एससीएन बन सकता है सीएमएचओ के गले की फांस!

 

 

नोटिस में कलेक्टर, संविदा कर्मी के बीच हुए विवाद का किया उल्लेख!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.के.सी. मेश्राम के द्वारा जारी किया गया एक आदेश उनके ही गले की फांस बनता दिख रहा है। मामला 04 मई को जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा किये गये जिला अस्पताल के निरीक्षण से जुड़ा हुआ है।

सीएमएचओ कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह अढ़ायच के द्वारा जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान अस्पताल के ब्हाय रोगी प्रभाग (ओपीडी) में एड्स नियंत्रण प्रभाग के कक्ष में गंदगी देखकर वहाँ उपस्थित संविदा कर्मचारी की जमकर खबर ली गयी थी। इस दौरान जिला कलेक्टर को सच्चाई से अवगत कराये जाने पर बजाय अस्पताल प्रशासन या सफाई ठेकेदार के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही करने के जिला कलेक्टर के द्वारा एड्स नियंत्रण सेल में परामर्शदाता को जमकर खरी खोटी सुनायी गयी।

सूत्रों ने बताया कि इसके उपरांत किसी वरिष्ठ अधिकारी के द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ.के.सी. मेश्राम पर इस बात के लिये दबाव बनाना आरंभ कर दिया गया कि ठोस आधारों के साथ संविदा कर्मी अशोक गौवंशी की सेवाएं समाप्त करने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा जाये।

सूत्रों की मानें तो इसके बाद सीएमएचओ डॉ.के.सी. मेश्राम के द्वारा आनन फानन ही 09 मई को जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के माध्यम से आईसीटीसी सेल में पदस्थ परामर्शदाता अशोक गौवंशी को एक कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया, यही नोटिस अब सीएमएचओ के गले की फांस बनता दिख रहा है।

सूत्रों ने बताया कि इस नोटिस में इस बात का उल्लेख किया गया है कि 06 मई को जिला कलेक्टर के द्वारा जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया गया गया था। इस निरीक्षण के दौरान अशोक गौवंशी के कक्ष में गंदगी पाये जाने के बाद उसका कारण पूछे जाने पर अशोक गौवंशी के द्वारा इसका संतोषप्रद जवाब दिये जाने के बाद जिला कलेक्टर से अनावश्यक वाद विवाद किया गया था।

सूत्रों ने आगे बताया कि इस नोटिस में यह भी कहा गया है कि अशोक गौवंशी के द्वारा उच्चाधिकारी के आदेशों की अव्हेलना (किन आदेशों की स्पष्ट नहीं) एवं उच्चाधिकारियों से अनावश्यक वाद विवाद करने का कृत्य संविदा नियमों के अनुरूप नहीं है। ऐसा करके अशोक गौवंशी के द्वारा अपने आप को अनुशासनात्मक कार्यवाही का भागीदार बना लिया गया है।

सूत्रों ने कहा कि इस नोटिस में तीन दिन की समय सीमा निर्धारित करते हुए इसका जवाब सीएमएचओ के द्वारा चाहा गया था। इस नोटिस में जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह और संविदा कर्मी अशोक गौवंशी के बीच हुए विवाद का उल्लेख करते हुए सीएमएचओ के द्वारा जाने अन्जाने में ही इस विवाद को हाई प्रोफाईल बना दिया गया है।

सूत्रों ने इस बात के संकेत भी दिये कि आने वाले समय में अगर इस विवाद की उच्च स्तरीय जाँच के आदेश राज्य शासन के द्वारा दिये जाते हैं तो संविदा कर्मचारी के द्वारा उनके कक्ष में जिला कलेक्टर के साथ हुए विवाद को ढाल बनाया जा सकता है, जिसके बाद विवाद किस बात को लेकर हुआ और इसके लिये दोषी कौन है जैसे प्रश्न भी सामने आ सकते हैं!