जलावर्धन योजना की तरह न हो।

कलेक्टर प्रवीण सिंह ने सोमवार को धनौरा और घंसौर के स्वास्थ्य केन्द्रों का दौरा कर, वहाँ उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। कलेक्टर ने सुदूर अंचल क्षेत्र धनौरा एवं घंसौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया। साथ ही सेक्टर सुपरवाईजर, एएनएम एवं संबंधित चिकित्सकों की बैठक लेकर स्वास्थ्य केंद्रवार विभागीय लक्ष्य एवं शासकीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षाएं की। इस दौरान लापरवाही बरतने वाले दो सेक्टर सुपरवाईजर के निलंबन, छः एएनएम कार्यकर्त्ता तथा एक चिकित्सक की वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश दिये। अव्यवस्थाओं को लेकर घंसौर के खण्ड चिकिसा अधिकारी विजेंद्र सोलंकी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश उनके द्वारा दिये गये।

कलेक्टर प्रवीण सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनौरा के लक्ष्य के विरुद्ध अपेक्षाकृत प्रगति न कर पाने वाले उप स्वास्थ्य केंद्र सालेवाड़ा की एएनएम कार्यकर्त्ता वंदना सेन, रावठान की एएनएम कार्यकर्त्ता अनिता राय, बरबसपुर की कविता बरकड़े तथा मुरघई की एएनएम कार्यकर्त्ता कल्पना उईके की एक-एक वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिये।

इस दौरान उन्होंने सेक्टर सुपरवाईजर संतोष सिंह को अपने प्राथमिक कार्यों की जानकारी न होने पर निलंबित करने के निर्देश दिये। इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घंसौर के लक्ष्य विरुद्ध प्रगति न कर पाने वाले उप स्वास्थ्य केंद्र गंगपुर की एएनएम भुवनेश्वरी बरकड़े तथा कार्यों से जुड़े प्रश्नों के उत्तर न पाने पर एएनएम गीता शिवहरे तथा राष्ट्रीय बाल सुरक्षा मिशन के डॉ.अजय उईके की एक-एक वेतन वृद्धि रोकने तथा सेक्टर सुपरवाईजर रवि शंकर को निलंबित करने के निर्देश दिये।

धनौरा एवं घंसौर विकास खण्ड की पृथक – पृथक आयोजित की गयी बैठक में कलेक्टर प्रवीण सिंह ने सभी एएनएम कार्यकर्त्ता, सेक्टर सुपरवाईजर एवं मेडिकल अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि वे कार्य के प्रति गंभीरता लाते हुए कार्यप्रणाली में सुधार करें। कलेक्टर ने बीएमओ श्री चौधरी को जमकर फटकार लगाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिये हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिये।

कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.के.सी. मेश्राम को निर्देशित किया कि संपूर्ण जिले की एएनएम वार, सेक्टरवार तथा बीएमओ वार किये गये कार्याें की मासिक रिपोर्ट बनायी जाये जिसे प्रत्येक माह की 10 तारीख को कलेक्टर कार्यालय को उपलब्ध कराया जाये ताकि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों कर्मचारियों पर सीधे कार्यवाही हो सके। इसी तरह हर सप्ताह मातृ मृत्युदर तथा शिशु मृत्युदर की रिपोर्ट भी विकास खण्डवार कारणों के साथ उपलब्ध कराये जाने के लिये कहा गया। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में शासन द्वारा निर्धारित दवाईयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने तथा वास्तविक हितग्राही तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करने के लिये उनके द्वारा निर्देशित किया गया।

बीएमओ को दिया नोटिस : कलेक्टर प्रवीण सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र घंसौर के निरीक्षण में कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य सुधार हेतु एनआरसी में दर्ज किये गये बच्चों की ग्रेडिंग तथा उपचार प्रक्रिया का अवलोकन किया तथा 13 दिन से एनआरसी में भर्त्ती बच्चों के वजन में कोई विशेष बढ़ौत्तरी न होने पर नाराजगी व्यक्त की। एनआरसी से संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश उन्होंने दिये। इसी तरह चिकित्सालय में पर्याप्त साफ सफाई न होने, वार्ड में कूलर आदि की व्यवस्था न होने पर बीएमओ ब्रजेन्द्र चौधरी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिवस के अंदर सुधार लाने के निर्देश दिये गये।

जलावर्धन की तरह न हो हश्र : जिला कलेक्टर के द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता पर लिये जाने के कारण जिले में संतोष की लहर तो दिख रही है किन्तु लोगों का कहना है कि जिला कलेक्टर की इस कवायद का नतीजा अंत में जलावर्धन योजना की तरह न हो, क्योंकि जिला कलेक्टर के द्वारा इस योजना का अनेक बार निरीक्षण किया जाकर निर्देश जारी किये जाते रहे थे। उन्होंने 28 फरवरी तक इस योजना का पानी सिवनी के नागरिकों को मिलने के निर्देश दिये थे पर अब तक इसके पानी के बारे में अधिकृत तौर पर कोई बात नहीं कही गयी है।