9वीं, 10वीं में फेल होते हैं अधिकांश बच्चे : देशभरतार

 

आठवीं तक सबको पास करने से होती है समस्या

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। कक्षा पहली से आठवीं तक सब बच्चों को पास करने की नीति के कारण 9वीं एवं 10वीं कक्षा में अधिकांश बच्चे फेल हो जाते हैं।

उक्ताशय के विचार व्यक्त करते हुए रविदास शिक्षा मिशन के संरक्षक डॉ.एल.के. देशभरतार और अध्यक्ष रघुवीर अहरवाल ने अपनी संयुक्त विज्ञप्ति में बताया कि यह दशा प्राईवेट और सरकारी दोनों स्कूलों में लगभग बराबर है। नर्सरी, केजी-1 और केजी- 2 की कक्षाओं में छोटी उम्र के बच्चों के प्रवेश के साथ ही इन कक्षाओं में अंग्रेजी की गिटपिट के कारण अधिकांश पालक अपने बच्चों को प्राईवेट स्कूलों में भर्त्ती कराना पसंद करते हैं। प्राईवेट स्कूलों में इस ढोंग के कारण जनता को लूटा जाता है।

विज्ञप्ति में उन्होंने आगे बताया कि कक्षा पहली में जो बच्चे दर्ज होते हैं वे आठवीं तक पास कर दिये जाते हैं। इस नीति के कारण बच्चे, पालक और शिक्षक पढ़ाई में ध्यान नहीं देते, लेकिन यही बच्चे कक्षा नवमीं एवं दसवी में बड़ी संख्या में फेल होते हैं। प्राईवेट स्कूलों की दसवीं और बारहवीं कक्षाओं के परिणाम सरकारी स्कूलों से अधिक खराब देखे जा सकते हैं। प्राईवेट स्कूल में जनता अपने बच्चों को पढ़ाना ज्यादा पसंद करती है। इसका कारण प्राईवेट स्कूलों की चमक दमक और ढोंग दिखावा है।

विज्ञप्ति में श्री देशभरतार और श्री अहरवाल ने कहा कि सरकारी स्कूलों की दशा बहुत दयनीय होती है, यहाँ पर्याप्त कमरे और शिक्षक नहीं होते हैं, शिक्षकों के पास शिक्षण कार्य के अलावा मध्यान्ह भोजन, साईकिल, छात्रवृत्ति, यूनिफॉर्म वितरण सहित बीसों प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्य होते हैं, जिनके कारण वे पढ़ाई लिखाई का काम ठीक से कर नहीं पाते हैं। कुछ शिक्षक लापरवाह भी होते हैं। इसके अलावा पूरे साल सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण के नाम पर स्कूल से दूर रखा जाता है।

रविदास शिक्षा मिशन के संरक्षक डॉ.एल.के. देशभरतार और अध्यक्ष रघुवीर अहरवाल ने आगे बताया कि दिल्ली और केरल के सरकारी स्कूल इस समय पूरे देश में सर्वश्रेष्ठ सिद्ध हो रहे हैं, जबकि प्रदेश के शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों को दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के स्कूल एवं दक्षिण कोरिया के स्कूलों के अवलोकन के लिये भेजा गया है, लेकिन वहाँ की नीति लागू नहीं की जा रही है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार अपनी कुल आय का 24 प्रतिशत हिस्सा सरकारी स्कूलों में खर्च करती है। वहाँ शिक्षक केवल शैक्षणिक कार्य करते हैं, अन्य कार्यों के लिये सरकारी स्कूलों में प्रबंधक नियुक्त किये गये हैं। इस कारण वहाँ के सरकारी स्कूल प्राईवेट स्कूलों से ज्यादा लोकप्रिय हैं।

विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि इसी प्रकार केरल सरकार अपनी कुल आय का 16 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा सरकारी स्कूलों में खर्च करती है। इससे वहाँ के सरकारी स्कूल देश में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। वहाँ की जनता लगभग सौ प्रतिशत शिक्षित है। इसके विपरीत प्रदेश की सरकार अपनी आय का मात्र 06 प्रतिशत हिस्सा सरकारी स्कूलों में खर्च करती है वहीं केन्द्र की भाजपा सरकार सकल राष्ट्रीय आय का 06 प्रतिशत से भी कम सरकारी स्कूलों में खर्च करती है। इन विसंगतियों के कारण देश और मध्य प्रदेश का शिक्षा स्तर बहुत सोचनीय है। रविदास शिक्षा मिशन ने प्रदेश सरकार से दिल्ली और केरल सरकार की शिक्षा नीति को अपनाने की अपील की है।

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