बंद नहीं होंगे चार दर्जन स्कूल

 

 

कलेक्टर लेंगे इन शालाओं पर फैसला

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिले में लगभग 45 कम इंद्राज संख्या (दर्ज संख्या) वाली शालाओं को बंद किया जाये अथवा नहीं इस बारे में फिलहाल संकट के बादल टलते दिख रहे हैं। जिले में इनके अलावा लगभग तीन दर्जन शालाएं ऐसी भी हैं जहाँ दर्ज संख्या पचास से कम है।

स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा इस तरह की शालाओं को बंद करने की कवायद की जा रही थी, जिसके चलते इन स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिये स्कूल प्रमुख और शिक्षकों पर खासा दबाव था। स्कूल शिक्षा विभाग ने अब यह व्यवस्था ही खत्म कर दी है और कलेक्टर को अपने विवेक पर फैसला लेने के अधिकार दे दिये हैं। यदि कलेक्टर चाहें तो आवश्यकता अनुसार जिला स्तर पर स्कूलों को बंद या चालू रखने की अनुशंसा करते हुए राज्य शिक्षा केन्द्र को प्रस्ताव भेज सकेंगे।

पोर्टल में ही दर्ज नहीं : स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 10 अपै्रल को जिला कलेक्टर्स के नाम जारी पत्र में कहा गया है कि 26 मार्च को प्राईमरी व मिडिल स्कूलों के बंद या मर्ज करने और नये स्कूल प्रारंभ करने के निर्देश दिये गये थे। प्रदेश भर में लगभग 3350 स्कूल बंद या मर्ज करने की कार्यवाही भी की गयी जिसमें से जिले के 45 स्कूल भी शामिल थे लेकिन अधिकांश स्कूलों को बंद करने की जानकारी शिक्षा विभाग को नहीं मिल पायी। इस कारण शिक्षा विभाग के पोर्टल से बंद हुए स्कूल न तो हटाये जा सके और न नये खुले स्कूल जोड़े जा सके। लिहाजा जिला स्तर पर स्कूलों को बंद या आरंभ करने की व्यवस्था समाप्त कर दी गयी है।

एक परिसर, एक शाला पर जोर : स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता बनाये रखने एक परिसर एक शाला पर जोर देने कहा है। इसके तहत एक परिसर में यदि प्राईमरी, मिडिल, हाई और हायर सेकेण्डरी संचालित हो रहे हैं तो शिक्षकों को योग्यता के आधार पर सभी कक्षाओं में पढ़ाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं।

जिले के 45 प्राईमरी, मिडिल स्कूल भी बंद होने के दायरे में थे। इन स्कूलों में 10 से भी कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पास के स्कूलों में मर्ज करने की कवायद चल रही थी। इन स्कूलों में हर माह एक से सवा लाख रूपये खर्च होने की बात कही जा रही थी। इसके साथ ही जिले में तीन सौ ऐसे स्कूल भी हैं जहाँ पर दर्ज छात्रों की संख्या 50 से कम है।

इन स्कूल के शिक्षकों को मई माह में घर-घर जाकर सर्वे करने और छात्रों को स्कूल आने के लिये आकर्षित करने के निर्देश दिये गये हैं। शिक्षक स्कूलों में संख्या बढ़ाने के लिये नुक्कड़ नाटक, चित्र-पोस्टर आदि का सहारा ले रहे हैं। मई माह खत्म होने के बाद ही पता चल सकेगा कि इस प्रयास में स्कूल शिक्षा विभाग को कितनी सफलता मिल सकी है।

इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है. स्कूल बंद करना है या नये स्कूल प्रारंभ करना है, इस संबंध में कलेक्टर अनुशंसा कर प्रस्ताव भेजेंगे. अंतिम निर्णय राज्य शिक्षा केन्द्र ही लेगा.

गोपाल सिंह बघेल,

जिला शिक्षा अधिकारी.

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