कलेक्टर की लताड़ भी बेकार

 

 

 

 

केवल तीन झोलाछाप पर दिखावे की कार्रवाई, बंद क्लीनिक भी खुल गए

(ब्यूरो कार्यालय)

ग्‍वालियर (साई)। झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई के मामले में कलेक्टर की लताड़ भी स्वास्थ्य विभाग पर बेअसर साबित हुई है। दिखावे के लिए तीन क्लीनिकों को सील किया, इसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। जिन क्लीनिक को बंद किया था वह भी अब दोबारा खुल गए हैं। गर्मी में मौसमी बीमारियों के शिकार बढ़ने से इन झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिकों पर मरीजों की भीड़ लग रही है।

शहर में झोलाछाप डॉक्टरों के कारण कई मरीजों की जान जा चुकी है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग इनके खिलाफ ठोस कार्रवाई करने से कतराता है। राजनीतिक के साथ ही विभागीय अफसरों का भी इन झोलाछाप डॉक्टरों को संरक्षण है। इसलिए वरिष्ठ अफसरों के निर्देश पर जब कभी टीम शहर में कार्रवाई के लिए निकलती है तो इनको पहले ही खबर लग जाती है। जब टीम क्लीनिक पर पहुंचती है तो वहां ताले लटके मिलते हैं। कलेक्टर अनुराग चौधरी ने जब इनके खिलाफ सख्त एक्शन के निर्देश दिए तो विभागीय अफसरों ने डीडी नगर में शिवा क्लीनिक, लक्ष्मीगंज में एक क्लीनिक एवं गुड़ी गुड़ा पर एक क्लीनिक को सील किया था। इस दिखावे के कारण विभागीय अफसर कलेक्टर के कोप से बच गए। साथ ही झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक भी चार दिन बाद ही खुल गए। अब विभागीय अफसर इन क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई करने की जगह चुप्पी साधकर बैठ गए हैं।

क्यों है जानलेवाः झोलाछाप डॉक्टर मरीजों को प्राथमिक उपचार के साथ ही हैवी दवाएं एवं ड्रिप तक चढ़ाते हैं। इससे कई बार इंजेक्शन के हैवी डोज होने के कारण मरीज की जान जाने पर हंगामे भी हो चुके हैं। परिजनों ने हंगामा किया, शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कोई ठोस एक्शन नहीं हो सका है। इन झोलाछाप डॉक्टरों की राजनीति के साथ ही विभाग में भी गहरी पैठ हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई होने से पहले ही इन तक विभाग के लोग ही खबर भी पहुंचा देते हैं।