शुद्ध पेयजल ही नहीं मिल पा रहा नागरिकों को

 

मुझे शिकायत इस बात से है कि सिवनी के गाँधी चौक को सबसे महत्वपूर्ण बल्कि शहर का हृदय स्थल भी कहा जाता है लेकिन यहाँ शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। नगर पालिका का ध्यान इस ओर कई बार आकृष्ट भी कराया जा चुका है लेकिन शायद नगर पालिका प्रशासन इस क्षेत्र में एक अदद सार्वजनिक नल की व्यवस्था करने में भी रूचि नहीं रखता है।

गौरतलब होगा कि वर्तमान में सिवनी में भाजपा शासित नगर पालिका है और शुक्रवारी का गाँधी चौक भी एक प्रकार से भाजपाई क्षेत्र ही कहा जाता है उसके बाद भी इस स्थान पर सार्वजनिक नल का न होना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यहाँ पर नल के जो कनेक्शन दिये भी गये हैं उनमें से अधिकाश में तो मोटर लगाने के बाद भी पानी नहीं आता है। गांधी चौक व्यापार की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान है।

यहाँ रोजाना ही मजदूर वर्ग प्रातःकाल आकर अपनी उपस्थिति देता है। नगर पालिका के द्वारा इस बात की ओर ध्यान नहीं दिया जाता है कि गाँधी चौक आने वाले मजदूरों के कण्ठ यदि प्यासे होते होंगे तो वे आखिर कहाँ से शीतल जल प्राप्त करके अपनी प्यास को बुझाते होंगे। दुकान पर जाकर बोतल बंद पानी या पानी का पाउच खरीदना (जिसके पानी की शुद्धता की कोई गांरटी भी नहीं होती है) हर मजदूर उपर्युक्त नहीं समझता है।

वास्तव में देखा जाये तो नगर पालिका के द्वारा मानवता के नाते भी कुछ कार्य विशेष कराये जाने चाहिये। सिर्फ और सिर्फ निर्माण कार्यों की ओर ध्यान देकर कमीशन बाजी के खेल में उलझे रहना शहर वासी कतई पसंद नहीं कर रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि नगर पालिका के द्वारा शुक्रवारी स्थित गाँधी चौक में कम से कम एक सार्वजनिक नल की व्यवस्था अवश्य की जाये।

सिवनी का ये दुर्भाग्य ही माना जायेगा कि यहाँ के नेता ज्यादातर संगठन की राजनीति में ही व्यस्त रहते हैं उन्हें इस बात से कोई सरोकार नजर नहीं आता है कि संबंधितों की बेरूखी के कारण आम जनता परेशान हो रही है। मजे की बात तो ये है कि संगठन की मात्र राजनीति करने से भी इन नेताओं को ज्यादा कुछ हासिल नहीं होता है, हाल का राजनीतिक घटनाक्रम इसका प्रत्यक्ष उदाहरण माना जा सकता है।

रतन

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