मुकुंदपुर रवाना हुआ आदमखोर हो रहा बाघ!

 

 

दो लोगों पर कर चुका था हमला, क्षेत्र में थी दहशत व्याप्त

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। महज तीन चार दिनों के अंदर ही दो लोगों पर हमला कर चुके लगभग आदमखोर हो रहे बाघ को वन विभाग के अमले के द्वारा सुरक्षित पकड़कर वन विभाग के आला अधिकारियों के निर्देश पर उसे मुकुंदपुर भेज दिया गया है। पेंच नेशनल पार्क के क्षेत्र संचालक विक्रम सिंह परिहार ने बताया कि ब्रहस्पतिवार 06 जून को वन परिक्षेत्र कुरई के तहत परासपानी बीट मंे एक बाघ का रेस्क्यू करने विशेष दल का गठन किया गया था।

उल्लेखनीय है कि 01 जून को कक्ष क्रमाँक 288 बीट परासपानी के समीप पंचम वल्द मोहन गजाए ग्राम पारासपानी गोंडीटोला निवासी को बाघ द्वारा घायल किया गया था। इसके बाद से ही वन विभाग के द्वारा सतत निगरानी, कैमरा ट्रेप एवं विशेष दल के द्वारा की जा रही थी।

इस घटना के बाद 04 जून को विद्युत लाईन को ठीक करने गये लाईनमेन यशवंत बिसेन पर कार्य करते समय बाघ के द्वारा हमला कर दिया गया। इस हमले में लाईन मेन बुरी तरह घायल हो गये थे। वन मण्डल दक्षिण सिवनी एवं पेंच टाईगर रिज़र्व के संयुक्त दल द्वारा 05 जून को क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया गया एवं रेस्क्यू हेतु एक पिंजरा उक्त क्षेत्र में लगाया गया।

इसी दौरान पेंच टाईगर रिज़र्व के क्षेत्र संचालक के निर्देशन में विशेष दल के द्वारा हाथियों को बाघ के रेस्क्यू करने हेतु बुलाया गया। 03 हाथियों का दल प्रातः घटना स्थल पर पहुँचा। इस संबंध में जिला प्रशासन से सहयोग लेकर पुलिस दल की व्यवस्था की गयी। घटना स्थल पर पुलिस दल, एस.डी.ओ.पी. बरघाट एवं टी.आई. कुरई उनके अन्य बल भी उपस्थित रहे।

घटना स्थल पर रणनीति बनाकर बाघ को निश्चेतन करने की तैयारी की गयी। ग्राम वासियों को बाघ वाले क्षेत्र में न पहुँचने देने के लिये चारों तरफ वन विभाग के कर्मचारियों एवं पुलिस दल का घेरा बनाया गया। समस्त कार्यवाही एवं हाथियों का मौके पर नेत्तृत्व उप संचालक, पेंच टाईगर रिज़र्व एम.बी. सिरसैया के द्वारा किया गया एवं डॉ.अखिलेश मिश्रा द्वारा साथ में रहकर तकनीकी कार्यवाही की गयी।

हाथियों से बाघ को अवलोकित कर यह प़ाया गया वह कमजोर है एवं चलने में असमर्थ है। इस पहलू को दृष्टिगत रखते हुए तथा आम जनता को कोई नुकसान न हो इसे भी ध्यान में रखते हुए सुबह के समय ही बाघ को उरकुड़ा वल्द लालाराम गहाने के गन्ने के खेत में निश्चेतन किया गया।

इसके बाद बाघ को स्टेचर पर सुरक्षित रखा गया एवं उसका शारीरिक परीक्षण किया जिसमें पाया कि गया कि बाघ की आयु तीन से चार साल के बीच है और वह नर बाघ है। परीक्षण उपरांत क्षेत्र संचालक, पेंच टाईगर रिज़र्व के निर्देशन में रेस्क्यू वाहन में स्थानांतरित किया गया। बताया गया है कि रेस्क्यू उपरांत भोपाल मुख्यालय से प्राप्त निर्देश के अनुसार बाघ को मुकुंदपुर भेजने की कार्यवाही की जा रही है।

इस कार्यवाही में पेंच टाईगर रिज़र्व, सिवनी के उप संचालक एम.बी. सिरसैया, सहायक वन संरक्षक बी.पी. तिवारी, उप वन मण्डल अधिकारी कुरई राकेश कोड़ापे, बसंत बरकड़े, परिक्षेत्र अधिकारी कुरई दानसी उईके, परिक्षेत्र अधिकारी, रूखड़, गौतम प्रसाद उईके, परिक्षेत्र अधिकारी घाट कोहका, बफर, राजूसिंह राजपूत, परिक्षेत्र अधिकारी, कर्माझिरी शिवकुमार गुर्जर, परिक्षेत्र अधिकारी रूखड़, बफर, ईश्वरी प्रसाद उईके, परिक्षेत्र अधिकारी कुरई एवं अन्य संबंधित कर्मचारियों द्वारा सराहनीय कार्य किया गया। इस रेस्क्यू में श्री केशु, श्री परताल, श्री सहादन सभी हाथी के महावतों द्वारा भी पूरी दक्षता के साथ बाघ को निश्चेतन करने में अपना विशेष योगदान दिया गया।

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