जानिए कैसी है पीएम नरेंद्र मोदी फिल्‍म

 

 

 

 

 

फिल्म- पीएम नेरेन्द्र मोदी

डायरेक्टर- उमंग कुमार

कलाकार-विवेव ओबरॉय

फिल्म टाइप- बायोग्राफी

डायरेक्टर उमंग कुमार की फिल्म पीएम नेरेन्द्र मोदी भारी विवादों के बाद आखिर अंत में सिनेमा घरों में रिलीज हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये बायोपिक ऐसे समय पर रिलीज हुई है, जब देश में हर तरफ चुनाव का माहौल था। चुनाव की वजह से 11 अप्रैल को रिलीज होने वाली इस फिल्म को विपक्षी पार्टियों के विरोध के चलते चुनाव आयोग ने आचार संहिता के दौरान इसकी रिलीज पर रोक लगा दी थी। आखिरकार अब यह फिल्म रिलीज हो रही है। लोकसभा चुनाव में मोदी की बंपर जीत 23 मई को हुई है, लेकिन फिल्म के निर्माताओं ने पहले से ही अपनी फिल्म के पोस्टरों पर पीएम नरेंद्र मोदी की वापसी की भविष्यवाणी कर दी थी।

 कहानी

फिल्म की कहानी सिंपल है। फिल्म की कहानी मोदी के चाय बेचने से लेकर देशसेवा करने तक और फिर प्रधानमंत्री बनने तक के सफर को दिखाया गया है। फिल्म की कहानी की शुरुआत 2013 की बीजेपी की उस बैठक से होती है, जिसमें नरेंद्र मोदी (विवेक ओबेरॉय) को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया जाता है। फिल्म के बीच में पीएम मोदी के संघर्षों को बताया गया है। फिल्म की कहानी का अंत साल 2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम पद की शपथ लेने पर होता है। फिल्म को देखकर लगता है कि विवेक ओबेरॉय और उनकी टीम ने चंद महीनों का इंतजार किया होता तो वो साल 2019 की झलक भी फिल्म में दिखा सकते थे। मोदी के जीवन में ऐसे कई उतार चढ़ाव आया,लेकिन उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मोदी के लाइफ में आए उन उतार चढ़ाव को जानने के लिए आपको पूरी फिल्म देखनी पड़ेगी।

डायरेक्शन और एक्टिंग

फिल्म की कहानी में और भी क्रिएटिव किया जा सकता था।  प्रड्यूसर संदीप सिंह द्वारा लिखी गई कहानी भले ही सिंपल हो लेकिन इंप्रेसिव है। फिल्म पी एम नरेंद्र मोदी सीधी-सपाट फिल्म है, बल्कि आजकल कितनी तो टीवी ऐड्स ही इस फिल्म से क्रिएटिव लगेंगी।  फिल्म के डायलॉग जोरदार हैं, तो स्क्रीनप्ले और स्क्रिप्ट भी कसी हुई है। फिल्म की लोकेशंस खूबसूरत बन पड़ी हैं। खासकर हिमालय में फिल्माए गए सींस की सिनेमैटॉग्राफी जबर्दस्त है। फिल्म का संगीत कहानी को गति देता है, तो बैकग्राउंड स्कोर भी अच्छा है। इस फिल्म की कहानी का बहुत बड़ा हिस्सा आपको मोदी जी के भाषणों का कलेक्शन लगेगा। मोदी जी के बारे में बहुत सारी किस्म-किस्म की जानकारी जगह-जगह मिलती है, लेकिन जो बातें आसानी से नहीं मिलतीं, उनपर थोड़ा फोकस किया गया होता, तो यकीनन ये फिल्म बेहतरीन हो जाती।

अब बात एक्टिंग की करें तो प्रधानमंत्री मोदी के रोल में विवेक ओबेरॉय का काम ठीक है। विवेक, मोदी के बॉडी-लैंग्वेज और बारीकियों को अच्छे से निभाते हुए नजर आए। अमित शाह के किरदार में मनोज जोशी भी काफी दमगार लगे।

(साई फीचर्स)

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