नवरात्र तक बारिश के बन रहे योग!

 

 

खरीफ की फसलों पर आफत बनकर न बरसे पानी!

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। जिस तरह के सिस्टम एक के बाद एक निर्मित हो रहे हैं उसे देखते हुए सितंबर के पूरे सप्ताह अर्थात नवरात्र तक जिले में बरसात होने की संभावनाएं दिख रही हैं।

मौसम विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि प्रदेश में मौजूदा दौर में सक्रिय तीन सिस्टम के अलावा भी बंगाल की खड़ी के आसपास एक नया सिस्टम बन रहा है। इस सिस्टम की वजह से पूरे सितंबर महीने में बारिश होगी। यह बारिश किसी जिले में कम, तो किसी ज़िले में ज्यादा होगी।

सूत्रों ने बताया कि भारी बारिश की वजह से धान की फसल को ज्यादा नुक़सान नहीं होगा लेकिन सोयाबीन सहित दूसरी फसल को सबसे ज्यादा नुक़सान हो रहा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 23 फीसदी बारिश ज्यादा हो चुकी है। इस आंकड़े के आगे और बढ़ने की उम्मीद है।

मध्य प्रदेश में लगातार हो रही भारी वर्षा से खेतों में पानी भर जाने के कारण कम से कम 3500 हेक्टेयर भूमि में खरीफ कालीन फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है जबकि आगे भी इसकी क्षति का दायरा बढ़ने की संभावना है। फिलहाल 70 करोड़ रूपये मूल्य की फसलों का नुकसान होने का आरंभिक अनुमान है जिसमें सोयाबीन, मूंग, उड़द आदि शामिल हैं। दूसरी ओर बारिश से गन्ना एवं धान की फसल को फायदा हुआ है।

मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में चूँकि अब भी वर्षा हो रही है जबकि खेतों की मिट्टी में पानी सोखने की क्षमता नहीं है इसलिये वहाँ जल जमाव का खतरा बना हुआ है। इससे फसल को आगे भी नुकसान होने की आशंका है। 17 जिलों में पहले ही भारी वर्षा के कारण खेतों में पानी भरा हुआ है जबकि 32 जिलों में मूसलाधार वर्षा की चेतावनी दी गयी है।

आरंभिक अनुमान के अनुसार मंदसौर जिले में 790 हेक्टेयर शाजापुर में 500 हेक्टेयर, खण्डवा में 367 हेक्टेयर, खरगौन में 355 हेक्टेयर, अलीराजपुर में 114 हेक्टेयर, धार में 70 हेक्टेयर तथा बुरहानपुर जिले में 25 हेक्टेयर के रकबे में खरीफ कालीन फसल चौपट हो गयी।

इसके अलावा फिलहाल जिन खेतों में पानी भरा हुआ है वहाँ न तो निदाई गुड़ाई हुई और न ही खरपतवार नाशकों का उपयोग किया जा सका। मालवा क्षेत्र में बारिश से फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है। हालांकि वहाँ सोयाबीन के पौधे 10-12 दिनों तक वर्षा का प्रकोप सहने की स्थिति में हैं लेकिन यदि दाना निकलने पर बारिश हुई या खेतों में पानी भरा रहा तो कठिनाई हो सकती है।

यद्यपि कृषि और राजस्व विभाग को फसल नुकसान का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण इसमें काफी दिक्कत आ रही है। पहले 31 अगस्त तक की क्षति की रिपोर्ट माँगी गयी थी वह भी नहीं मिल पायी है। वर्षा थमने के बाद ही तस्वीर कुछ हद तक स्पष्ट हो पायेगी।

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