गंभीर मरीज हैं निजि एंबुलेंस के भरोसे!

 

 

जिला कलेक्टर को देना चाहिये इस ओर भी ध्यान

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। गंभीर बीमारी या दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीजों को सरकारी की बजाय निजि एंबुलेंस से ही नागपुर, जबलपुर जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जिले में वेंटीलेटर पर चल रही स्वास्थ्य सुविधाओं को पटरी पर लाने के जिला कलेक्टर के प्रयास भी नाकाफी ही दिख रहे हैं।

जिला अस्पताल के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि बहुत ही कम प्रकरणों में 108 एंबुलेंस के जरिये मरीज को जिले के बाहर भेजने की कार्यवाही की जाती है। इसके साथ ही साथ एंबुलेंस में स्पीड गर्वनर लगाया जाकर इसकी गति साठ किलोमीटर प्रतिघण्टा निर्धारित कर दी गयी है।

सूत्रों का कहना है कि राज्य स्तर पर जारी निर्देशों के कारण 108 एंबुलेंस की गति 60 किलो मीटर प्रति घण्टा निर्धारित की गयी है। इसके अलावा कुछ वाहनों का वातानुकूलित सिस्टम भी खराब ही चल रहा है, जिसके चलते भरी गर्मी में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सूत्रों की मानें तो जिला चिकित्सालय के आसपास निजि एंबुलेंस संचालकों का डेरा चौबीसों घण्टे रहता है। इनके द्वारा जिला चिकित्सालय से रिफर होने वाले मरीजों के परिजनों को सरकारी एंबुलेंस के न मिलने पर अपने वाहनों में नागपुर, जबलपुर या अन्य स्थानों पर ले जाया जाता है।

सूत्रों ने कहा कि जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा अस्पताल के सुधार का आगाज़ किया गया है, किन्तु वर्तमान हालातों को देखते हुए उनके प्रयास नाकाफी ही दिख रहे हैं। जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह जिस दिन जिला अस्पताल में निरीक्षण को नहीं जाते हैं उस दिन अस्पताल में अराजकता हावी होती दिखती है।

सूत्रों ने कहा कि जिला कलेक्टर को 108 एंबुलेंस की सेवाएं सुधारने की दिशा में भी पहल करना चाहिये, क्योंकि राज्य शासन के द्वारा इस सेवा को आऊट सोर्स किया गया है। इसमें एंबुलेंस संचालित करने वाली कंपनी को प्रति किलो मीटर मोटी रकम का भुगतान राज्य शासन के द्वारा किया जाता है।

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