जानिये जूता किंग बाटा के बारे में!

(इसरार खान)

भोपाल (साई)। भारत में रह कर बाटा का नाम न सुना हो ऐसा कहना मुश्किल है। देश के मिडिल क्लास का फेवरेट शू ब्रैंड बाटा की कहानी बड़ी दिलचस्प है। आईये जानते हैं बाटा के बारे में कुछ रोचक बातें…

देशी नहीं विदेशी : अगर आपको लगता है कि बाटा देशी कंपनी है तो आप गलत हैं। 1894 में चेक गणराज्य से इस कंपनी की शुरूआत टॉमस बाटा ने की थी।

भारत में कैसे आया : बाटा की शुरूआत करने वाले टॉमस बाटा जब 1932 में एक प्लेनक्रैश में मारे गये तब उनके 18 साल के बेटे ने कारोबार सम्हाला और विदेशों में फैलाना आरंभ कर दिया। कंपनी का विस्तार करने और रबर – लेदर के लिये वे 1935 के आसपास कराची होते हुए कोलकाता पहुँचे।

भारत में बने देशी : 1930 में भारत में जूतों की इण्डस्ट्री नहीं थी। जूते जापान से आयात होते थे। बाटा ने 1939 में कोलकाता में जूते बनाना आरंभ किया। बाटा जल्द ही 3, 500 जूते हर हफ्ते बेचने लगा। इसके बाद बाटा ने पटना में लेदर फैक्ट्री आरंभ की। वह इलाका अब बाटागंज के नाम से जाना जाता है।

ग्लोबल बाटा : बाटा की 18 देशों में 23 मेन्युफेक्चरिंग यूनिट्स हैं। 20वीं शताब्दी की शुरूआत में बाटा यूरोप की सबसे बड़ी शू कंपनी थी। 2004 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने बाटा को दुनिया की सबसे बड़ी शू मेन्युफेक्चरर और रिटेलर माना। बाटा अब तक 14 अरब जोड़ी जूते बना चुका है, जो सबसे ज्यादा हैं।

बाटा यूनिवर्सिटी : बाटा के फाउण्डर टॉमस बाटा के नाम पर 2001 में चेक गणराज्य में यह विश्व विद्यालय खोला गया। यूनिवर्सिटी में लगभग 10 हजार विद्यार्थी हैं और यहाँ कई विषयों की पढ़ाई होती है।

भारत का शू किंग : बाटा ने पिछले साल भारत में ऑनलाईन 6.3 लाख जोड़ी जूते बेचे। बाटा के भारत में 1300 से ज्यादा स्टोर्स हैं। बाटा अब केवल जूते ही नहीं बल्कि बैग्स, मोजे, पॉलिश आदि सामान भी बेचने लगा है।

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