किसी काम को तो अंजाम पर पहुँचा दो सरकार!

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिले में बदलाव की बयार बहती दिख रही है। सालों बाद किसी जिलाधिकारी के द्वारा उन योजनाओं और व्यवस्थाओं पर ध्यान देना आरंभ किया गया है जो जनता से सीधे जुड़े मामले हैं। इस मामले में अब लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आना आरंभ हो गयी हैं। सिवनी निवासी आरती तिवारी के द्वारा फेसबुक पर लिखी गयी बात पाठकों के लिये प्रस्तुत है :

जिला कलेक्टर के रूप में प्रवीण अढ़ायच ने जबसे जिले की कमान सम्हाली है अक्सर वे सुर्खियों में बने रहने के लिये नित नये-नये कारनामे करने की कोशिश करते रहते हैं। आते ही कलेक्टर साहब ने जिले की नवीन जलावर्धन योजना को पकड़ लिया। आये दिन नगर पालिका जाने, सीएमओ को फटकार लगाने, ठेकेदार को कार्यवाही की धमकी अखबारों की सुर्खियां बनने लगीं थीं।

एक दो माह तक ऐसा ही चला। कई तरह की बातें हुईं और फिर एक दिन ठेकेदार को 28 फरवरी की अंतिम तारीख दे दी गयी कि वह पहले जिला मुख्यालय में नवीन योजना से पानी पहुँचाये। ठेकेदार भी शाणा निकला। 2016 की पहली डेडलाईन से लेकर अब तक वह कई कलेक्टरों को देख चुका था इसलिये उसे अंदाजा था कि कलेक्टरों को कैसे सेट किया जाता है।

लिहाजा 28 फरवरी को प्लांट में नल की बटन दबाकर कलेक्टर को दिखा दिया गया कि सिवनी में पानी आ चुका है। वह दिन है और आज का दिन है सिवनी में अब तक पूरी तरह से नवीन जलावर्धन योजना का पानी नहीं पहुँच पाया है। आज भी माँग से कम मात्रा में पानी मिल रहा है और उस दिन के बाद से पीआरओ ने इस संबंध में मौन साध लिया है। पानी को लेकर कोई भी विज्ञप्ति जारी नहीं हो रही है।

चलिये एक काम हुआ प्रशासन की नजर में … अब आ गया मार्च .. कलेक्टर साब ने अगला काम सम्हाला। सब्जी मण्डी को एक पखवाड़े में शहर से बाहर फंेक दिया गया। पुरानी सब्जी मण्डी आज विधवा की माँग की तरह सूनी पड़ी है और नागपुर की सब्जी मण्डी किसी आवारा की रखैल की तरह.. पुरानी सब्जी मण्डी को नगर पालिका की पार्किंग बनाने के लिये माँग की गयी लेकिन उस पर प्रशासन ने हामी भरी न ही इंकार किया।

नतीजा यह है कि आज पुरानी सब्जी मण्डी सिसक रही है। वहीं बुधवारी में पार्किंग न होने के कारण लोगों का पैदल चलना तक दूभर हो रहा है। एक मिनिट के रास्ते में आधा घण्टे लग रहे हैं। चलिये नयी मण्डी की बात करें तो यहाँ पर न तो पानी के सही इंतजाम हैं न ही मुरमीकरण किया गया है और न ही दूसरी तरह की सुविधाएं मुहैया करायी गयी हैं। शिवराज सिंह चौहान के द्वारा दिये गये पाँच करोड़ रूपये में से सिर्फ दो करोड़ का काम हुआ है बाकी व्यापारियों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। आने वाली बरसात में यहाँ पर कीचड़ फैलेगा। बड़े वाहनों का जाना दूभर हो जायेगा। फल वालों के लिये अलग शेड नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन के वायदों से लोगों का मोहभंग हो रहा है।

चलिये यह भी अंजाम तक नहीं पहुँचा .. अब जिला प्रशासन ने एक नया तोता पाल लिया है जिले की स्वास्थ्य सेवाएं..। जिला अस्पताल में आधे से ज्यादा डॉक्टर नहीं हैं, मशीने सड़ रही हैं। गंदगी बदबू से दम घुट रहा है। पूरे जिले में कमोबेश यही आलम है लेकिन इस संबंध में काम करने की बजाय साब को शौक है कि इमारत को रंग बिरंगा करें। अरे साब अस्पताल है कोई केजी स्कूल नहीं कि रंगो, चिड़िया तोता परियों को देख बच्च खुश हो जाये।

अस्पताल भला कौन अपनी मर्जी से आना चाहता है। करना जो चाहिये वह नहीं किया जा रहा है। सरकारी डॉक्टर प्राईवेट प्रेक्टिस कर रहे हैं तो वहीं नीम हकीम घाव पकाकर नासूर बना रहे हैं। डिस्पेंसरी चल रही हैं। निजि अस्पताल लूट रहे हैं। निजि पैथोलॉजी लोगों की जेब पर डाका डाल रही हैं लेकिन इन पर किसी का बस नहीं चल रहा है। ऊपर से अस्पताल में तोड़ फोड़ आरंभ कर दी गयी है।

अजी साहब किसी एक काम को तो अंजाम तक पहुँचाईये किसी एक काम को। नरवाई जल रही है, खेत के खेत और घर सुलग रहे हैं लेकिन एक भी नरवाई जलाने वाले पर कार्यवाही नहीं! दमकलों का दम फूल रहा है लेकिन नयी दमकलों के लिये कुछ नहीं हो रहा है। बैनगंगा सूख रही है, जिले के तालाबों पर अतिक्रमण हो रहा है, गंदगी हो रही है लेकिन कुछ नहीं… हो रहा है तो हो रहा है।

आखिर कब कोई एक काम अंजाम तक पहुँचेगा, चाहे वो अस्पताल हो, मण्डी हो या फिर नवीन जलावर्धन .. सरजी हमारे टैक्स का दुरुपयोग कब तक आखिर कब तक और क्यों… किसी एक काम को तो पूरा करिये। आप तो कल चले जायंेगे लेकिन हमंे तो जीना यहाँ मरना यहाँ। आखिर कब तक.. सिवनी को आप प्रयोगशाला के सफेद चूहे समझते रहेंगे। सिवनी के विकास में हमारी भागीदारी कब होगी। कब हमसे पूछा जायेगा कि हम क्या चाहते हैं। जिला अस्पताल में बोरिंग कर सात लाख रूपये फूंक दिये गये। उतने में तो बड़ा टाँका बन जाता और मनमाना पानी मिलता। आखिर कब तक हमारे पैसों की ये होली होगी। आखिर कब तक . . . (आरती तिवारी की फेसबुक वाल से).

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